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सच जानने के लिए चार घंटे तक फॉरेसिक टीम ने हाईवे पर की हर बिंदु की पड़ताल

Tue, 30 Jul 2019 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jul 2019 12:12 AM IST
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To know the truth, the forensics team examined every point on the highway for four hours.
गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर खेड़ा मोड़ पर निशान लगाकर जांच करती लखनऊ से आई फॉरेसिक ट? - फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता की चाची-मौसी की मौत हादसा है या फिर साजिश, इसकी पड़ताल शुरू हो गई है। सोमवार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की तीन सदस्यीय टीम ने न सिर्फ घटनास्थल पहुंचकर हर बिंदु पर जांच कर फिंगर प्रिंट लिए बल्कि, घटना के दौरान वहां मौजूद चश्मदीदों के बयान भी दर्ज किए।
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करीब चार घंटे तक हाईवे पर फोरेंसिक टीम घटना के दौरान वाहनों की रफ्तार कितनी थी, किस वजह से यह घटना हुई समेत अन्य बिंदुओं पर पड़ताल करने के बाद वापस लौैट गई। जांच में क्या सामने आया, इस बारे में फोरेंसिक टीम ने कुछ भी बोलने से इन्कार किया। गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र में रायबरेली-लालगंज राजमार्ग पर सुल्तानपुरखेड़ा गांव के मोड़ पर रविवार को हुई घटना में उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी जबकि, स्वयं पीड़िता और उनका वकील गंभीर रूप से घायल हो गया था।
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दोनों का लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते रायबरेली से लेकर लखनऊ तक में हड़कंप मच गया। एसपी के अनुरोध पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के डायरेक्टर से टीम भेजकर जांच कराने की मांग की थी। इस पर रविवार रात ही टीम जांच के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई थी, लेकिन अंधेरा होने की वजह से जांच नहीं शुरू की।
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जिला मुख्यालय पर ठहरने के बाद सोमवार सुबह फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक अधिकारी सुधीर कुमार झा, नरेंद्र कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक रविकांत शर्मा ने सबसे पहले गुरुबख्शगंज थानेदार राकेश सिंह से घटना का पूरा ब्योरा लिया। चूंकि घटनास्थल के पास मोड़ था और घटना के दौरान बारिश भी हो रही थी।
टीम ने जानने की कोशिश की कि मोड़ होने के बाद भी वाहनों की रफ्तार धीमी क्यों नहीं थी। वाहनों की भिड़ंत आमने-सामने की थी कि ट्रक ने खुद जाकर कार में ठोकर मारी या फिर घटना की वजह और कुछ रही। टीम ने हर बिंदु की जांच की। टीम ने घटनास्थल पर खड़े ट्रक को खंगाला। ट्रक के फटे पहिये और टूटी कमानी की जांच की।
कार कैसे क्षतिग्रस्त हुई, इसकी भी टीम ने पड़ताल की। घटनास्थल और हाईवे पर बने मोड़ तक की दूरी भी नापी गई। रोड पर बने निशान से भी प्रिंट लिए। इस दौरान घटनास्थल के चारों तरफ निशान लगाकर टीम ने नापजोख की। चार घंटे तक पड़ताल कर टीम ने जानने की कोशिश की कि यह घटना हादसा है या फिर साजिश।
इन बिंदुओं पर फोरेसिंक टीम ने की पड़ताल
सुल्तानपुर खेड़ा गांव के मोड़ के पास वाहनों के बने स्क्रेच जांचे।
वाहनों के टूटे हुए कांच व अन्य सामान के प्रिंट लिए।
घटना के दौरान ट्रक और कार (स्विफ्ट) की रफ्तार कितनी थी।
दोनों वाहनों की जांच की और उसमें मिली सामग्री को कब्जे में लिया।
हाईवे स्थित घटनास्थल से 200 मीटर दूरी तक फीते से नापजोख की।
दुर्घटनाग्रस्त कार से हाईवे तक नौै मीटर की फीते से भी नापजोख की।
नापजोख के बाद हाईवे स्थित घटनास्थल पर लाल रंग के निशान लगाए।
लखनऊ से आई फोरेंसिक टीम का स्थानीय फोरेंसिक टीम ने जांच में सहयोग किया। रायबरेली की फोरेंसिक प्रभारी प्रतिभा त्रिपाठी, अजीत, प्रवण भी घटना के दूसरे दिन भी घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय टीम ने लखनऊ से आए वैज्ञानिक अधिकारियों को घटना के बारे में अवगत कराया। जिस समय हादसा हुआ, उस समय पूरे दौली मजरे सुल्तानपुरखेड़ा गांव के रहने वाले गया प्रसाद हाईवे स्थित अपनी किराना की दुकान पर बैठा था।

लखनऊ से आई फोरेंसिक टीम ने गया प्रसाद से भी घटना के बारे में पूछताछ की। इस पर गया प्रसाद ने बताया कि ट्रक की स्पीड बहुत तेज थी। ट्रक अपनी दिशा से दाहिने ओर जाकर सामने से आ रही कार को टक्कर मारी थी। टक्कर मारने के बाद ट्रक बीच रोड में जाकर खड़ा हो गया। हादसे में कार सवार लोगों की गलती नहीं थी। उसकी रफ्तार कुछ धीमी थी।
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