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Rampur News: हाईवे के लिए अधिग्रहीत जमीन का 21.29 करोड़ मुआवजा अटका
Sat, 25 Jan 2025 01:22 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sat, 25 Jan 2025 01:22 AM IST
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निर्मल पांडेय
रामपुर। हाईवे चौड़ीकरण में सहयोग करने वाले किसान कृषि जमीन देने के बाद अब मुआवजा के लिए भटक रहे हैं। इनका 21.29 करोड़ रुपये मुआवजा के बाकी हैं। इनमें 11.83 करोड़ रुपये मुआवजा तो बिलासपुर तहसील क्षेत्र के किसानों का शामिल है। जिसके लिए वह परेशान हैं। इनकी खेती-किसानी हाईवे के चौड़ीकरण में चली जाने और मुआवजा भी न मिल पाने से उनका परेशान होना स्वाभाविक भी है। यह पूरा मामला दो तहसील क्षेत्रों का बताया जा रहा है। इसमें सदर और बिलासपुर तहसीलों के गांव हैं, जहां के किसानों की खेती-किसानी हाईवे चौड़ीकरण में प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने हाईवे चौड़ीकरण की दृष्टि से अपनी कृषि भूमि देकर देश के विकास में योगदान दिया लेकिन, मुआवजा उन्हें न मिल पाने का मलाल है। वहीं, दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा उन्हीं किसानों को मिलने में देरी हो रही है, जिनकी जमीन में स्वामित्व को लेकर विवाद है। इसके अलावा बिलासपुर क्षेत्र के गांवों के अधिकांश किसानों ने मुआवजा के लिए अपना दावा ही नहीं प्रस्तुत किया है।
दरअसल, सदर तहसील क्षेत्र में वर्ष 2022 में एनएच-24 को एनएच-87 से जोड़ते हुए किमी 5.8 से किमी 16.9 तक के लिए भूमि अधिग्रहीत हुई थी। इसमें किसानों को मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन को कुल 150 करोड़ रुपये प्रतिकर के मिले थे। जिसमें से प्रशासन अब तक 540 किसानों को 139.98 करोड़ का मुआवजा बांट पाया है। शेष अन्य किसानों को अभी 7.49 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना बाकी है। हालांकि उच्च स्तर से इस मामले में तहसीलदार सदर को निर्देश भी हो चुके हैं कि वह संबंधित किसानों को तत्काल मुआवजा बांटे। इसके लिए एनएचएआइ की टीम एवं क्षेत्रीय लेखपाल को संबंधित किसानों से तुरंत संपर्क करने और मुआवजा बांटने की कार्रवाई जल्द पूरी करने के भी निर्देश हो चुके हैं।
रुद्रपुर बाईपास :
वर्ष 2023 में बिलासपुर तहसील क्षेत्र में किमी 0 से 21.476 किमी तक निर्माण में कुल 45.197 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई। यह जमीन मनिहार खेड़ा, सुआनगला, चंदायन, चांदपुर, खानपुर, बारादरी, दिबदिबा और इंदरपुर गांव के किसानों की है। इनमें चंदायन गांव को छोड़कर अन्य सात गांवों के किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। मुआवजा से वंचित किसानों की संख्या 50 से अधिक ही बताई जा रही है। इन किसानों का जिला प्रशासन पर 11.83 करोड़ रुपये का मुआवजा बाकी है।
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रामपुर बाईपास : इसके मौजूदा दो लेन को फोर लेन किए जाने के संबंध में वर्ष 2021 में भूमि अधिग्रहित की गई थी। इस अधिग्रहण को लेकर परियोजना निदेशक एनएचएआइ ने 15 जुलाई 2022 को 14.23 करोड़ रुपये की लिमिट तय थी। जिसमें से जिला प्रशासन को 13.88 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। इसमें से 54 किसानों को कुल 11.89 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा है। शेष 1.97 करोड़ रुपये अन्य संबंधित किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
