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इस साल अब तक मिले 103 एचआईवी संक्रमित
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2015 11:55 PM IST
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लालगंज क्षेत्र में अधिक पीड़ित मिलने के कारण क्षेत्र को अलर्ट किया गया है। ऐसे में जिले वासियों को सजग होने की जरूरत है। हर किसी को उठकर आगे बढ़ना होगा और मौत के इस कहर को रोकने में जागरूक करना होगा।
जिले में लगातार एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। एड्स की रोकथाम के लिए वर्ष 2004 से प्रयास शुरू किया गया।
जांच के लिए जिले में जिला महिला और पुरुष अस्पताल, सीएचसी बछरावां एवं लालगंज में आईसीटीसी सेंटर खोले गए हैं। अब तक 1,19,163 लोगों के रक्त की जांच की गई है।
इसमें 888 लोगों में एचआईवी पॉजिटिव मिला। इसमें सबसे ज्यादा लोग वे हैं जो रोजी-रोटी की तलाश में बाहर रहते हैं। एचआईवी से संक्रमित होने के बाद यहां पहुंचते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग हर साल विश्व एड्स दिवस के मौके पर एक दिसंबर को जागरूकता अभियान चलाकर खानापूरी करता है। यही वजह है कि जिले में दो साल से पीड़ितों की संख्या सैकड़ा पार कर रही है।
इस साल 103 लोगों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अब समाज के लोगों को भी इसे रोकने के लिए सजग प्रहरी की तरह काम करना होगा, तभी इस पर अंकुश लगाया जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार एड्स की चपेट में आने के बाद शरीर सूखने लगता है। खून भी लगातार कम होने लगता है। कमजोरी प्रतीत होती है और पूरे शरीर में दर्द भी बढ़ जाता है।
बुखार आने के साथ ही अन्य बीमारियों की चपेट में शरीर आ जाता है। कोई भी दवा काम नहीं करती है और लगातार शरीर शिथिल होने लगता है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सलीम का कहना है कि एड्स असुरक्षित यौन संबद्ध के अलावा संक्रमित सुई, ब्लेड और रक्त से भी होता है। इसलिए सिरिंज का प्रयोग एक बार ही करना चाहिए।
नाई के यहां इस बात का ध्यान रखें कि हर बार नया ब्लेड इस्तेमाल हो। पीड़ित को छूने, उसके साथ बैठकर बातें करने या साथ खाना खाने से यह संक्रमण नहीं होता है।
जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेनू चौधरी का कहना है कि एड्स से पीड़ित के साथ अमूनन सौतेला व्यवहार किया जाता है। इससे सभी को बचने की जरूरत है।
पीड़ित को हर किसी की सहानुभूति की जरूरत होती है। उसके साथ अच्छा व्यवहार कर जीवन के प्रति संघर्ष में उसका सहयोग करें। उसके साथ अच्छा व्यवहार करें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश यादव ने बताया कि इस साल एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। रोकथाम के लिए जन जागरूकता पर अधिक जोर दिया जाएगा।
जिले के सेंटरों पर ब्लड की जांच के बाद एचआईवी पॉजिटिव मिलने पर पीड़ित को एआरटी सेंटर एनटीपीसी ऊंचाहार सीडी-4 काउंट जांच के लिए भेजा जाता है। पीड़ित की पहचान हमेशा गुप्त रखी जाती है।
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जिले में लगातार एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। एड्स की रोकथाम के लिए वर्ष 2004 से प्रयास शुरू किया गया।
जांच के लिए जिले में जिला महिला और पुरुष अस्पताल, सीएचसी बछरावां एवं लालगंज में आईसीटीसी सेंटर खोले गए हैं। अब तक 1,19,163 लोगों के रक्त की जांच की गई है।
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इसमें 888 लोगों में एचआईवी पॉजिटिव मिला। इसमें सबसे ज्यादा लोग वे हैं जो रोजी-रोटी की तलाश में बाहर रहते हैं। एचआईवी से संक्रमित होने के बाद यहां पहुंचते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग हर साल विश्व एड्स दिवस के मौके पर एक दिसंबर को जागरूकता अभियान चलाकर खानापूरी करता है। यही वजह है कि जिले में दो साल से पीड़ितों की संख्या सैकड़ा पार कर रही है।
इस साल 103 लोगों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अब समाज के लोगों को भी इसे रोकने के लिए सजग प्रहरी की तरह काम करना होगा, तभी इस पर अंकुश लगाया जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार एड्स की चपेट में आने के बाद शरीर सूखने लगता है। खून भी लगातार कम होने लगता है। कमजोरी प्रतीत होती है और पूरे शरीर में दर्द भी बढ़ जाता है।
बुखार आने के साथ ही अन्य बीमारियों की चपेट में शरीर आ जाता है। कोई भी दवा काम नहीं करती है और लगातार शरीर शिथिल होने लगता है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सलीम का कहना है कि एड्स असुरक्षित यौन संबद्ध के अलावा संक्रमित सुई, ब्लेड और रक्त से भी होता है। इसलिए सिरिंज का प्रयोग एक बार ही करना चाहिए।
नाई के यहां इस बात का ध्यान रखें कि हर बार नया ब्लेड इस्तेमाल हो। पीड़ित को छूने, उसके साथ बैठकर बातें करने या साथ खाना खाने से यह संक्रमण नहीं होता है।
जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेनू चौधरी का कहना है कि एड्स से पीड़ित के साथ अमूनन सौतेला व्यवहार किया जाता है। इससे सभी को बचने की जरूरत है।
पीड़ित को हर किसी की सहानुभूति की जरूरत होती है। उसके साथ अच्छा व्यवहार कर जीवन के प्रति संघर्ष में उसका सहयोग करें। उसके साथ अच्छा व्यवहार करें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश यादव ने बताया कि इस साल एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। रोकथाम के लिए जन जागरूकता पर अधिक जोर दिया जाएगा।
जिले के सेंटरों पर ब्लड की जांच के बाद एचआईवी पॉजिटिव मिलने पर पीड़ित को एआरटी सेंटर एनटीपीसी ऊंचाहार सीडी-4 काउंट जांच के लिए भेजा जाता है। पीड़ित की पहचान हमेशा गुप्त रखी जाती है।