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शिक्षक पुत्र-पुत्री ने कर दिया कमाल
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रायबरेली/डलमऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक की बेटी और बेटे दोनों ने हाईस्कूल और इंटर में जिला टॉप किया है।
उत्तर प्रदेश की वरीयता सूची में भी जगह बनाई है। एक साथ दो-दो बड़ी उपलब्धि मिलने से परिवार में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
सलोन के कंपोजिट विद्यालय पकसरावां में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत प्रभाकर श्रीवास्तव के बेटे अथर्व श्रीवास्तव ने हाईस्कूल में 97 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तर प्रदेश में पांचवीं रैंक और बेटी आस्था श्रीवास्तव ने 92.4 प्रतिशत अंकों के साथ यूपी में नौवीं रैंक बनाई है।
इन दोनों ने जिला टॉप भी किया है। मां दीपशिखा गृहणी हैं। आस्था ने वर्ष 2020 में हाईस्कूल की परीक्षा 96 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी और छठवीं पोजीशन बनाई थी। अथर्व और आस्था का कहना है कि कोरोना काल ने पढ़ाई को बहुत प्रभावित किया। ऑफलाइन कक्षाएं कम ही चल पाईं।
ऑनलाइन पढ़ाई में कोई चूक नहीं की। जरूरत पड़ी तो गुरुजनों की मदद ली। कहा कि सफलता हासिल करने के लिए सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें, फिर उसी पर फोकस करते हुए आगे बढ़ें। अथर्व और आस्था दोनों का सपना डॉक्टर बनने का है। दोनों भाई-बहन की उपलब्धि दूसरे छात्र-छात्राओं को प्रेरित कर रही है। वे कहते हैं कि कभी निराश नहीं होना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश की वरीयता सूची में भी जगह बनाई है। एक साथ दो-दो बड़ी उपलब्धि मिलने से परिवार में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
सलोन के कंपोजिट विद्यालय पकसरावां में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत प्रभाकर श्रीवास्तव के बेटे अथर्व श्रीवास्तव ने हाईस्कूल में 97 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तर प्रदेश में पांचवीं रैंक और बेटी आस्था श्रीवास्तव ने 92.4 प्रतिशत अंकों के साथ यूपी में नौवीं रैंक बनाई है।
इन दोनों ने जिला टॉप भी किया है। मां दीपशिखा गृहणी हैं। आस्था ने वर्ष 2020 में हाईस्कूल की परीक्षा 96 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी और छठवीं पोजीशन बनाई थी। अथर्व और आस्था का कहना है कि कोरोना काल ने पढ़ाई को बहुत प्रभावित किया। ऑफलाइन कक्षाएं कम ही चल पाईं।
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ऑनलाइन पढ़ाई में कोई चूक नहीं की। जरूरत पड़ी तो गुरुजनों की मदद ली। कहा कि सफलता हासिल करने के लिए सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें, फिर उसी पर फोकस करते हुए आगे बढ़ें। अथर्व और आस्था दोनों का सपना डॉक्टर बनने का है। दोनों भाई-बहन की उपलब्धि दूसरे छात्र-छात्राओं को प्रेरित कर रही है। वे कहते हैं कि कभी निराश नहीं होना चाहिए।
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