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मुआवजा के लिए सेंटर के बाहर शव रख दिया धरना

Wed, 26 Apr 2017 12:39 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Wed, 26 Apr 2017 12:39 AM IST
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To lay the dead bodies out of the center for compensation
गेट पर एनीमल ब्रीडिंग सेंटर के अधिकारियों से बात करते एसडीएम, सीओ व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
सलोन कोतवाली क्षेत्र में एनीमिल ब्रीडिंग सेंटर बगहा में सांड़ के हमले से मरे श्रमिक के परिवारीजनों व ग्रामीणों का गुस्सा मंगलवार को उस समय फूट पड़ा, जब परिवारीजनों को मुआवजा देने की कोई घोषणा नहीं की गई। नाराज लोग पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर ब्रीडिंग सेंटर पहुंचे और वहीं पर शव रखकर धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने हंगामा शुरू किया तो केंद्र के कर्मचारियों ने गेट बंद कर पुलिस बुला ली। इससे अफरातफरी मच गई। 
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प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर महिलाएं रहीं। सभी ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इसकी जानकारी होने पर क्षेत्रीय विधायक दल बहादुर कोरी, एसडीएम प्रदीप कुमार वर्मा, सीओ चरन सिंह मौके पर पहुंचे। एनीमिल ब्रीडिंग सेंटर के जीएम को मौके पर बुलाकर ग्रामीणों से वार्ता कराई। 28 अप्रैल को मुआवजा देने के वादे पर प्रदर्शन खत्म हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि वादाखिलाफी की गई तो फिर आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
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सलोन कोतवाली क्षेत्र के उमरी गांव निवासी शिव प्रकाश (34) पुत्र गयादीन एनीमिल ब्रीडिंग सेंटर बगहा में श्रमिक के रूप में काम करता था। शनिवार सुबह केज की सफाई के दौरान शिव प्रकाश पर सांड़ ने हमला बोल दिया। इससे उसकी मौत हो गई। इसके पहले छह दिसंबर 2016 को भी इसी गांव के रामसुमेर की सांड़ के हमले से मौत हो चुकी है, लेकिन अब तक उसे मुआवजा नहीं मिला। इससे नाराज दोनों मृतकों के परिवारीजन और ग्रामीण मौके पर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर शव रखकर एनीमिल ब्रीडिंग सेंटर पहुंचे।
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गेट के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। जानकारी होने पर क्षेत्रीय विधायक दल बहादुर कोरी, एसडीएम प्रदीप वर्मा, सीओ चरनजीत सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख आजाद सिंह मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया। एसडीएम ने जीएम डॉ. निरम पटेल को मौके पर बुलाया और ग्रामीणों से वार्ता कराई। जीएम ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि 28 अप्रैल को पीड़ित परिवारीजनों को एक-एक लाख रुपया मुआवजे के चेक दिए जाएंगे।


तीन महीने बाद साढ़े तीन-तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता के अलावा मृतक की पत्नी को लगभग दो हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी। नौकरी पर कोई बात नहीं बनी। इस आश्वासन पर ग्रामीण शांत हो गए।
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