सपा में घमासान: रामपुर में समाजवादी प्रत्याशी के विरोध में आजमवादी, पूर्व जिलाध्यक्ष बोले- बसपा को समर्थन
रामपुर लोकसभा सीट पर सपा में घमासान जारी है। आजम खां समर्थकों ने सपा प्रत्याशी का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है। इस पर पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि वह बसपा का समर्थन कर रहे हैं।
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लोकसभा चुनाव के लिए रामपुर की सीट पर घमासान जारी है। सपा प्रत्याशी मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी के सामने पार्टी की गुटबाजी को भेदना चुनौती बन गया है। समाजवादी और आजमवादी के बीच गुटबाजी की चर्चाओं पर पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने मुहर लगा दी है।
आजम खां के करीबी वीरेंद्र गोयल ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ जाकर इस चुनाव में बसपा को समर्थन देने का एलान किया है। उनका कहना है कि आजम खां तो जेल में हैं और पार्टी ने कोई जिम्मेदारी सौंपी नहीं है। ऐसे में वो किसी को तो चुनाव लड़ाएंगे।
सपा प्रत्याशी मोहिब्बुल्लाह नदवी गुटबाजी के फेर में फंसते नजर आ रहे हैं। नामांकन दाखिल करने से लेकर आज तक आजम समर्थक उनके साथ नहीं आए हैं। चर्चा तो थी कि आजमवादी समाजवादी के प्रत्याशी का साथ नहीं दे रहे हैं। आजम खां के करीबी माने जाने वाले पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने बसपा प्रत्याशी का समर्थन करने की बात कहकर इस चर्चा पर मुहर लगा दी।
उनका कहना है कि सपा प्रत्याशी मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी उन लोगों से हाथ मिला रहे हैं, जो उपचुनाव में सपा की हार का कारण बने थे। जिन्होंने रामपुर में मुस्लिमों मतदाताओं को वोट डालने ही नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि आजम खां तो जेल में हैं, उन्होंने अभी कुछ इशारा नहीं किया, लेकिन मैंने बसपा के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने का फैसला किया है।
उनका कहना है कि हां बसपा के समर्थन में प्रचार कर रहा हूं, सपा पार्टी निकालना चाहे तो निकाल दे। रामपुर सीट पर पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होना है, ऐसे में चार दिन पहले सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने गुटबाजी को हवा देते हुए बसपा को चुनाव लड़ाने का एलान कर दिया है। ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म है।
आजम को सता रहा रामपुर पर पकड़ कमजोर होने का डर
रामपुर में आजम खां का दबदबा रहा है। वो दस बार विधायक चुने गए, एक बार सांसद रहे और एक बार राज्यसभा के सदस्य रहे। उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम दो बार विधायक जरूर बने, लेकिन दोनों बार उनकी विधायकी चली गई । आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा विधायक के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्य भी रही हैं।
आजम खां पत्नी और बेटे सहित जेल में हैं। सजायाफ्ता होने की वजह से तीनों फिलहाल चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। आजम खां के विरोधियों का आरोप है कि रामपुर सीट से अपनी पकड़ को बरकरार रखने के लिए आजम खां ने पार्टी को प्रत्याशी के फेर में उलझाने की कोशिश की।
ताकि इस सीट पर उनकी पकड़ बनी रही। लेकिन आजम खान का यह दांव तो नहीं चला, बल्कि उनके करीबी भी टिकट से हाथ धो बैठे। ऐसे में आजम खां के करीबियों का बसपा का समर्थन करने से रामपुर सीट पर समीकरण और उलझते नजर आ रहे हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष के बसपा के लिए प्रचार करने के मामले में हाईकमान को अवगत कराया है, जैसे भी निर्देश होंगे कार्रवाई करेंगे। अन्य समर्थकों की भी रिपोर्ट दी है, लेकिन अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं। - अजय सागर, जिलाध्यक्ष सपा