{"_id":"595929c64f1c1b8e548b48db","slug":"101499015622-rampur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभिभावकों और एसएमसी की सहमति के बिना बदल दिया विषय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभिभावकों और एसएमसी की सहमति के बिना बदल दिया विषय
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीरबल नेगी
सांगला(किन्नौर)।
सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता को लेकर कई दावे करती है, लेकिन सही मायने में देखा जाए तो वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है। ऐसा ही वाकया किन्नौर जिले की रावमापा सापनी में देखने को मिला है। हुआ ऐसा कि दसवीं कक्षा से उत्तीर्ण होकर जमा एक कक्षा में पहुंचे आधा दर्जन से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं को स्कूल प्रबंधन ने अप्रैल से लेकर जून तक स्कूल के अन्य अध्यापकों के सहारे कॉमर्स की पढ़ाई करवाई। चार माह बीतने के बाद भी कॉमर्स का कोई भी अध्यापक स्कूल न पहुंचने की स्थिति में स्कूल प्रशासन ने विद्यार्थियों के अभिभावकों और एसएमसी को पूछे बगैर सभी का विषय बदलकर आर्ट्स किया जा रहा है।
सापनी स्कूल के पूर्व अध्यक्ष धर्मसेन नेगी, एसएमसी सदस्य और अभिभावक सुखदास नेगी ने कहा कि प्रधानाचार्य ने बगैर अभिभावकों की सहमति से कुछ ही अभिभावकों से हस्ताक्षर लेकर बच्चों को चार माह बाद आर्ट्स में बैठाया है। उन्होंने प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी, शिक्षा विभाग से इस मामले की जांच करने की मांग की है।
स्कूल प्रधानाचार्य संजीव ठाकुर ने कहा कि बच्चों ने अध्यापकों की स्थाई नियुक्ति न होने पर स्वयं ही यह फैसला लिया कि विषय बदला जाए। इसमें स्कूल प्रबंधन की कोई गलती नही है।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में तैनात डिप्टी डायरेक्टर एमएस डोगरा ने कहा कि अध्यापक उपलब्ध न होने की बात मुझे सापनी स्कूल के प्रधानाचार्य ने कही थी, लेकिन चार माह से कॉमर्स की पढ़ाई करवाकर बाद में बगैर सहमति के विषय बदले जाने के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नही हैं। इसकी जांच की जाएगी कि किस तरह से विषय बदले गए हैं।
विज्ञापन
सांगला(किन्नौर)।
सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता को लेकर कई दावे करती है, लेकिन सही मायने में देखा जाए तो वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है। ऐसा ही वाकया किन्नौर जिले की रावमापा सापनी में देखने को मिला है। हुआ ऐसा कि दसवीं कक्षा से उत्तीर्ण होकर जमा एक कक्षा में पहुंचे आधा दर्जन से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं को स्कूल प्रबंधन ने अप्रैल से लेकर जून तक स्कूल के अन्य अध्यापकों के सहारे कॉमर्स की पढ़ाई करवाई। चार माह बीतने के बाद भी कॉमर्स का कोई भी अध्यापक स्कूल न पहुंचने की स्थिति में स्कूल प्रशासन ने विद्यार्थियों के अभिभावकों और एसएमसी को पूछे बगैर सभी का विषय बदलकर आर्ट्स किया जा रहा है।
सापनी स्कूल के पूर्व अध्यक्ष धर्मसेन नेगी, एसएमसी सदस्य और अभिभावक सुखदास नेगी ने कहा कि प्रधानाचार्य ने बगैर अभिभावकों की सहमति से कुछ ही अभिभावकों से हस्ताक्षर लेकर बच्चों को चार माह बाद आर्ट्स में बैठाया है। उन्होंने प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी, शिक्षा विभाग से इस मामले की जांच करने की मांग की है।
विज्ञापन
स्कूल प्रधानाचार्य संजीव ठाकुर ने कहा कि बच्चों ने अध्यापकों की स्थाई नियुक्ति न होने पर स्वयं ही यह फैसला लिया कि विषय बदला जाए। इसमें स्कूल प्रबंधन की कोई गलती नही है।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में तैनात डिप्टी डायरेक्टर एमएस डोगरा ने कहा कि अध्यापक उपलब्ध न होने की बात मुझे सापनी स्कूल के प्रधानाचार्य ने कही थी, लेकिन चार माह से कॉमर्स की पढ़ाई करवाकर बाद में बगैर सहमति के विषय बदले जाने के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नही हैं। इसकी जांच की जाएगी कि किस तरह से विषय बदले गए हैं।