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इलाज में लापरवाही से महिला ने तोड़ा दम

Tue, 26 Jul 2016 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली Updated Tue, 26 Jul 2016 11:47 PM IST
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Woman's death by negligence in treatment
मौत - फोटो : file
वैसे तो डॉक्टर भगवान कहे जाते हैं, लेकिन कभी इन भगवानों की लापरवाही रोगियों के लिए मौत का सबब बन जाती है। सोमवार को सीएचसी खीरों में ऐसा ही हुआ। इलाज में लापरवाही बरतने से एक महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। इससे गुस्साए परिवारीजनों ने न सिर्फ जमकर हंगामा किया, बल्कि स्टाफ व डॉक्टर के साथ के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई।
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आरोप था कि तैनात डॉक्टर एक-दूसरे को महिला का इलाज करने की बात कह रहे थे। इस वजह से देरी हुई और महिला की जान चली गई। पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया। खीरों की रहने वाली हकीमुन निशा (50) पत्नी नौशाद खाँ तीन माह से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थी। उसका कानपुर में इलाज चल रहा था।
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मंगलवार सुबह उसे अचानक सांस लेने में तकलीफ  हुई। इस पर परिवारीजन उसे लेकर सीएचसी खीरों पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका के पुत्र कुतुबुद्दीन का आरोप है कि माँ हकीमुन निशा को लगभग 11 बजे सीएचसी लेकर पहुंचे थे। जहां डॉ. हुमा कौशर ने मेरी माँ का इलाज करने से मना कर दिया और कहा कि इमरजेंसी डॉ. इफ्तिखार देख रहे हैं उनको दिखाओ।
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मैंने डॉक्टर इफ्तिखार को दिखाया। उन्होंने देरी से इलाज शुरू किया। पर मां को फायदा नहीं मिला। इसके बाद क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र विक्रम सिंह को मामले से अवगत कराया। विधायक के फोन करने पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. यूसी वर्मा ने जाकर माँ को आक्सीजन लगाया, जिसके कुछ देर बाद माँ की मौत हो गई।

इलाज में लापरवाही बरतने से हकीमुन निशा की हुई मौत से परिवारीजन भड़क गए। देखते ही देखते सीएचसी परिसर में भीड़ एकत्र हो गई। प्रदर्शन कर रही भीड़ की मांग थी कि कोई सक्षम अधिकारी मौके पर आकर डॉ, हुमा कौशर के विरुद्ध कार्यवाही का आश्वासन नहीं देता, तब तक शव सीएचसी से नहीं ले जाएंगे।

हंगामा करने के साथ स्टाफ के लोगों से नोकझोंक भी की। मामले को बिगड़ता देखकर सीएचसी अधीक्षक ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर थानेदार अनिल कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिवारीजनों और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया।

थानेदार का कहना है कि मामले की तहरीर मिलेगी तो रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई होगी। फिलहाल मामला शांत करा दिया गया है। डॉ. हुमा कौशर का कहना था कि जिस समय महिला को इलाज के लिए सीएचसी लाया गया था। उस समय इमरजेंसी ड्यूटी डॉ. इफ्तिखार की थी। इसलिए मरीज को उनसे इलाज कराने की बात कही थी। अगर रोगी को मेरी जरूरत थी तो मुझे जानकारी दी जाती। इलाज किया जाता।


वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. यूसी वर्मा ने बताया कि परिवारीजनों का शिकायती पत्र मिला है, जिसे सीएमओ को भेज दिया जाएगा। मृतका काफी दिनों से बीमार थी, उसका इलाज कानपुर में चल रहा था। जिस समय परिवारीजन अस्पताल लाए थे, उस समय उसकी हालत बहुत खराब थी।

डॉ. इफ्तिखार इलाज कर रहे थे। परिवारीजनों के अनुरोध और विधायक के फोन पर मैंने जाकर ऑक्सीजन लगाया था, लेकिन मरीज की मौत हो गई। इसकी जांच कराई जाएगी।
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