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बिलिंग कंपनी उपभोक्ताओं के नहीं बना पा रही बिल
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रामपुर। बिजली विभाग की ओर से बिलिंग का काम कर रही बिलिंग कंपनी उपभोक्ताओं के बिल तक नहीं बना पा रही है। आलम यह है कि शहर में तमाम उपभोक्ताओं को बिल नहीं मिले हैं। मीटर रीडरों के घरों तक न पहुंचने की वजह से यह दिक्कत आ रही है। ऐसे में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ता बिजली दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर परेशान हैं।
बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी की वजह से अधिकांश प्राइवेट हाथों में चला गया है। यहां तक कि बिलिंग का काम भी निजी कंपनी फ्लूएंट ग्रिड की ओर से कराया जा रहा है। इसके तहत कंपनी के कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचने के बाद उनके मीटर से रीडिंग लेकर बिल निकालकर देना होता है, जिसका उपभोक्ता भुगतान करते हैं। लेकिन, रामपुर में तो उपभोक्ताओं को बिल ही नहीं मिल पा रहे हैं। आलम यह है कि पिछले माह महज 60 से 80 फीसदी उपभोक्ताओं के ही बिल बन सके थे। बीस फीसदी उपभोक्ताओं के बिल ही नहीं बन सके। यह वह आंकड़ा है जो कंपनी ने विभाग के अफसरों को उपलब्ध कराया है। हकीकत में तो महज पचास फीसदी ही बिलिंग हो सकी है। यही वजह है जो हर रोज उपभोक्ताओं की लाइन बिल बनवाने के लिए लगी रहती है। दरअसल, कंपनी के कर्मचारी उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। बिना जाए ही उपभोक्ताओं के बिल बना दिए जाते हैं, जिस कारण बिल उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाता है। उल्टा कंपनी के लोग अधिकारियों को गुमराह करते हुए उपभोक्ता के न मिलने की बात कहकर मामला टाल देते हैं। इससे विभाग को न सिर्फ राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी एक साथ भारी भरकम बिल आने का डर सता रहा है, लेकिन बिलिंग कंपनी पूरी तरह से लापरवाह बनी हुई है।
बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी की वजह से अधिकांश प्राइवेट हाथों में चला गया है। यहां तक कि बिलिंग का काम भी निजी कंपनी फ्लूएंट ग्रिड की ओर से कराया जा रहा है। इसके तहत कंपनी के कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचने के बाद उनके मीटर से रीडिंग लेकर बिल निकालकर देना होता है, जिसका उपभोक्ता भुगतान करते हैं। लेकिन, रामपुर में तो उपभोक्ताओं को बिल ही नहीं मिल पा रहे हैं। आलम यह है कि पिछले माह महज 60 से 80 फीसदी उपभोक्ताओं के ही बिल बन सके थे। बीस फीसदी उपभोक्ताओं के बिल ही नहीं बन सके। यह वह आंकड़ा है जो कंपनी ने विभाग के अफसरों को उपलब्ध कराया है। हकीकत में तो महज पचास फीसदी ही बिलिंग हो सकी है। यही वजह है जो हर रोज उपभोक्ताओं की लाइन बिल बनवाने के लिए लगी रहती है। दरअसल, कंपनी के कर्मचारी उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। बिना जाए ही उपभोक्ताओं के बिल बना दिए जाते हैं, जिस कारण बिल उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाता है। उल्टा कंपनी के लोग अधिकारियों को गुमराह करते हुए उपभोक्ता के न मिलने की बात कहकर मामला टाल देते हैं। इससे विभाग को न सिर्फ राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी एक साथ भारी भरकम बिल आने का डर सता रहा है, लेकिन बिलिंग कंपनी पूरी तरह से लापरवाह बनी हुई है।
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