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युवाओं ने मनाया प्रपोज-डे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:39 PM IST
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वेलेंटाइन वीक में सोमवार को प्रपोज-डे मनाया गया। किसी ने इस अवसर पर प्रपोज करके नए रिश्ते की नींव रखी तो किसी ने शादी के कई साल बाद पहली बार अपना फॉर्मल प्रपोजल वाइफ के सामने रखकर इस दिन को खास बनाया।
सोमवार को कॉलेज और कोचिंग सेंटर खुले तो युवाओं की चहल-पहल बढ़ गई। साल भर से बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों ने पहले दिन जहां गुलाब का फूल देकर रोज-डे मनाया।
वहीं सोमवार को दिल की बात जुबां पर लाते हुए प्यार का इजहार किया। प्रमुख रेस्टोरेंट में युवा जोड़ों की झलक देखने को मिली। वहीं इंदिरा उद्यान में दोपहर बाद कई जोड़े पहुंचे।
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इस दौरान कुछ लोगों ने अपनी पहचान को भी छुपाए रखा। कइयों को मायूसी भी मिली। वहीं जिनके प्यार कबूल हुए वे खुशी से फूल नहीं समाए।
मुस्कान का कहना है कि समाज में कोई भी गलत परंपरा नहीं आनी चाहिए। प्यार करना है तो परिवार और मित्रों से करो। सभी का सम्मान करो।
मो. अरशद का कहना है कि वेलेंटाइन-डे एक पाश्चात्य सभ्यता का हिस्सा है। इससे समाज में गलत संदेश जाता है। ज्योति का कहना है कि ऐसी परंपराएं कभी स्वीकार नहीं होंगी, जिसका प्रभाव लोगों पर गलत पड़े।
परिवार से दोस्ती और प्यार करो। दोस्तों का आदर करो। सौरभ तिवारी का कहना है कि परिवार और समाज ऐसी संस्कृति को मान्यता नहीं देती। यह पाश्चात्य देशों में अच्छा है। हमारी संस्कृति में नहीं। लोगों को इससे बचना चाहिए।
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सोमवार को कॉलेज और कोचिंग सेंटर खुले तो युवाओं की चहल-पहल बढ़ गई। साल भर से बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों ने पहले दिन जहां गुलाब का फूल देकर रोज-डे मनाया।
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वहीं सोमवार को दिल की बात जुबां पर लाते हुए प्यार का इजहार किया। प्रमुख रेस्टोरेंट में युवा जोड़ों की झलक देखने को मिली। वहीं इंदिरा उद्यान में दोपहर बाद कई जोड़े पहुंचे।
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इस दौरान कुछ लोगों ने अपनी पहचान को भी छुपाए रखा। कइयों को मायूसी भी मिली। वहीं जिनके प्यार कबूल हुए वे खुशी से फूल नहीं समाए।
मुस्कान का कहना है कि समाज में कोई भी गलत परंपरा नहीं आनी चाहिए। प्यार करना है तो परिवार और मित्रों से करो। सभी का सम्मान करो।
मो. अरशद का कहना है कि वेलेंटाइन-डे एक पाश्चात्य सभ्यता का हिस्सा है। इससे समाज में गलत संदेश जाता है। ज्योति का कहना है कि ऐसी परंपराएं कभी स्वीकार नहीं होंगी, जिसका प्रभाव लोगों पर गलत पड़े।
परिवार से दोस्ती और प्यार करो। दोस्तों का आदर करो। सौरभ तिवारी का कहना है कि परिवार और समाज ऐसी संस्कृति को मान्यता नहीं देती। यह पाश्चात्य देशों में अच्छा है। हमारी संस्कृति में नहीं। लोगों को इससे बचना चाहिए।