एनएच-24 चौड़ीकरण :
इस कार्य के लिए मंसूरपुर गांव के किसानों की कुल 1.8011 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई थी। जिससे हाईवे को 10 किमी तक चौड़ा किया गया था। बताया जा रहा है कि मंसूरपुर के सभी संबंधित किसानों को कुल 5.85 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है।
रुद्रपुर बाईपास : जमीन अधिग्रहण का बाकी मुआवजा
गांव-- -- -- - बाकी मुआवजा
दिबदिबा - 4,67,88,023
इंदरपुर - 3,33,58,761
खानपुर - 2,10,82,157
बारादरी - 74,87,937
चांदपुर - 59,94,743
सुआनगला - 23,62,924
मनिहारखेड़ा - 12,95,581
योग --- -- -- -- - 11,83,70,126
नोट : उक्त धनराशि रुपये में है।
वर्जन-
हमारे यहां 85 प्रतिशत मुआवजा भुगतान हो चुका है। अब वही किसान मुआवजा से वंचित हैं, जिनकी जमीन के स्वामित्व को लेकर असमंजस है। वैसे डूंगरपुर गांव के किसानों में जमीन के स्वामित्व को लेकर दिक्कत आ रही है। ये समस्याएं तभी समाप्त होंगी, जब जमीन का स्वामित्व स्पष्ट हो पाएगा। डूंगरपुर के एक किसान की जमीन का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।
- कृष्ण कुमार चौरसिया, तहसीलदार सदर
जिन किसानों का मुआवजा बाकी है, उसमें अधिकांश लोग विदेश में रहते हैं। वह लोग क्लेम ही नहीं करने आए हैं। इनके दस्तावेजों के सत्यापन में दिक्कत आ रही है। इन सभी किसानों को कलक्ट्रेट के भूमि अध्यापित अनुभाग से पत्राचार भी हुआ है। मुआवजा भुगतान में समस्या ये भी है कि संबंधित गाटों की जमीन का काश्तकार कोई और है, दावा कोई और कर रहा है। अब चूंकि वित्तीय मामला है गलत न होने पाए, इसका भी ख्याल रखना है। वैसे अधिग्रहण में प्रभावित किसानों में हमने 90 प्रतिशत लोगों को मुआवजा बांट दिया है।
- निश्चय सिंह, तहसीलदार-बिलासपुर
रामपुर। हाईवे चौड़ीकरण में सहयोग करने वाले किसान कृषि जमीन देने के बाद अब मुआवजा के लिए भटक रहे हैं। इनका 21.29 करोड़ रुपये मुआवजा के बाकी हैं। इनमें 11.83 करोड़ रुपये मुआवजा तो बिलासपुर तहसील क्षेत्र के किसानों का शामिल है। जिसके लिए वह परेशान हैं। इनकी खेती-किसानी हाईवे के चौड़ीकरण में चली जाने और मुआवजा भी न मिल पाने से उनका परेशान होना स्वाभाविक भी है। यह पूरा मामला दो तहसील क्षेत्रों का बताया जा रहा है। इसमें सदर और बिलासपुर तहसीलों के गांव हैं, जहां के किसानों की खेती-किसानी हाईवे चौड़ीकरण में प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने हाईवे चौड़ीकरण की दृष्टि से अपनी कृषि भूमि देकर देश के विकास में योगदान दिया लेकिन, मुआवजा उन्हें न मिल पाने का मलाल है। वहीं, दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा उन्हीं किसानों को मिलने में देरी हो रही है, जिनकी जमीन में स्वामित्व को लेकर विवाद है। इसके अलावा बिलासपुर क्षेत्र के गांवों के अधिकांश किसानों ने मुआवजा के लिए अपना दावा ही नहीं प्रस्तुत किया है।
दरअसल, सदर तहसील क्षेत्र में वर्ष 2022 में एनएच-24 को एनएच-87 से जोड़ते हुए किमी 5.8 से किमी 16.9 तक के लिए भूमि अधिग्रहीत हुई थी। इसमें किसानों को मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन को कुल 150 करोड़ रुपये प्रतिकर के मिले थे। जिसमें से प्रशासन अब तक 540 किसानों को 139.98 करोड़ का मुआवजा बांट पाया है। शेष अन्य किसानों को अभी 7.49 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना बाकी है। हालांकि उच्च स्तर से इस मामले में तहसीलदार सदर को निर्देश भी हो चुके हैं कि वह संबंधित किसानों को तत्काल मुआवजा बांटे। इसके लिए एनएचएआइ की टीम एवं क्षेत्रीय लेखपाल को संबंधित किसानों से तुरंत संपर्क करने और मुआवजा बांटने की कार्रवाई जल्द पूरी करने के भी निर्देश हो चुके हैं।
