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शहीद दिवस को लेकर नहीं कोई तैयारी
रायबरेली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jan 2016 10:52 PM IST
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आओ झुककर करें सलाम उन्हें, जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है, कितने खुशनसीब हैं वो लोग जिनका खून वतन के काम आता है। कुछ ऐसे ही जज्बे से प्रेरित वीर सपूतों ने तिरंगे की शान के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। उनकी याद में सारा देश 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाता है।
इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश के लिए जान न्यौछावर कर दिया था। इसके बावजूद जिले में शहीद दिवस को लेकर कोई तैयारी नहीं चल रही है।
यहां पर सात जनवरी 1921 को मुंशीगंज गोलीकांड की याद में हर साल शहीद दिवस मनाया जाता है।
इसका दायरा भी दिनों दिन सिमटता जा रहा है। 30 जनवरी को भी हर बार की तरह महज चंद मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दे दी जाएगी। सरकारी महकमे की उपेक्षा के चलते जिले में कुछ गिने-चुने संस्थाओं की ओर से कार्यक्रम कराया जाएगा।
शहीदों की यादों को संजोने की हो पहल
प्रीती शुक्ला, अलका देवी का कहना है कि शहीदों की याद को संजोने की पहल होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन की ओर से भी कार्यक्रम कराए जाएं। प्रज्ञा सिंह, वंदना का कहना है कि शहीदों की वीरगाथा पर आधारित कार्यक्रम होने चाहिए। रोहित, आशीष का कहना है कि जिले में सात जनवरी को कार्यक्रम होते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर शहीदों को हर किसी को नमन करना चाहिए। 30 जनवरी को शहीद दिवस पर कोई कार्यक्रम न कराना दुर्भाग्यपूर्ण है। सौरभ पटेल, अंकित प्रकाश का कहना है कि शहीद दिवस तो मनाते हैं, लेकिन इस दिन बड़े स्तर पर कार्यक्रम होने की जरूरत है।
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केस एक-शहीद स्थल उपेक्षित, अफसर उदासीन
किसान आंदोलन का प्रतीक मुंशीगंज शहद स्थल बरसों से उपेक्षित पड़ा है। विकास की बीड़ा उठाने वाले रायबरेली विकास प्राधिकरण के अफसर बजट का रोना रो रहे हैं। आरडीए की ओर से भारतमाता मंदिर से लेकर सुंदर कलाकृतियां निर्मित कराने में लाखों का बजट खर्च कर दिया गया। भारत माता मंदिर का शिलान्यास 7 जनवरी 2005 को हुआ। देखरेख के अभाव में फुलवारी नष्ट हो गई। वहीं कलाकृतियां का अस्तित्व समाप्त होने को है।
केस दो-महापुरुषों की मूर्तियों तक की नहीं कराई सफाई
आजादी की लड़ाई में सबकुछ त्याग कर आंदोलन में शामिल महापुरुषों की याद को तरोताजा रखने के लिए मूर्ति स्थापित जरूर हैं, लेकिन उनकी देखरेख की किसी को सुध नहीं है। महात्मा गंाधी से लेकर सुभाषचंद्र बोस, झलकारी बाई आदि की मूर्तियां लगी हैं। शहीद दिवस होने के बावजूद अभी तक साफ-सफाई तक नहीं कराई गई। यही नहीं डिग्री कॉलेज स्थित शहीद चौक तक उपेक्षित है।
नहीं है कोई आदेश
शासन स्तर से शहीद दिवस को लेकर कोई आदेश नहीं आया है। जिले में हर साल सात जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। इसी दिन शहीदों की याद में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही शहीद परिवारों को सम्मानित किया जाता है। 30 जनवरी पर शहीद दिवस को लेकर कोई कार्यक्रम नहीं किया जाता है।
-एससी चौधरी, एडीएम प्रशासन
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इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश के लिए जान न्यौछावर कर दिया था। इसके बावजूद जिले में शहीद दिवस को लेकर कोई तैयारी नहीं चल रही है।
यहां पर सात जनवरी 1921 को मुंशीगंज गोलीकांड की याद में हर साल शहीद दिवस मनाया जाता है।
इसका दायरा भी दिनों दिन सिमटता जा रहा है। 30 जनवरी को भी हर बार की तरह महज चंद मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दे दी जाएगी। सरकारी महकमे की उपेक्षा के चलते जिले में कुछ गिने-चुने संस्थाओं की ओर से कार्यक्रम कराया जाएगा।
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शहीदों की यादों को संजोने की हो पहल
प्रीती शुक्ला, अलका देवी का कहना है कि शहीदों की याद को संजोने की पहल होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन की ओर से भी कार्यक्रम कराए जाएं। प्रज्ञा सिंह, वंदना का कहना है कि शहीदों की वीरगाथा पर आधारित कार्यक्रम होने चाहिए। रोहित, आशीष का कहना है कि जिले में सात जनवरी को कार्यक्रम होते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर शहीदों को हर किसी को नमन करना चाहिए। 30 जनवरी को शहीद दिवस पर कोई कार्यक्रम न कराना दुर्भाग्यपूर्ण है। सौरभ पटेल, अंकित प्रकाश का कहना है कि शहीद दिवस तो मनाते हैं, लेकिन इस दिन बड़े स्तर पर कार्यक्रम होने की जरूरत है।
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केस एक-शहीद स्थल उपेक्षित, अफसर उदासीन
किसान आंदोलन का प्रतीक मुंशीगंज शहद स्थल बरसों से उपेक्षित पड़ा है। विकास की बीड़ा उठाने वाले रायबरेली विकास प्राधिकरण के अफसर बजट का रोना रो रहे हैं। आरडीए की ओर से भारतमाता मंदिर से लेकर सुंदर कलाकृतियां निर्मित कराने में लाखों का बजट खर्च कर दिया गया। भारत माता मंदिर का शिलान्यास 7 जनवरी 2005 को हुआ। देखरेख के अभाव में फुलवारी नष्ट हो गई। वहीं कलाकृतियां का अस्तित्व समाप्त होने को है।
केस दो-महापुरुषों की मूर्तियों तक की नहीं कराई सफाई
आजादी की लड़ाई में सबकुछ त्याग कर आंदोलन में शामिल महापुरुषों की याद को तरोताजा रखने के लिए मूर्ति स्थापित जरूर हैं, लेकिन उनकी देखरेख की किसी को सुध नहीं है। महात्मा गंाधी से लेकर सुभाषचंद्र बोस, झलकारी बाई आदि की मूर्तियां लगी हैं। शहीद दिवस होने के बावजूद अभी तक साफ-सफाई तक नहीं कराई गई। यही नहीं डिग्री कॉलेज स्थित शहीद चौक तक उपेक्षित है।
नहीं है कोई आदेश
शासन स्तर से शहीद दिवस को लेकर कोई आदेश नहीं आया है। जिले में हर साल सात जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। इसी दिन शहीदों की याद में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही शहीद परिवारों को सम्मानित किया जाता है। 30 जनवरी पर शहीद दिवस को लेकर कोई कार्यक्रम नहीं किया जाता है।
-एससी चौधरी, एडीएम प्रशासन