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करोड़ों खर्च फिर भी शुरू नहीं हो सका कस्तूरबा पक्षी बिहार
Updated Thu, 03 Aug 2017 12:23 AM IST
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करोड़ों खर्च फिर भी शुरू नहीं हो सका कस्तूरबा पक्षी बिहार
रामपुर। शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कस्तूरबा पक्षी बिहार अब तक चालू नहीं हो सका है। धनाभाव के चलते झील में कुछ काम शेष है, लेकिन अफसर इसे पूरा कराने के लिए गंभीर नहीं हैं। ऐसे करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सपा सरकार में पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां ने शहर को पर्यटन की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए भी काफी काम किया। इसके लिए करीब चार साल पहले शहर में कस्तूरबा पक्षी बिहार को मंजूरी मिली थी, जहां खूबसूरत पार्क के साथ ही झील का निर्माण भी कराया गया है। करीब 21 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का जिम्मा कंस्ट्रक्षन एंड डिजाइन सर्विसेज की यूनिट 54 को दिया गया था। तभी प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हो गया। अब तक इस प्रोजेक्ट पर करीब 19 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। पिछले साल तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस प्रोजेक्ट का लोकार्पण भी कर दिया, लेकिन प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो सका है। अब भी दो करोड़ रुपये के कामकाज शेष हैं, जिसमें म्यूजिकल फाउंटेन के साथ साज सज्जा का काम होना है। इसका रिवाइज्ड इस्टीमेट भी शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। अफसरों की सुस्त पैरवी के चलते सरकार के करोड़ों रुपये लगने के बाद भी जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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रामपुर। शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कस्तूरबा पक्षी बिहार अब तक चालू नहीं हो सका है। धनाभाव के चलते झील में कुछ काम शेष है, लेकिन अफसर इसे पूरा कराने के लिए गंभीर नहीं हैं। ऐसे करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सपा सरकार में पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां ने शहर को पर्यटन की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए भी काफी काम किया। इसके लिए करीब चार साल पहले शहर में कस्तूरबा पक्षी बिहार को मंजूरी मिली थी, जहां खूबसूरत पार्क के साथ ही झील का निर्माण भी कराया गया है। करीब 21 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का जिम्मा कंस्ट्रक्षन एंड डिजाइन सर्विसेज की यूनिट 54 को दिया गया था। तभी प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हो गया। अब तक इस प्रोजेक्ट पर करीब 19 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। पिछले साल तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस प्रोजेक्ट का लोकार्पण भी कर दिया, लेकिन प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो सका है। अब भी दो करोड़ रुपये के कामकाज शेष हैं, जिसमें म्यूजिकल फाउंटेन के साथ साज सज्जा का काम होना है। इसका रिवाइज्ड इस्टीमेट भी शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। अफसरों की सुस्त पैरवी के चलते सरकार के करोड़ों रुपये लगने के बाद भी जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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