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रुद्रपुर बाईपास :
वर्ष 2023 में बिलासपुर तहसील क्षेत्र में किमी 0 से 21.476 किमी तक निर्माण में कुल 45.197 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई। यह जमीन मनिहार खेड़ा, सुआनगला, चंदायन, चांदपुर, खानपुर, बारादरी, दिबदिबा और इंदरपुर गांव के किसानों की है। इनमें चंदायन गांव को छोड़कर अन्य सात गांवों के किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। मुआवजा से वंचित किसानों की संख्या 50 से अधिक ही बताई जा रही है। इन किसानों का जिला प्रशासन पर 11.83 करोड़ रुपये का मुआवजा बाकी है।
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रामपुर बाईपास : इसके मौजूदा दो लेन को फोर लेन किए जाने के संबंध में वर्ष 2021 में भूमि अधिग्रहित की गई थी। इस अधिग्रहण को लेकर परियोजना निदेशक एनएचएआइ ने 15 जुलाई 2022 को 14.23 करोड़ रुपये की लिमिट तय थी। जिसमें से जिला प्रशासन को 13.88 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। इसमें से 54 किसानों को कुल 11.89 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा है। शेष 1.97 करोड़ रुपये अन्य संबंधित किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
एनएच-24 चौड़ीकरण :
इस कार्य के लिए मंसूरपुर गांव के किसानों की कुल 1.8011 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई थी। जिससे हाईवे को 10 किमी तक चौड़ा किया गया था। बताया जा रहा है कि मंसूरपुर के सभी संबंधित किसानों को कुल 5.85 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है।
रुद्रपुर बाईपास : जमीन अधिग्रहण का बाकी मुआवजा
गांव
दिबदिबा - 4,67,88,023
इंदरपुर - 3,33,58,761
खानपुर - 2,10,82,157
बारादरी - 74,87,937
चांदपुर - 59,94,743
सुआनगला - 23,62,924
मनिहारखेड़ा - 12,95,581
योग -
नोट : उक्त धनराशि रुपये में है।
वर्जन-
हमारे यहां 85 प्रतिशत मुआवजा भुगतान हो चुका है। अब वही किसान मुआवजा से वंचित हैं, जिनकी जमीन के स्वामित्व को लेकर असमंजस है। वैसे डूंगरपुर गांव के किसानों में जमीन के स्वामित्व को लेकर दिक्कत आ रही है। ये समस्याएं तभी समाप्त होंगी, जब जमीन का स्वामित्व स्पष्ट हो पाएगा। डूंगरपुर के एक किसान की जमीन का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।
- कृष्ण कुमार चौरसिया, तहसीलदार सदर
जिन किसानों का मुआवजा बाकी है, उसमें अधिकांश लोग विदेश में रहते हैं। वह लोग क्लेम ही नहीं करने आए हैं। इनके दस्तावेजों के सत्यापन में दिक्कत आ रही है। इन सभी किसानों को कलक्ट्रेट के भूमि अध्यापित अनुभाग से पत्राचार भी हुआ है। मुआवजा भुगतान में समस्या ये भी है कि संबंधित गाटों की जमीन का काश्तकार कोई और है, दावा कोई और कर रहा है। अब चूंकि वित्तीय मामला है गलत न होने पाए, इसका भी ख्याल रखना है। वैसे अधिग्रहण में प्रभावित किसानों में हमने 90 प्रतिशत लोगों को मुआवजा बांट दिया है।
- निश्चय सिंह, तहसीलदार-बिलासपुर