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मैदान में आए भाजपा के उम्मीदवार, पर आसान नहीं डगर
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:43 AM IST
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बीजेपी
- फोटो : SELF
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आखिरकार लंबे इंतजार के बाद भाजपा ने रविवार को अपने प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में ताल ठोंकने के लिए उतार दिया है। मैदान में दावेदार तो कई थे, लेकिन पूर्व मंत्री दल बहादुर कोरी को छोड़कर पुराने दिग्गजों से परहेज करते हुए भाजपा ने नए चेहरों पर दांव लगाया है।
हालांकि 2007 व 2012 के विधानसभा चुनावों से यहां पर भाजपा जीत का खाता तक नहीं खोल सकी है। ऐेसे में इस बार उम्मीदवारों की डगर आसान नहीं मानी जा रही है। रायबरेली कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। यहां की छह विधानसभा सीटों पर भाजपा की ओर से प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं।
भाजपा हाईकमान ने रायबरेली सीट से अनीता श्रीवास्तव, हरचंदपुर सीट से कंचन लोधी, ऊंचाहार से बसपा से भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद के बेटे उत्कृष्ट मौर्य, सरेनी सीट से धीरेंद्र बहादुर सिंह और सलोन सीट से दल बहादुर कोरी पर दांव लगाया है।
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हालांकि बछरावां विधानसभा सीट से अभी किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। पिछले दो विस चुनाव में भाजपा के पाले में कोई सीट नहीं आने से इन प्रत्याशियों पर हाईकमान की उम्मीदों पर जहां खरा उतरने का दबाव होगा, वहीं विरोधियों को धूल चटाने के लिए तगड़ी जोर- आजमाइश करनी होगी।
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो भाजपा को किसी सीट से जीत हासिल नहीं हो पाई थी और हर सीट पर उसे करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। कांग्रेस ने जीत का परचम फहराया था। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी जीत का स्वाद नहीं चख पाई और भाजपा के उम्मीदवारोें को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
इस चुनाव में सपा ने अपना दमखम दिखाया। इनसे जाहिर है कि वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव भी भाजपा उम्मीदवारों के लिए आसान नहीं है। अमेठी जिले की तिलोई विधानसभा सीट से मयंकेश्वर शरण सिंह पर भाजपा ने दांव लगाया है।
वर्ष 2007 में मयंकेश्वरण सिंह ने समाजवादी पार्टी से तिलोई विस सीट पर जीत का परचम फहराया था। वर्ष 2012 का चुनाव सपा से लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए थे और करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
यहां पर कांग्रेस से मो. मुस्लिम ने सीट जीती थी। अभी हाल में ही मयंकेश्वर ने सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली है। पार्टी हाईकमान ने मयंकेश्वर शरण पर ही दांव लगाया है। विस चुनाव में कई भाजपाई टिकट पाने के लिए गाहे-बगाहे अपनी ताकत दिखाते रहे हैं।
यदि कोई बड़ा नेता जिले के दौरे पर आया या फिरसभा हुई तो भीड़ जुटाकर ताकत दिखाई, लेकिन भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उनके चेहरे लटक गए। जिले की सीटों में अतुल सिंह, बृजेश सिंह, रवि दीक्षित, महादेव गुप्ता, पूर्व मंत्री गिरीश नारायण पांडेय, राजकुमार वाजपेयी, पशुपतिशंकर वाजपेयी आदि भी काफी समय से टिकट की लाइन में लगे रहे, लेकिन पार्टी ने झटका दे दिया।
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हालांकि 2007 व 2012 के विधानसभा चुनावों से यहां पर भाजपा जीत का खाता तक नहीं खोल सकी है। ऐेसे में इस बार उम्मीदवारों की डगर आसान नहीं मानी जा रही है। रायबरेली कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। यहां की छह विधानसभा सीटों पर भाजपा की ओर से प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं।
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भाजपा हाईकमान ने रायबरेली सीट से अनीता श्रीवास्तव, हरचंदपुर सीट से कंचन लोधी, ऊंचाहार से बसपा से भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद के बेटे उत्कृष्ट मौर्य, सरेनी सीट से धीरेंद्र बहादुर सिंह और सलोन सीट से दल बहादुर कोरी पर दांव लगाया है।
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हालांकि बछरावां विधानसभा सीट से अभी किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई है। पिछले दो विस चुनाव में भाजपा के पाले में कोई सीट नहीं आने से इन प्रत्याशियों पर हाईकमान की उम्मीदों पर जहां खरा उतरने का दबाव होगा, वहीं विरोधियों को धूल चटाने के लिए तगड़ी जोर- आजमाइश करनी होगी।
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो भाजपा को किसी सीट से जीत हासिल नहीं हो पाई थी और हर सीट पर उसे करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। कांग्रेस ने जीत का परचम फहराया था। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी जीत का स्वाद नहीं चख पाई और भाजपा के उम्मीदवारोें को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
इस चुनाव में सपा ने अपना दमखम दिखाया। इनसे जाहिर है कि वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव भी भाजपा उम्मीदवारों के लिए आसान नहीं है। अमेठी जिले की तिलोई विधानसभा सीट से मयंकेश्वर शरण सिंह पर भाजपा ने दांव लगाया है।
वर्ष 2007 में मयंकेश्वरण सिंह ने समाजवादी पार्टी से तिलोई विस सीट पर जीत का परचम फहराया था। वर्ष 2012 का चुनाव सपा से लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए थे और करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
यहां पर कांग्रेस से मो. मुस्लिम ने सीट जीती थी। अभी हाल में ही मयंकेश्वर ने सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली है। पार्टी हाईकमान ने मयंकेश्वर शरण पर ही दांव लगाया है। विस चुनाव में कई भाजपाई टिकट पाने के लिए गाहे-बगाहे अपनी ताकत दिखाते रहे हैं।
यदि कोई बड़ा नेता जिले के दौरे पर आया या फिरसभा हुई तो भीड़ जुटाकर ताकत दिखाई, लेकिन भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उनके चेहरे लटक गए। जिले की सीटों में अतुल सिंह, बृजेश सिंह, रवि दीक्षित, महादेव गुप्ता, पूर्व मंत्री गिरीश नारायण पांडेय, राजकुमार वाजपेयी, पशुपतिशंकर वाजपेयी आदि भी काफी समय से टिकट की लाइन में लगे रहे, लेकिन पार्टी ने झटका दे दिया।