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ेसिक शिक्षा विभाग ने हवा में उड़ाए सीएम के आदेश
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रामपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद भी जिले के परिषदीय स्कूल नहीं खुल सके। अधिकांश स्कूलों में ताला लटका रहा। महज दस फीसदी ही स्कूल खुल सके। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सीएम के आदेशों को भी हवा में उड़ा दिया। ऐसे में सरकार की मंशा के अनुरूप शिक्षण कार्य शुरू होने से पहले तमाम व्यवस्थाएं कैसे पूरी होंगी।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षाधिकारी की बैठक ली थी, जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इस बार परिषदीय स्कूल एक जुलाई के स्थान 25 जून से ही खोले जाएंगे। इस दौरान शिक्षक औंर शिक्षिकाएं स्कूल जाएंगे और अपने विद्यालय की सफाई, दीवारों पर पेंट, मरम्मत, पेयजल, शौचालय आदि तमाम इंतजाम दुरुस्त करेंगे। बीएसए और खंड शिक्षाधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए कहा था। सीएम ने कड़ाई से आदेश का पालन करने के निर्देश और लापरवाही बरतने पर कार्रवाई तक के लिए चेताया था, लेकिन इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं हो सका। मंगलवार को जब स्कूल खुलने का दिन आया तो जिले के अधिकांश स्कूलों में ताले लटके रहे। सिर्फ दस फीसदी स्कूल ही खुल सके, जहां शिक्षक और शिक्षिकाओं ने स्कूल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम शुरूकराया। उधर, इस संबंध में बीएसए से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षाधिकारी की बैठक ली थी, जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इस बार परिषदीय स्कूल एक जुलाई के स्थान 25 जून से ही खोले जाएंगे। इस दौरान शिक्षक औंर शिक्षिकाएं स्कूल जाएंगे और अपने विद्यालय की सफाई, दीवारों पर पेंट, मरम्मत, पेयजल, शौचालय आदि तमाम इंतजाम दुरुस्त करेंगे। बीएसए और खंड शिक्षाधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए कहा था। सीएम ने कड़ाई से आदेश का पालन करने के निर्देश और लापरवाही बरतने पर कार्रवाई तक के लिए चेताया था, लेकिन इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं हो सका। मंगलवार को जब स्कूल खुलने का दिन आया तो जिले के अधिकांश स्कूलों में ताले लटके रहे। सिर्फ दस फीसदी स्कूल ही खुल सके, जहां शिक्षक और शिक्षिकाओं ने स्कूल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम शुरूकराया। उधर, इस संबंध में बीएसए से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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