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एसआईटी के रडार पर कई पूर्व अधिकारी, हो सकती है पूछताछ
Updated Sat, 08 Dec 2018 12:48 AM IST
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रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी एवं जौहर शोध संस्थान की जांच के बाद एसआईटी की नजर जिले के कई पूर्व अधिकारियों पर टिक गई है। इन अधिकारियों से कभी पूछताछ हो सकती है। इससे लोक निर्माण विभाग, जल निगम, अल्पसंख्यक कल्याण एवं बिजली विभाग सहित तमाम विभागों के अफसरों में हड़कंप मच गया है।
सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ शिकायतों का दौर शुरु हो गया। जमीनों पर अवैध कब्जा एवं नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य के आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद सरकार ने आजम खां के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। एसआईटी गठित कर दी। तीन दिन की जांच के लिए एसआईटी रामपुर में जांच कर रही है, जिसमें तमाम खामियां मिली हैं। अब इस पूरे मामले को लेकर एसआईटी की नजर उन अधिकारियों पर जिसके कार्यकाल में संबंधित विभागों की ओर से काम कराए गए हैं। सूत्रों की मानें तो एसआईटी बिजली विभाग के तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है, जिसमें पूछा जाएगा कि आपके रहते हुए बिजलीघर को यूनिवर्सिटी में कैैसे शामिल कर लिया? अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अफसरों से पूछा जाएगा कि किस आधार पर जौहर शोध संस्थान को इतनी कम धनराशि में लीज पर क्यों दिया गया? इसके अलावा लोक निर्माण विभाग से सड़क, गेस्ट हाउस के बारे में सवाल पूछे जा सकते हैं। प्रशासनिक अफसरों की मानें तो एसआईटी की नजर जल निगम के भी तत्कालीन अफसरों पर है जिनके समय में निर्माण कार्य हुए थे और उन्होंने किसे और कैसे हस्तांतरित किया था?
यह खबर बाहर आने के बाद अफसरों में हड़कंप है। कंपकंपाते हुए अधिकारियों ने एसआईटी की जांच में सहयोग किया। साथ ही अपने अपने विभाग से जुड़ी हुई तमाम जानकारियां एसआईटी को दीं। साथ ही उन अधिकारियों के नाम भी बताए जिनके समय में यह काम हुए हैं।
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सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ शिकायतों का दौर शुरु हो गया। जमीनों पर अवैध कब्जा एवं नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य के आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद सरकार ने आजम खां के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। एसआईटी गठित कर दी। तीन दिन की जांच के लिए एसआईटी रामपुर में जांच कर रही है, जिसमें तमाम खामियां मिली हैं। अब इस पूरे मामले को लेकर एसआईटी की नजर उन अधिकारियों पर जिसके कार्यकाल में संबंधित विभागों की ओर से काम कराए गए हैं। सूत्रों की मानें तो एसआईटी बिजली विभाग के तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है, जिसमें पूछा जाएगा कि आपके रहते हुए बिजलीघर को यूनिवर्सिटी में कैैसे शामिल कर लिया? अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अफसरों से पूछा जाएगा कि किस आधार पर जौहर शोध संस्थान को इतनी कम धनराशि में लीज पर क्यों दिया गया? इसके अलावा लोक निर्माण विभाग से सड़क, गेस्ट हाउस के बारे में सवाल पूछे जा सकते हैं। प्रशासनिक अफसरों की मानें तो एसआईटी की नजर जल निगम के भी तत्कालीन अफसरों पर है जिनके समय में निर्माण कार्य हुए थे और उन्होंने किसे और कैसे हस्तांतरित किया था?
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यह खबर बाहर आने के बाद अफसरों में हड़कंप है। कंपकंपाते हुए अधिकारियों ने एसआईटी की जांच में सहयोग किया। साथ ही अपने अपने विभाग से जुड़ी हुई तमाम जानकारियां एसआईटी को दीं। साथ ही उन अधिकारियों के नाम भी बताए जिनके समय में यह काम हुए हैं।
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