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फ्लैग--कैसे टूटेगी दस हजार आबादी को %कैद% करने वाली आजम खां की दीवार
Updated Tue, 17 Oct 2017 01:18 AM IST
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लोक निर्माण विभाग मेहरबान, पुलिस कहती है तोड़ो
रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां द्वारा बनवाई गई दीवार पर एक ओर जहां लोक निर्माण मेहरबानी दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस भी यह मानती है कि यह दीवार ग्रामीणों के लिए दिक्कत बनी हुई है। इस दीवार से ग्रामीण घरों में ही कैद हो गए हैं। यदि यहां मकानों के आगे दीवार तोड़ी जाए तो दिक्कत कम हो सकती हैं। यानि योगी सरकार का एक विभाग मेहरबानी दिखा रहा है तो दूसरा विभाग ग्रामीणों की परेशानी को समझ रहा है। इसको लेकर अब पुलिस और लोक निर्माण विभाग आमने सामने है। लेकिन प्रशासन कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
तत्कालीन मंत्री मोहम्मद आजम खां के आदेश पर पीडब्ल्यूडी ने ग्राम बेनजीर, शौकतनगर, सींगनखेड़ा, आलियागंज, अहरोला की ओर सड़क किनारे दीवार बनवाई थी। तब लोगों ने इस साढ़े तीन किलोमीटर की दीवार का विरोध भी किया था, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। इससे क्षेत्रीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। लोगों को अपने खेतों तक जाने के लिए भी काफी दूर घूमकर आना पड़ता है। सड़क किनारे बने मकानों का रास्ता भी गांव के अंदर से बनाया गया, जिससे न सिर्फ ग्रामीणों की जमीनों की कीमतें घट गईं, बल्कि आवागमन में भी मुश्किलें खड़ी हो गईं। तमाम मकान तो ऐसे हैं, जिनका घर सड़क पर होने के बाद भी साइकिल कंधे पर उठाकर घर के अंदर लेकर जाते हैं। अब सूबे में सरकार बदली तो मुस्तफा हुसैन और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष आकाश सक्सेना ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की, जिस पर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के आदेश दे दिए। किंतु, लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने दीवार को लेकर शासन को जो रिपोर्ट भेजी है, उससे साफ है कि अधिकारी आजम की दीवार को लेकर खासा मेहरबान हैं। अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सड़क किनारे बनी दीवार की वजह से लोगों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। स्कूल, गांव के मुख्यमार्ग समेत तमाम स्थानों पर लोगों के आवागमन के लिए कट लगे हैं, जहां से ग्रामीण आसानी आते जाते रहते हैं।
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पुलिस ने दी रिपोर्ट- ग्रामीण कैद, टूटनी चाहिए दीवार
रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के लिए सड़क को चौड़ी करने के लिए तैयार की गई दीवार के पीछे भी जिदंगी बसर कर रहे लोग काफी दिक्कत में हैं। लोग घरों में कैद हैं और उन्हें दीवार फांदकर सड़क पर आना पड़ रहा है। यानि कुल मिलाकर इससे दिक्कत है। कुछ इसी तरह की रिपोर्ट पुलिस ने भेजी है। पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक इस दीवार से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। तमाम ग्रामीण अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। चकरोडों के रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं। हालांकि पुलिस ने इसको लेकर दीवार के बीच जगह-जगह कट लगाने का भी सुझाव दिया है। मगर, दीवोर से होने वाली दिक्कतों से भी रूबरू कराया है।
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गलत कार्यों पर पर्दा डाल रहे अफसर
रामपुर। शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने लोक निर्माण विभाग के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी के अफसर अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए गलत रिपोर्ट दे रहे हैं। यदि दीवार से फायदा है तो फिर यूनिवर्सिटी की ओर दीवार क्यों नहीं बनवाई गई? दीवार के बनने से ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। खेतों पर जाने, सिंचाई करने, फसल की कटाई, बुआई आदि तमाम कार्य मुश्किल हो गए हैं।
आग लगी तो नहीं पहुंच सकेगी फायर ब्रिगेड
रामपुर। दीवार में कैद गांवों में यदि ऊपर वाला न करे आग लग जाए तो वहां फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंचेगी। दीवार के कारण तमाम दिक्कतें हैं। गांव वाले कहते हैं कि आग लगी तो बुझाने के लएि अग्निशमन की गाड़ी नहीं पहुंच सकेगी।
