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Rampur News: गिरफ्तारी से पहले बाबा अनूप सिंह ने वीडियो वायरल कर रखा पक्ष
Thu, 08 May 2025 01:34 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Thu, 08 May 2025 01:34 AM IST
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बिलासपुर। उत्तराखंड के नानकमत्ता गुरुद्वारा साहिब के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या के षड्यंत्र के आरोप में गिरफ्तारी से पहले बाबा अनूप सिंह ने एक वीडियो जारी किया है। उन्होंने इस वीडियो में खुद को बाबा तरसेम हत्याकांड से पूरी तरह अलग बताया है और दावा किया कि उनका इस हत्याकांड से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और दिल्ली समेत अन्य गुरुद्वारों में भी यह बात वह कह चुके हैं। साथ ही उन्होंने यूपी-उत्तराखंड की संगत से अपील की कि उन्हें अपने गुरु पर पूरा विश्वास है कि वह उन्हें न्याय दिलवाएंगे।
यह वायरल वीडियो बुधवार दोपहर के बाद पूरे बिलासपुर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी वीडियो तेजी से ट्रेंड करने लगा और लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे थे। दूसरी ओर, दिल्ली कार सेवा वाले बाबा अनूप सिंह उर्फ वीर जी की गिरफ्तारी से उनके समर्थक मायूस नजर आए।
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बुधवार को नवाबगंज गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग बाबा को हत्याकांड जैसे जघन्य अपराध से अलग बताते हुए उन्हें समाजहित में कार्य करने वाला सेवादार बता रहे थे। समर्थकों का कहना था कि बाबा अनूप सिंह का नाम केवल संदेह के रूप में हत्याकांड में लिया गया है।
मंगलवार को उत्तराखंड एसटीएफ ने उन्हें हरिद्वार क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया था। बाबा के समर्थक उनसे मिलने के लिए उत्तराखंड के उधम सिंह नगर पहुंच गए हैं। गिरफ्तारी के दूसरे दिन नवाबगंज के गुरुद्वारे के आसपास भी खामोशी थी। गांव में इधर-उधर बैठे लोग बाबा को निर्दोष बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर दुःख जता रहे थे।
गुरुद्वारे में केवल चंद लोग मौजूद थे, जो आपस में बात कर रहे थे। बाबा अनूप सिंह की गैर मौजूदगी में गुरुद्वारे का संचालन करने वाले बाबा गुरमीत सिंह भी गुरुद्वारे में उपस्थित नहीं थे।
कबड्डी के कोच से गुरुद्वारे के प्रमुख सेवादार बने थे बाबा अनूप
गुरुद्वारे में मिले बुजुर्ग सेवादार भगवान सिंह उर्फ भाई जी और बाबा कुहाड़ सिंह ने बताया कि बाबा अनूप सिंह जी का जन्म पंजाब में हुआ था और वह पटियाला स्थित एक स्कूल में कबड्डी के कोच थे। दिल्ली कार सेवा वाले बाबा फौजा सिंह एक बार उनके स्कूल पहुंचे थे और उनके कार्य से काफी प्रभावित हुए थे। इसके बाद, बाबा फौजा सिंह ने अनूप सिंह को दिल्ली कार सेवा वाले बाबा हरबंस सिंह के पास भेजा, जहां बाबा हरबंस सिंह ने 1993 में बाबा वचन सिंह के साथ उन्हें नानकपुरी टांडा गुरुद्वारे भेज दिया।
यहां बाबा अनूप सिंह ने कार सेवा का बीड़ा उठाया, अपने कपड़े घर भेज दिए और कारसेवा का चोला पहन लिया। उन्होंने नानकपुरी टांडा गुरुद्वारे का विकास भी कराया। इसके बाद, बाबा अनूप सिंह पंजाब चले गए और 1999 में हरबंस सिंह और वचन सिंह ने उन्हें नवाबगंज गुरुद्वारे की जिम्मेदारी सौंपी। तब से वह लगातार गुरुद्वारे की सेवा में लगे रहे।
गुरुद्वारे के दोनों सेवादारों ने यह भी दावा किया कि बाबा अनूप सिंह को हत्या के मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने गुरु पर पूरा विश्वास है और वह जल्द ही निर्दोष साबित होकर लौटेंगे।
गुरुद्वारे में नहीं दिखी संगत, पसरा सन्नाटा
