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जिंक सल्फेट टैबलेट का नमूना जांच में फेल
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Dec 2015 11:10 PM IST
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जांच में नमूना फेल आने के बाद दवा बनाने वाली इंदौर की कंपनी को नोटिस दिया गया है। साथ ही सीएमओ ने स्टोर में उपलब्ध 52 हजार टैबलेट भी कंपनी को वापस कर दी हैं।
सीएचसी व पीएचसी को भेजी गई यह टैबलेट भी वापस मंगवाई गई है। एफएसडीए दवा बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मुकदमे की तैयारी में जुट गया है।
सीएचसी और पीएचसी के माध्यम से रोगियों में बंटने के लिए आने वाली दवाओं के नमूने भरवाकर स्वास्थ्य विभाग उसकी गुणवत्ता की जांच कराता है।
जुलाई में करीब तीन लाख रुपये की जिंक सल्फेट टैबलेट सीएमओ कार्यालय के दवा गोदाम में आई थी। यह दवा डायरिया के रोगियों को दी जाती है।
खासकर बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए इस दवा का अधिक उपयोग किया जाता है। मुख्य औषधि सुरक्षा अधिकारी ने 21 सितंबर को जिंक सल्फेट टैबलेट का नमूना भरकर जांच के लिए भेजा था।
जांच में जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल टैबलेट का नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा है। नमूना फेल आने के बाद एफएसडीए ने दवा बनाने वाली कंपनी क्वेस्ट लेबोराटरीज इंदौर को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
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जवाब आने के बाद मुकदमा किया जाएगा। उधर स्वास्थ्य विभाग ने सीएमओ कार्यालय स्थित दवा भंडार में उपलब्ध जिंक सल्फेट की 52 हजार टैबलेट भी कंपनी को वापस कर दी हैं।
सीएमओ ने सभी सीएचसी व पीएचसी अधीक्षक को संबंधित दवा को तत्काल वापस करने के निर्देश दिए हैं। एसीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि जिस बैच की दवा जांच में फेल आई है।
उसमें से 10 से 15 हजार टैबलेट ही रोगियों में बंटी है। डिस्पर्सिबल में दवा का नमूना फेल हुआ है। इसलिए इसका रोगियों पर प्रतिकूल असर नहीं पडे़गा। दवा रोगी को लाभ कम करेगी।
चूंकि नमूना फेल आया है। इसलिए शेष बची दवा को अस्पतालों से वापस मंगवाया जा रहा। अस्पतालों को दूसरे बैच नंबर की दवा मंगवाकर दी जाएगी।
सीएमओ डॉ. राकेश कुमार यादव का कहना है कि जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल टैबलेट का नमूना फेल आने के बाद स्टोर में उपलब्ध दवा संबंधित कंपनी को वापस की जा रही है।
दवा को रोगियों में बांटने के लिए अस्पतालों को नहीं दिया जाएगा। अस्पतालों को जो दवा भेजी गई है। उसे वापस मंगवाया है।
वहीं मुख्य औषधि सुरक्षा अधिकारी सुमित वर्मा ने बताया कि जांच में जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल टैबलेट का नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा है।
नमूना फेल आने के बाद दवा बनाने वाली कंपनी क्वेस्ट लेबोराटरीज इंदौर के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
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सीएचसी व पीएचसी को भेजी गई यह टैबलेट भी वापस मंगवाई गई है। एफएसडीए दवा बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मुकदमे की तैयारी में जुट गया है।
सीएचसी और पीएचसी के माध्यम से रोगियों में बंटने के लिए आने वाली दवाओं के नमूने भरवाकर स्वास्थ्य विभाग उसकी गुणवत्ता की जांच कराता है।
जुलाई में करीब तीन लाख रुपये की जिंक सल्फेट टैबलेट सीएमओ कार्यालय के दवा गोदाम में आई थी। यह दवा डायरिया के रोगियों को दी जाती है।
खासकर बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए इस दवा का अधिक उपयोग किया जाता है। मुख्य औषधि सुरक्षा अधिकारी ने 21 सितंबर को जिंक सल्फेट टैबलेट का नमूना भरकर जांच के लिए भेजा था।
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जांच में जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल टैबलेट का नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा है। नमूना फेल आने के बाद एफएसडीए ने दवा बनाने वाली कंपनी क्वेस्ट लेबोराटरीज इंदौर को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
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जवाब आने के बाद मुकदमा किया जाएगा। उधर स्वास्थ्य विभाग ने सीएमओ कार्यालय स्थित दवा भंडार में उपलब्ध जिंक सल्फेट की 52 हजार टैबलेट भी कंपनी को वापस कर दी हैं।
सीएमओ ने सभी सीएचसी व पीएचसी अधीक्षक को संबंधित दवा को तत्काल वापस करने के निर्देश दिए हैं। एसीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि जिस बैच की दवा जांच में फेल आई है।
उसमें से 10 से 15 हजार टैबलेट ही रोगियों में बंटी है। डिस्पर्सिबल में दवा का नमूना फेल हुआ है। इसलिए इसका रोगियों पर प्रतिकूल असर नहीं पडे़गा। दवा रोगी को लाभ कम करेगी।
चूंकि नमूना फेल आया है। इसलिए शेष बची दवा को अस्पतालों से वापस मंगवाया जा रहा। अस्पतालों को दूसरे बैच नंबर की दवा मंगवाकर दी जाएगी।
सीएमओ डॉ. राकेश कुमार यादव का कहना है कि जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल टैबलेट का नमूना फेल आने के बाद स्टोर में उपलब्ध दवा संबंधित कंपनी को वापस की जा रही है।
दवा को रोगियों में बांटने के लिए अस्पतालों को नहीं दिया जाएगा। अस्पतालों को जो दवा भेजी गई है। उसे वापस मंगवाया है।
वहीं मुख्य औषधि सुरक्षा अधिकारी सुमित वर्मा ने बताया कि जांच में जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल टैबलेट का नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा है।
नमूना फेल आने के बाद दवा बनाने वाली कंपनी क्वेस्ट लेबोराटरीज इंदौर के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।