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रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां द्वारा बनवाई गई दीवार पर एक ओर जहां लोक निर्माण मेहरबानी दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस भी यह मानती है कि यह दीवार ग्रामीणों के लिए दिक्कत बनी हुई है। इस दीवार से ग्रामीण घरों में ही कैद हो गए हैं। यदि यहां मकानों के आगे दीवार तोड़ी जाए तो दिक्कत कम हो सकती हैं। यानि योगी सरकार का एक विभाग मेहरबानी दिखा रहा है तो दूसरा विभाग ग्रामीणों की परेशानी को समझ रहा है। इसको लेकर अब पुलिस और लोक निर्माण विभाग आमने सामने है। लेकिन प्रशासन कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
तत्कालीन मंत्री मोहम्मद आजम खां के आदेश पर पीडब्ल्यूडी ने ग्राम बेनजीर, शौकतनगर, सींगनखेड़ा, आलियागंज, अहरोला की ओर सड़क किनारे दीवार बनवाई थी। तब लोगों ने इस साढ़े तीन किलोमीटर की दीवार का विरोध भी किया था, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। इससे क्षेत्रीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। लोगों को अपने खेतों तक जाने के लिए भी काफी दूर घूमकर आना पड़ता है। सड़क किनारे बने मकानों का रास्ता भी गांव के अंदर से बनाया गया, जिससे न सिर्फ ग्रामीणों की जमीनों की कीमतें घट गईं, बल्कि आवागमन में भी मुश्किलें खड़ी हो गईं। तमाम मकान तो ऐसे हैं, जिनका घर सड़क पर होने के बाद भी साइकिल कंधे पर उठाकर घर के अंदर लेकर जाते हैं। अब सूबे में सरकार बदली तो मुस्तफा हुसैन और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष आकाश सक्सेना ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की, जिस पर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के आदेश दे दिए। किंतु, लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने दीवार को लेकर शासन को जो रिपोर्ट भेजी है, उससे साफ है कि अधिकारी आजम की दीवार को लेकर खासा मेहरबान हैं। अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सड़क किनारे बनी दीवार की वजह से लोगों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। स्कूल, गांव के मुख्यमार्ग समेत तमाम स्थानों पर लोगों के आवागमन के लिए कट लगे हैं, जहां से ग्रामीण आसानी आते जाते रहते हैं।
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पुलिस ने दी रिपोर्ट- ग्रामीण कैद, टूटनी चाहिए दीवार
रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के लिए सड़क को चौड़ी करने के लिए तैयार की गई दीवार के पीछे भी जिदंगी बसर कर रहे लोग काफी दिक्कत में हैं। लोग घरों में कैद हैं और उन्हें दीवार फांदकर सड़क पर आना पड़ रहा है। यानि कुल मिलाकर इससे दिक्कत है। कुछ इसी तरह की रिपोर्ट पुलिस ने भेजी है। पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक इस दीवार से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। तमाम ग्रामीण अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। चकरोडों के रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं। हालांकि पुलिस ने इसको लेकर दीवार के बीच जगह-जगह कट लगाने का भी सुझाव दिया है। मगर, दीवोर से होने वाली दिक्कतों से भी रूबरू कराया है।
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गलत कार्यों पर पर्दा डाल रहे अफसर
रामपुर। शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने लोक निर्माण विभाग के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी के अफसर अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए गलत रिपोर्ट दे रहे हैं। यदि दीवार से फायदा है तो फिर यूनिवर्सिटी की ओर दीवार क्यों नहीं बनवाई गई? दीवार के बनने से ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। खेतों पर जाने, सिंचाई करने, फसल की कटाई, बुआई आदि तमाम कार्य मुश्किल हो गए हैं।
आग लगी तो नहीं पहुंच सकेगी फायर ब्रिगेड
रामपुर। दीवार में कैद गांवों में यदि ऊपर वाला न करे आग लग जाए तो वहां फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंचेगी। दीवार के कारण तमाम दिक्कतें हैं। गांव वाले कहते हैं कि आग लगी तो बुझाने के लएि अग्निशमन की गाड़ी नहीं पहुंच सकेगी।