नवाबगंज गुरुद्वारे में रोजाना संगत की भीड़ रहती थी, लेकिन बुधवार को वहां कोई संगत दिखाई नहीं दी। गुरुद्वारे में काम करने वाले सेवादारों ने बताया कि बाबा अनूप सिंह जी की गिरफ्तारी के बाद से सभी लोग बेहद परेशान हैं, इसलिए इस दिन संगत कम आई। गुरुद्वारे में केवल कुछ लोग सेवा करते हुए देखे गए। गांव की गलियों में भी वीरानगी सी महसूस हो रही थी।
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उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और दिल्ली समेत अन्य गुरुद्वारों में भी यह बात वह कह चुके हैं। साथ ही उन्होंने यूपी-उत्तराखंड की संगत से अपील की कि उन्हें अपने गुरु पर पूरा विश्वास है कि वह उन्हें न्याय दिलवाएंगे।
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यह वायरल वीडियो बुधवार दोपहर के बाद पूरे बिलासपुर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी वीडियो तेजी से ट्रेंड करने लगा और लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे थे। दूसरी ओर, दिल्ली कार सेवा वाले बाबा अनूप सिंह उर्फ वीर जी की गिरफ्तारी से उनके समर्थक मायूस नजर आए।
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बुधवार को नवाबगंज गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग बाबा को हत्याकांड जैसे जघन्य अपराध से अलग बताते हुए उन्हें समाजहित में कार्य करने वाला सेवादार बता रहे थे। समर्थकों का कहना था कि बाबा अनूप सिंह का नाम केवल संदेह के रूप में हत्याकांड में लिया गया है।
मंगलवार को उत्तराखंड एसटीएफ ने उन्हें हरिद्वार क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया था। बाबा के समर्थक उनसे मिलने के लिए उत्तराखंड के उधम सिंह नगर पहुंच गए हैं। गिरफ्तारी के दूसरे दिन नवाबगंज के गुरुद्वारे के आसपास भी खामोशी थी। गांव में इधर-उधर बैठे लोग बाबा को निर्दोष बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर दुःख जता रहे थे।
गुरुद्वारे में केवल चंद लोग मौजूद थे, जो आपस में बात कर रहे थे। बाबा अनूप सिंह की गैर मौजूदगी में गुरुद्वारे का संचालन करने वाले बाबा गुरमीत सिंह भी गुरुद्वारे में उपस्थित नहीं थे।
कबड्डी के कोच से गुरुद्वारे के प्रमुख सेवादार बने थे बाबा अनूप
गुरुद्वारे में मिले बुजुर्ग सेवादार भगवान सिंह उर्फ भाई जी और बाबा कुहाड़ सिंह ने बताया कि बाबा अनूप सिंह जी का जन्म पंजाब में हुआ था और वह पटियाला स्थित एक स्कूल में कबड्डी के कोच थे। दिल्ली कार सेवा वाले बाबा फौजा सिंह एक बार उनके स्कूल पहुंचे थे और उनके कार्य से काफी प्रभावित हुए थे। इसके बाद, बाबा फौजा सिंह ने अनूप सिंह को दिल्ली कार सेवा वाले बाबा हरबंस सिंह के पास भेजा, जहां बाबा हरबंस सिंह ने 1993 में बाबा वचन सिंह के साथ उन्हें नानकपुरी टांडा गुरुद्वारे भेज दिया।
यहां बाबा अनूप सिंह ने कार सेवा का बीड़ा उठाया, अपने कपड़े घर भेज दिए और कारसेवा का चोला पहन लिया। उन्होंने नानकपुरी टांडा गुरुद्वारे का विकास भी कराया। इसके बाद, बाबा अनूप सिंह पंजाब चले गए और 1999 में हरबंस सिंह और वचन सिंह ने उन्हें नवाबगंज गुरुद्वारे की जिम्मेदारी सौंपी। तब से वह लगातार गुरुद्वारे की सेवा में लगे रहे।
गुरुद्वारे के दोनों सेवादारों ने यह भी दावा किया कि बाबा अनूप सिंह को हत्या के मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने गुरु पर पूरा विश्वास है और वह जल्द ही निर्दोष साबित होकर लौटेंगे।
गुरुद्वारे में नहीं दिखी संगत, पसरा सन्नाटा
नवाबगंज गुरुद्वारे में रोजाना संगत की भीड़ रहती थी, लेकिन बुधवार को वहां कोई संगत दिखाई नहीं दी। गुरुद्वारे में काम करने वाले सेवादारों ने बताया कि बाबा अनूप सिंह जी की गिरफ्तारी के बाद से सभी लोग बेहद परेशान हैं, इसलिए इस दिन संगत कम आई। गुरुद्वारे में केवल कुछ लोग सेवा करते हुए देखे गए। गांव की गलियों में भी वीरानगी सी महसूस हो रही थी।