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Raebareli News: दोना-पत्तल बनाकर महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
Sat, 26 Sep 2026 12:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 26 Sep 2026 12:08 AM IST
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हरचंदपुर क्षेत्र के डिवहा मजरे कंडौरा गांव में कागज से बनी कटोरी व प्लेटों की छंटनी करती समूह क
हरचंदपुर। डिवहा मजरे कंडौरा गांव की महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने के लिए बचत और समूह से मिले ऋण के सहारे कागज के दोना-पत्तल का कुटीर उद्योग शुरू किया है। इससे अब 11 महिलाओं की गृहस्थी चल रही है। बाजार और सरकारी मदद के अभाव में कारोबार को वह रफ्तार नहीं मिल पा रही है, जिसकी उम्मीद महिलाओं को है।
जय शंकर महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रामदेवी ने एक साल पहले दोना-पत्तल का कुटीर उद्योग शुरू किया। उन्होंने गांव की 11 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई, जिसमें सरोज सिंह कोषाध्यक्ष और ममता सिंह सचिव हैं। महिलाओं ने ऋण लेकर करीब दो लाख रुपये की लागत से कुटीर उद्योग लगाया है।
पिछले साल करीब एक लाख रुपये के दोना-पत्तल तैयार किए गए। इनकी बिक्री से समूह से जुड़ी महिलाओं को आमदनी हुई। प्रत्येक महिला को हर माह पांच हजार रुपये की आमदनी हो रही है। कोषाध्यक्ष सरोज सिंह ने बताया कि ब्लॉक क्षेत्र के कई स्वयं सहायता समूहों को काम के लिए मशीनें दी गई हैं, लेकिन उनके समूह को अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है।
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महिलाओं का कहना है कि मशीन और बाजार की सुविधा मिले तो उत्पादन बढ़ाकर आमदनी बढ़ाई जा सकती है। सूर्यावती, आशा सिंह, द्रौपदी देवी, सरजू देवी और भारती देवी ने बताया कि जब समूह नहीं बना था, तब खाली समय में उनके पास कोई काम नहीं होता था। परिवार की जिम्मेदारी पति के कंधों पर थी। अब समूह से जुड़कर आमदनी होने लगी है तो खुशी होती है।
उपायुक्त उद्योग परमहंस मौर्य ने बताया कि उद्योग विभाग छोटे उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम या प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत समूहों को कम ब्याज दर पर लोन दिलाता है। स्वयं सहायता समूहों को इसका लाभ मिलता है। जो महिलाएं लघु या कुटीर उद्योग चला रहीं हैं, उनके लिए यह बेहतर विकल्प हैं। विभाग कैपिटल सब्सिडी भी दिलाता है, इससे समूहों पर कर्ज का बोझ कम होता है।
कच्चा माल पड़ रहा महंगा
समूह की कोषाध्यक्ष सरोज सिंह ने बताया कि दोना-पत्तल बनाने का कच्चा माल कानपुर से महंगे दाम पर मंगाना पड़ता है। वहीं, कानपुर से व्यापारी यहां तैयार माल से भी कम कीमत पर दोना-पत्तल बेच जाते हैं। इससे उनके उत्पाद की बिक्री प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर मदद मिल जाए तो कच्चा माल खरीदने में खर्च होने वाली अतिरिक्त राशि बच सकेगी।
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जय शंकर महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रामदेवी ने एक साल पहले दोना-पत्तल का कुटीर उद्योग शुरू किया। उन्होंने गांव की 11 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई, जिसमें सरोज सिंह कोषाध्यक्ष और ममता सिंह सचिव हैं। महिलाओं ने ऋण लेकर करीब दो लाख रुपये की लागत से कुटीर उद्योग लगाया है।
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पिछले साल करीब एक लाख रुपये के दोना-पत्तल तैयार किए गए। इनकी बिक्री से समूह से जुड़ी महिलाओं को आमदनी हुई। प्रत्येक महिला को हर माह पांच हजार रुपये की आमदनी हो रही है। कोषाध्यक्ष सरोज सिंह ने बताया कि ब्लॉक क्षेत्र के कई स्वयं सहायता समूहों को काम के लिए मशीनें दी गई हैं, लेकिन उनके समूह को अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है।
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महिलाओं का कहना है कि मशीन और बाजार की सुविधा मिले तो उत्पादन बढ़ाकर आमदनी बढ़ाई जा सकती है। सूर्यावती, आशा सिंह, द्रौपदी देवी, सरजू देवी और भारती देवी ने बताया कि जब समूह नहीं बना था, तब खाली समय में उनके पास कोई काम नहीं होता था। परिवार की जिम्मेदारी पति के कंधों पर थी। अब समूह से जुड़कर आमदनी होने लगी है तो खुशी होती है।
उपायुक्त उद्योग परमहंस मौर्य ने बताया कि उद्योग विभाग छोटे उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम या प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत समूहों को कम ब्याज दर पर लोन दिलाता है। स्वयं सहायता समूहों को इसका लाभ मिलता है। जो महिलाएं लघु या कुटीर उद्योग चला रहीं हैं, उनके लिए यह बेहतर विकल्प हैं। विभाग कैपिटल सब्सिडी भी दिलाता है, इससे समूहों पर कर्ज का बोझ कम होता है।
कच्चा माल पड़ रहा महंगा
समूह की कोषाध्यक्ष सरोज सिंह ने बताया कि दोना-पत्तल बनाने का कच्चा माल कानपुर से महंगे दाम पर मंगाना पड़ता है। वहीं, कानपुर से व्यापारी यहां तैयार माल से भी कम कीमत पर दोना-पत्तल बेच जाते हैं। इससे उनके उत्पाद की बिक्री प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर मदद मिल जाए तो कच्चा माल खरीदने में खर्च होने वाली अतिरिक्त राशि बच सकेगी।