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परिषदीय विद्यालयों में पहला दिन, नहीं दिखा पढ़ाई का माहौल

Tue, 02 Jul 2019 12:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2019 12:54 AM IST
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The first day in the council schools, not the study environment.
प्राथमिक विद्यालय बुढ़वार में बच्चे तो बैठे रहे, लेकिन गुरुजी की कुर्सी खाली नजर आई। टेबल पर गुरु - फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार को परिषदीय विद्यालय खुले तो ज्यादातर स्कूलों में पढ़ाई का कोई माहौल नजर नहीं आया। गिने-चुने स्कूलों में रैली निकली तो कुछ जगहों पर यूनिफार्म, जूते-मोजे, किताबें बांटी गईं। ज्यादातर स्कूलों में बच्चों की औसतन उपस्थिति महज 25 फीसदी रही।
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अध्यापक भी पढ़ाने के बजाए आपस में बातें करने में समय बिताते रहे। इसी वजह से बच्चे खेलकूद में लगे रहे। जिले के लगभग 2600 परिषदीय विद्यालयों में सवा दो लाख से अधिक बच्चे नामांकित हैं। शासन ने 25 जून से 30 जून के बीच विद्यालय खोलकर साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत, फर्नीचर, टाट-पट्टी जैसी तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे।
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इसके बाद भी कई स्कूलों में पहली जुलाई को बच्चे ही व्यवस्था दुरुस्त करते नजर आए। पाठ्य पुस्तकें भले ही ब्लॉकों तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन मांग के अनुरूप किताबें भी नहीं पहुंच पाई हैं। स्कूलों तक किताबें पहुंचाने का दावा भी खोखला साबित होता नजर आ रहा है। स्कूल संचालन का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक निर्धारित है।
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इस भीषण गर्मी में दोपहर 1 बजे छुट्टी होने के कारण बच्चों को तपती दोपहरी में घर लौटना पड़ा। डलमऊ विकास क्षेत्र के पूरे कोईली मजरे सरायं दिलावर ग्राम स्थित प्राथमिक विद्यालय में 59 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें से सिर्फ नौ बच्चे ही विद्यालय पहुंचे। अभी तक यहां किताबें नहीं बांटी गई है, जिससे पढ़ाई का कोई माहौल नहीं दिखा।
जो भी बच्चे आए, पूरे दिन स्कूल में खेले-कूदे और फिर घरों को लौट गए। विद्यालय में मध्याह्न भोजन भी नहीं बनाया गया। इससे बच्चों को खाली पेट लौटना पड़ा। बीईओ विश्वनाथ प्रजापति का कहना है कि मामले की जांच कराएंगे। लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी। परशदेपुर के छतोह विकास क्षेत्र में पूर्व माध्यमिक विद्यालय दोस्तपुर बुढ़वार में सरकारी आदेश के बाद भी हैंडपंप ठीक नहीं कराया गया है।
यहां लगा हैंडपंप दूषित पानी उगल रहा है, जिसे बच्चे पीने को मजबूर हैं। हैंडपंप के आसपास गंदगी का अंबार लगा है और बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। यहां नामांकित 88 बच्चों में महज 22 उपस्थित मिले। किताबें अभी नहीं बांटी गई हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल नहीं दिखा। प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार का कहना है कि किताबें जल्दी बांट दी जाएंगी।
छतोह विकास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय दोस्तपुर बुढ़वार में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम मिली। यहां पर बच्चे क्लास में खेलते नजर आए, लेकिन अध्यापक बाहर बैठे आपस में बातें करते रहे। क्लास में कुर्सी खाली थी और टेबल पर छड़ी रखी हुई थी। जब कैमरे से फोटो खींची जाने लगी तो शिक्षक क्लास की तरफ भागे।
यहां नामांकित 123 बच्चों में से महज 35 बच्चे उपस्थित रहे। शिक्षामित्र समेत चार शिक्षक तैनात हैं। प्रधानाध्यापक शिवकुमारी ने बताया कि पहला दिन है, जिससे बच्चे कम आए हैं। डीह विकास क्षेत्र को पाठ्य पुस्तकें आधी-अधूरी मिली हैं। यहां 86 प्राथमिक विद्यालयों एवं 19 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में लगभग नौ हजार बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन किताबें लगभग पांच हजार उपलब्ध कराई गई हैं।
जूते-मोजे भी कम संख्या में दिए गए हैं। इससे स्कूलों में वितरण को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी है कि आखिर किसको क्या दें। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के लिए एक भी किताब नहीं मिली है। इससे इंग्लिश मीडियम स्कूलों के बच्चों को बिना किताबों के ही खाली बस्ता लेकर जाना होगा। प्रभारी बीईओ हौसला प्रसाद ने बताया कि जो भी कमी है, उसकी डिमांड भेजी गई है।

बीएसए पीएन सिंह ने कहा कि जिले के सभी परिषदीय विद्यालय समय से खुले। सभी जगह अध्यापक पहुंचे। किसी स्कूल के बंद रहने की कोई सूचना नहीं है। सभी विद्यालयों में पहले से ही सारी व्यवस्थाएं पूरी करा दी गई थीं। जिससे स्कूल खुलते ही पढ़ाई का माहौल नजर आया। कहीं-कहीं यूनिफार्म, जूता-मोजा, पाठ्य पुस्तक वितरण भी कराया गया है।
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