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घर जल कर राख, इस बार कहां मनाएंगे दिवाली
Updated Sat, 14 Oct 2017 10:23 PM IST
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रोहड़ू।
पुजारली गांव में अग्निकांड प्रभावित परिवारों की दिवाली दूसरों की छत के नीचे मनेगी। आलीशान घरों में हंसते खेलते परिवार के साथ दिन गुजारने वाले 17 परिवार आज दूसरों के रहमों कर्म पर दो वक्त की रोटी खाने को मजबूर हैं। तीन दिन बीतने के बाद अभी तक कोई संस्था प्रभावितों की सहायता के लिए आगे नहीं आ रही है।
प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत से अग्निकांड प्रभावितों के घर बनने संभव नहीं हैं। सर्दी के दिनों में रहने के लिए छत बनाएं या फिर खाने-पहनने के लिए व्यवस्था करें, इसकी चिंता प्रभावितों के चेहरों पर साफ झलक रही है। आसपास के गांव से लोग दुख व्यक्त करने जरूर पहुंच रहे। सहायता के नाम पर प्रशासन के अलावा अभी तक पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रवीण छाजटा ने आठ बिस्तर उपलब्ध करवाए हैं। नेता चुनावी बेला पर प्रभावितों के पास पहुंच कर दुख व्यक्त कर लौट चुके हैं। सर्दियों के दिनों में न कोई रोजगार की संभावना और न ही कमाई का कोई दूसरा विकल्प यहां पर उपलब्ध है। पंद्रह जनवरी 2017 की रात तांगणू गांव में इससे पहले क्षेत्र का सबसे बड़ा अग्निकांड हुआ था। वहां भी 48 परिवार बेघर हुए थे। मामला सामने आने के बाद प्रदेश के अलावा दूसरे राज्य की स्वयंसेवी संस्थाओं ने प्रभावितों की मदद की थी। एसडीएम घनश्याम दास शर्मा का कहना है कि प्रशासन की ओर से मैनुअल के अनुसार पूर्ण राहत दी जाएगी। उन्होंने कहा कि तांगणू में सहयोग करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं से अग्निकांड प्रभावितों के सहयोग के लिए आगे आने का आग्रह किया जाएगा।
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पुजारली गांव में अग्निकांड प्रभावित परिवारों की दिवाली दूसरों की छत के नीचे मनेगी। आलीशान घरों में हंसते खेलते परिवार के साथ दिन गुजारने वाले 17 परिवार आज दूसरों के रहमों कर्म पर दो वक्त की रोटी खाने को मजबूर हैं। तीन दिन बीतने के बाद अभी तक कोई संस्था प्रभावितों की सहायता के लिए आगे नहीं आ रही है।
प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत से अग्निकांड प्रभावितों के घर बनने संभव नहीं हैं। सर्दी के दिनों में रहने के लिए छत बनाएं या फिर खाने-पहनने के लिए व्यवस्था करें, इसकी चिंता प्रभावितों के चेहरों पर साफ झलक रही है। आसपास के गांव से लोग दुख व्यक्त करने जरूर पहुंच रहे। सहायता के नाम पर प्रशासन के अलावा अभी तक पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रवीण छाजटा ने आठ बिस्तर उपलब्ध करवाए हैं। नेता चुनावी बेला पर प्रभावितों के पास पहुंच कर दुख व्यक्त कर लौट चुके हैं। सर्दियों के दिनों में न कोई रोजगार की संभावना और न ही कमाई का कोई दूसरा विकल्प यहां पर उपलब्ध है। पंद्रह जनवरी 2017 की रात तांगणू गांव में इससे पहले क्षेत्र का सबसे बड़ा अग्निकांड हुआ था। वहां भी 48 परिवार बेघर हुए थे। मामला सामने आने के बाद प्रदेश के अलावा दूसरे राज्य की स्वयंसेवी संस्थाओं ने प्रभावितों की मदद की थी। एसडीएम घनश्याम दास शर्मा का कहना है कि प्रशासन की ओर से मैनुअल के अनुसार पूर्ण राहत दी जाएगी। उन्होंने कहा कि तांगणू में सहयोग करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं से अग्निकांड प्रभावितों के सहयोग के लिए आगे आने का आग्रह किया जाएगा।
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