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फ्लैग- योगी जी! रामपुर में यह हाल है मिड-डे मिल का
Updated Tue, 11 Jul 2017 01:12 AM IST
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मिड डे मील की रोटियां बच्चों के हाथ में परोस रहे
रामपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर रामपुर में बेसिक शिक्षा विभाग के बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे दोपहर के भोजन में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बच्चों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। एनजीओ भोजन पहुंचाने के लिए इंसुलेटेड वैन की जगह ई-रिक्शा का इस्तेमाल कर रहे हैं। रोटी बनाने की मशीन का भी उपयोग नहीं हो रहा है। यही नहीं भोजन की गुणवत्ता भी बेहद निम्न स्तर की है।
प्रदेश सरकार की ओर से प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को गुणवत्तायुक्त पौष्टिक आहार मुहैया कराने के लिए गैर सरकारी संस्थाओं का सहारा लिया जा रहा है। इन संस्थाओं के चयन और भोजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कुछ मानक तय किए हैं। इसमें स्पष्ट है कि बच्चों को मुहैया कराया जाने वाला भोजन इंसुलेटेड वैन से स्कूल तक पहुंचाया जाए। इस दौरान भोजन पूरी तरह से ढका होना चाहिए। भोजन बनाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले मसाले ब्रांडेड कंपनी के होने चाहिए, लेकिन रामपुर में शासन के इन नियमों को जमकर मखौल उड़ाया जा रहा है। एनजीओ बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक कि स्कूलों में भोजन पहुंचाने के लिए इंसुलेटेड वैन के स्थान पर ई-रिक्शा का प्रयोग किया जा रहा है। मशीन से बनी रोटी के स्थान पर हाथ से बना रोटी परोसी जा रही है। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय कूंचा देवीदास में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यही नहीं भोजन स्कूल परिसर में बच्चों को परोसने के बजाय स्कूल के बाहर सड़क पर ही हाथ में रोटी थमा दी गईं। कोई रोटी जली हुई थी, तो कोई अधपकी। ऐसे में बच्चों की सेहत पर दुष्प्रभाव भी पड़ सकता है। ऐसा नहीं है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है। सबकुछ पता होने के बाद भी अफसर बच्चों की सेहत के प्रति संजीदा नहीं हैं।
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रामपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर रामपुर में बेसिक शिक्षा विभाग के बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे दोपहर के भोजन में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बच्चों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। एनजीओ भोजन पहुंचाने के लिए इंसुलेटेड वैन की जगह ई-रिक्शा का इस्तेमाल कर रहे हैं। रोटी बनाने की मशीन का भी उपयोग नहीं हो रहा है। यही नहीं भोजन की गुणवत्ता भी बेहद निम्न स्तर की है।
प्रदेश सरकार की ओर से प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को गुणवत्तायुक्त पौष्टिक आहार मुहैया कराने के लिए गैर सरकारी संस्थाओं का सहारा लिया जा रहा है। इन संस्थाओं के चयन और भोजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कुछ मानक तय किए हैं। इसमें स्पष्ट है कि बच्चों को मुहैया कराया जाने वाला भोजन इंसुलेटेड वैन से स्कूल तक पहुंचाया जाए। इस दौरान भोजन पूरी तरह से ढका होना चाहिए। भोजन बनाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले मसाले ब्रांडेड कंपनी के होने चाहिए, लेकिन रामपुर में शासन के इन नियमों को जमकर मखौल उड़ाया जा रहा है। एनजीओ बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक कि स्कूलों में भोजन पहुंचाने के लिए इंसुलेटेड वैन के स्थान पर ई-रिक्शा का प्रयोग किया जा रहा है। मशीन से बनी रोटी के स्थान पर हाथ से बना रोटी परोसी जा रही है। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय कूंचा देवीदास में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यही नहीं भोजन स्कूल परिसर में बच्चों को परोसने के बजाय स्कूल के बाहर सड़क पर ही हाथ में रोटी थमा दी गईं। कोई रोटी जली हुई थी, तो कोई अधपकी। ऐसे में बच्चों की सेहत पर दुष्प्रभाव भी पड़ सकता है। ऐसा नहीं है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है। सबकुछ पता होने के बाद भी अफसर बच्चों की सेहत के प्रति संजीदा नहीं हैं।
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