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जेल से आजम ने दर्ज की बड़ी जीत, रामपुर में कायम रहा सपा का दबदबा
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सपा सांसद आजम खां ने जेल में रहकर भी रामपुर में सपा का सियासी किला न सिर्फ बचाए रखा बल्कि पिछले चुनावों की तुलना में और अधिक मजबूती के साथ बड़ी जीत दर्ज की। आजम खां के साथ ही उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने भी स्वार विधानसभा सीट पर 61 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।
सपा सांसद आजम खां इन दिनों सीतापुर जेल में बंद हैं। जेल से ही उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन के बाद चुनावी सरगर्मियों में रामपुर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में आजम खां का जिक्र रहा। उनके जेल में होने के कारण समर्थकों और मतदाताओं की सहानुभूति उनके साथ रही। चुनाव प्रचार के दौरान कार्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों में उनकी गैर मौजूदगी में कुर्सी पर उनकी तस्वीर रखी नजर आई। इन सब बातों का असर भी चुनाव परिणाम में देखने को मिला।
आजम खां को 131225 वोट मिले जो कि साल 2017 में मिले 102100 वोटों से 29125 वोट अधिक थे। पिछली बार आजम खां ने भाजपा प्रत्याशी शिव बहादुर सक्सेना को 46642 वोटों से हराया था जबकि इस बार उन्होंने शिव बहादुर सक्सेना के बेटे और भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना को 55141 वोटों से शिकस्त दी। यानि आजम खां की जीत के मतों का अंतर पिछले चुनावों की तुलना में 8299 अधिक रहा। इसके साथ ही आजम खां जेल में रहकर भी चमरौआ और स्वार की सीट पर भी सपा पुन: जिताने में सफल रहे।
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आजम खां और अब्दुल्ला दोनों के वोट बढ़े
सपा सांसद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम दोनों के ही वोट पिछले चुनावों की तुलना में इस बार काफी बढ़ गए। अब्दुल्ला आजम को पिछली बार 106443 वोट मिले थे जबकि इस बार 126162 वोट मिले, इसी प्रकार आजम खां को पिछली बार 102100 वोट मिले थे जबकि इस बार 131225 वोट मिले। हालांकि पिछली बार भी अब्दुल्ला आजम की जीत का अंतर आजम खां से अधिक रहा था और इस बार भी अब्दुल्ला आजम की जीत का अंतर आजम खां से अधिक रहा। अब्दुल्ला आजम ने जिले की पांचों विधानसभा सीटों में सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। सबसे कम अंतर से बिलासपुर से भाजपा प्रत्याशी बलदेव सिंह औलख ने जीत दर्ज की है। बलदेव सिंह औलख ने 307 वोटों से जीत दर्ज की।
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सपा सांसद आजम खां इन दिनों सीतापुर जेल में बंद हैं। जेल से ही उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन के बाद चुनावी सरगर्मियों में रामपुर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में आजम खां का जिक्र रहा। उनके जेल में होने के कारण समर्थकों और मतदाताओं की सहानुभूति उनके साथ रही। चुनाव प्रचार के दौरान कार्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों में उनकी गैर मौजूदगी में कुर्सी पर उनकी तस्वीर रखी नजर आई। इन सब बातों का असर भी चुनाव परिणाम में देखने को मिला।
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आजम खां को 131225 वोट मिले जो कि साल 2017 में मिले 102100 वोटों से 29125 वोट अधिक थे। पिछली बार आजम खां ने भाजपा प्रत्याशी शिव बहादुर सक्सेना को 46642 वोटों से हराया था जबकि इस बार उन्होंने शिव बहादुर सक्सेना के बेटे और भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना को 55141 वोटों से शिकस्त दी। यानि आजम खां की जीत के मतों का अंतर पिछले चुनावों की तुलना में 8299 अधिक रहा। इसके साथ ही आजम खां जेल में रहकर भी चमरौआ और स्वार की सीट पर भी सपा पुन: जिताने में सफल रहे।
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आजम खां और अब्दुल्ला दोनों के वोट बढ़े
सपा सांसद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम दोनों के ही वोट पिछले चुनावों की तुलना में इस बार काफी बढ़ गए। अब्दुल्ला आजम को पिछली बार 106443 वोट मिले थे जबकि इस बार 126162 वोट मिले, इसी प्रकार आजम खां को पिछली बार 102100 वोट मिले थे जबकि इस बार 131225 वोट मिले। हालांकि पिछली बार भी अब्दुल्ला आजम की जीत का अंतर आजम खां से अधिक रहा था और इस बार भी अब्दुल्ला आजम की जीत का अंतर आजम खां से अधिक रहा। अब्दुल्ला आजम ने जिले की पांचों विधानसभा सीटों में सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। सबसे कम अंतर से बिलासपुर से भाजपा प्रत्याशी बलदेव सिंह औलख ने जीत दर्ज की है। बलदेव सिंह औलख ने 307 वोटों से जीत दर्ज की।