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शैलेंद्र में बचपन से था देश के लिए मर मिटने का जुनून

Wed, 07 Oct 2020 12:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2020 12:39 AM IST
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Shailendra had a passion to die for the country since childhood
रायबरेली। शैलेंद्र सिंह पर बचपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने और मर मिटने का जुनून सवार था। अक्सर वह अपने पिता से कहा करता था कि उसे कोई नौकरी नहीं चाहिए। उसका सपना है कि वह देश की तरफ आंख उठाने वालों को कड़ा सबक सिखाए।
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शहीद के चाचा वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि शैलेंद्र कहता था कि जब भी हमारा कोई साथी जवान शहीद होता है तो बहुत दुख होता है। इसलिए जब मौका मिलता है मैं आतंकियों और पाकिस्तानी सेना से मोर्चा लेकर उन्हें सबक सिखाने का काम करता हूं। उसका यही जुनून देश सेवा में समर्पित हो गया।
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उन्होंने बताया कि शहीद शैलेंद्र सिंह गांव के संगी-साथियों के साथ सेना में जाने की तैयारी करता था। इसके लिए रोज पांच किलोमीटर की दौड़ लगाने के साथ ही शारीरिक व्यायाम किया करता था। पिता नरेंद्र बहादुर सिंह कहते हैैं कि शैलेंद्र को देश भक्ति की फिल्में देखने में रुचि रहती थी।
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वर्ष 2008 में मेहनत के बाद सीआरपीएफ में नौकरी मिली और सेना में जाने का उसका ख्याब पूरा हुआ। 10 साल पहले चांदनी से उसकी शादी हुई थी। शादी बाद उसका एक बेटा कुशाग्र है।
शहर में मकान बनाने के बाद भी शैलेंद्र का गांव जाना कम नहीं हुआ। छुट्टी पर आने पर वह बराबर गांव जाता था और अपने साथियों से मुलाकात करता था। उन्होंने बताया कि जब शैलेंद्र छुट्टी से घर आता था तो साथ में खेल किट लाता था और गांव के युवाओं को देता था।
साथ ही युवाओं में सेना में जाने के लिए जोश भरता था। उन्हें प्रैक्टिस कराता था। शहीद जवान शैलेंद्र का अपने गांव और वहां के रहने वाले लोगों से बेहद लगाव था। यही वजह है कि शैलेंद्र के शहीद होने की खबर उनके गांव पहुंची तो हर कोई गमगीन हो गया। लोगों की आंखें नम हो गईं।

शैलेंद्र के जाने का सबसे अधिक गम उनके साथियों को है। जिन्होंने न सिर्फ शैलेंद्र के साथ पढ़ाई की, बल्कि सेना में जाने के लिए प्रैक्टिस भी की। वो उसके हर सुख-दुख के कार्य में शामिल होते थे।
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