{"_id":"6aa45d8d9f9c0830be0cef3f","slug":"water-level-in-nayya-nala-recedes-scene-of-devastation-visible-raebareli-news-c-101-1-rai1002-167217-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Raebareli News: नय्या नाले का जलस्तर कम, तबाही का दिख रहा मंजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Raebareli News: नय्या नाले का जलस्तर कम, तबाही का दिख रहा मंजर
Sat, 12 Sep 2026 01:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 12 Sep 2026 01:29 AM IST
विज्ञापन
क्षेत्र के छुलिहा मजरे मझिगवां गांव में नय्या नाला के उफान से खराब हुई धान की फसल। -संवाद
हलोर। नय्या नाले का जलस्तर कम होने से जलमग्न गांवों को भले ही राहत मिल गई हो, लेकिन ग्रामीणों और किसानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खेतों से पानी उतरते ही बर्बाद फसलों का मंजर देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। गांवों में संक्रामक बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है।
एक माह से अधिक समय तक पानी में डूबे रहने के कारण अलीपुर, भटसरा, मझिगंवा, सुखलिया, पुरासी, बसकटा, कोटवा मदनिया, लालगंज, जियापुर, कोड़री, सिकंदरपुर, लोदीपुर और पूरे नारे अतरेहटा समेत दर्जनों गांवों के खेत तालाब बने हुए थे। दो-तीन दिन से जलस्तर घटा है। सैकड़ों बीघा खेत में लगीं धान, उड़द, ज्वार व सब्जियों की फसलें पूरी तरह सड़ चुकी है।
स्थानीय किसान राजकुमार, महेंद्र, गब्बर सिंह, राम बहादुर, रंजीत, धीरेन्द्र, रामबरन और राम सागर ने बताया कि पानी तो उतर गया, लेकिन मेहनत और पूंजी दोनों पानी में बह गई। अब सिर्फ सरकारी मुआवजे का ही सहारा है। गंदगी के कारण गांवों में लोग बुखार, जुखाम और त्वचा रोग से संक्रमित होने लगे हैं। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई टीम गांव नहीं भेजी गई है।
विज्ञापन
एसडीएम आयुष अग्रवाल ने बताया शासन के निर्देशानुसार फसल नुकसान का आकलन कर आर्थिक सहायता देने के लिए सर्वे की प्रक्रिया जारी है।
विज्ञापन
एक माह से अधिक समय तक पानी में डूबे रहने के कारण अलीपुर, भटसरा, मझिगंवा, सुखलिया, पुरासी, बसकटा, कोटवा मदनिया, लालगंज, जियापुर, कोड़री, सिकंदरपुर, लोदीपुर और पूरे नारे अतरेहटा समेत दर्जनों गांवों के खेत तालाब बने हुए थे। दो-तीन दिन से जलस्तर घटा है। सैकड़ों बीघा खेत में लगीं धान, उड़द, ज्वार व सब्जियों की फसलें पूरी तरह सड़ चुकी है।
विज्ञापन
स्थानीय किसान राजकुमार, महेंद्र, गब्बर सिंह, राम बहादुर, रंजीत, धीरेन्द्र, रामबरन और राम सागर ने बताया कि पानी तो उतर गया, लेकिन मेहनत और पूंजी दोनों पानी में बह गई। अब सिर्फ सरकारी मुआवजे का ही सहारा है। गंदगी के कारण गांवों में लोग बुखार, जुखाम और त्वचा रोग से संक्रमित होने लगे हैं। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई टीम गांव नहीं भेजी गई है।
विज्ञापन
एसडीएम आयुष अग्रवाल ने बताया शासन के निर्देशानुसार फसल नुकसान का आकलन कर आर्थिक सहायता देने के लिए सर्वे की प्रक्रिया जारी है।