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988 पंचायतों में मनरेगा के कार्यों पर नजर रखेंगी महिला मेट
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रायबरेली। गांवों में श्रमिकों को 100 दिन रोजगार देने के लिए संचालित मनरेगा पर अब आधी आबादी की नजर रहेगी। मनरेगा के सभी कार्यों पर तीखी नजर रखने के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मेट के रूप में तैनात किया जाएगा। इसके लिए शासन से दिशा-निर्देश आ गए हैं। जिले की सभी 988 ग्रामपंचायतों में समूह की महिलाओं को मेट बनाए जाने के आदेश दिए गए हैं।
मनरेगा योजना से हर गांव में जॉबकार्ड धारकों को सौ-सौ दिन रोजगार देने की व्यवस्था है। हर गांव में मनरेगा के कार्य रोजाना संचालित रखने के निर्देश हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से संचालित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण कराया जा रहा है। साथ ही समूहों को गांव में बनवाए गए सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की भी जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए हर महीने समूहों को नौ-नौ हजार रुपये भी दिए जाते हैं।
शासन ने अब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा योजना से भी जोड़ने का निर्णय लिया है। हर ग्राम पंचायत में मनरेगा के कार्यों और श्रमिकों पर नजर रखने के लिए मेट नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। यह मेट स्वयं सहायता समूह की महिलाएं होंगी। कार्यों पर नजर रखने के एवज में उन्हें मनरेगा से भुगतान भी दिया जाएगा। शासन से दिशा-निर्देश आने के बाद समूह की महिलाओं को मेट के रूप में चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही मेट के चयन के बाद मनरेगा के कार्यों में और गुणवत्ता आएगी।
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मनरेगा के कार्यों के सीआईबी बोर्ड लगाने के आदेश
जिले में मनरेगा से संचालित कार्यों और पूर्ण हो चुके कार्य स्थलों पर सीआईबी बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए हैं। सीआईबी बोर्ड पर कार्यों से संबंधित पूरी जानकारी लिखवानी होगी। परियोजना की लागत के साथ ही लंबाई और वर्ष का नाम भी अंकित करना होगा। ग्राम्य विकास आयुक्त ने काम पूरा करके जवाब देने के आदेश दिए हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा में मेट बनाए जाने के संबंध में दिश-निर्देश आ गए हैं। सभी पंचायतों में मनरेगा के कार्यों पर महिला मेट की नजर रहेगी। जल्द ही चयन प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
- पवन कुमार सिंह, उपायुक्त (मनरेगा)
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मनरेगा योजना से हर गांव में जॉबकार्ड धारकों को सौ-सौ दिन रोजगार देने की व्यवस्था है। हर गांव में मनरेगा के कार्य रोजाना संचालित रखने के निर्देश हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से संचालित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण कराया जा रहा है। साथ ही समूहों को गांव में बनवाए गए सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की भी जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए हर महीने समूहों को नौ-नौ हजार रुपये भी दिए जाते हैं।
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शासन ने अब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा योजना से भी जोड़ने का निर्णय लिया है। हर ग्राम पंचायत में मनरेगा के कार्यों और श्रमिकों पर नजर रखने के लिए मेट नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। यह मेट स्वयं सहायता समूह की महिलाएं होंगी। कार्यों पर नजर रखने के एवज में उन्हें मनरेगा से भुगतान भी दिया जाएगा। शासन से दिशा-निर्देश आने के बाद समूह की महिलाओं को मेट के रूप में चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही मेट के चयन के बाद मनरेगा के कार्यों में और गुणवत्ता आएगी।
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मनरेगा के कार्यों के सीआईबी बोर्ड लगाने के आदेश
जिले में मनरेगा से संचालित कार्यों और पूर्ण हो चुके कार्य स्थलों पर सीआईबी बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए हैं। सीआईबी बोर्ड पर कार्यों से संबंधित पूरी जानकारी लिखवानी होगी। परियोजना की लागत के साथ ही लंबाई और वर्ष का नाम भी अंकित करना होगा। ग्राम्य विकास आयुक्त ने काम पूरा करके जवाब देने के आदेश दिए हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा में मेट बनाए जाने के संबंध में दिश-निर्देश आ गए हैं। सभी पंचायतों में मनरेगा के कार्यों पर महिला मेट की नजर रहेगी। जल्द ही चयन प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
- पवन कुमार सिंह, उपायुक्त (मनरेगा)