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सड़कों से उड़ रही धूल, हिचकोले खा रहे लोग
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खस्ताहाल सड़क में धंस गया ट्रैक्टर
डीएम को छोड़कर सभी बड़े अधिकारी राजकीय कॉलोनी में रहते हैं। गोरा बाजार से राजकीय कॉलोनी गई सड़क पर शहरवासियों की बात छोड़िए आने-जाने में वाहन तक धंस रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं। बृहस्पतिवार को इस रोड से जा रहा एक ट्रैक्टर खस्ताहाल सड़क में धंस गया। बाद में ट्रैक्टर निकालने के लिए जेसीबी बुलानी पड़ी।
धंस गई सड़क, बनी परेशानी का सबब
सीवर लाइन बिछाने के लिए राजकीय कॉलोनी में सड़क खोद दी गई पर उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। नतीजे में सड़क धंस गई, उसके बीच में दरार आ गई है। थोड़ी सी चूक लोगों के लिए खतरे का सबब बन सकती है। जब से सड़क की खुदाई हुई लोग इस समस्या से परेशान हैं पर जिम्मेदार सड़क की मरम्मत नहीं करवा रहे हैं।
सीवर की समस्या बनी हुई
सम्राट नगर मोहल्ले में भी सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क खोदी गई पर मरम्मत नहीं कराई गई है। नतीजतन आने-जाने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने कई बार इसके लिए आवाज उठाई, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। सीवर की समस्या से भी लोगों को राहत नहीं मिल पाई।
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रायबरेली। शहर क्षेत्र में अमृत योजना में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर किस तरह लापरवाही हुई यह बताने के लिए यह तीन मामले काफी हैं। ‘अमर उजाला’ की टीम ने मौके पर जाकर योजना के कार्यों की पड़ताल की तो हकीकत कुछ यूं ही निकलकर सामने आई।
सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़कों की खोदाई तो की गई पर मरम्मत के नाम पर धन की बंदरबांट कर ली गई। नतीजतन तल्ख धूप में उड़ती धूल के बीच शहरवासी हिचकोले खाते आते जाते हैं। कुछ जगहों पर सड़कें धंस गई, जिसमें फंसकर हादसे की आशंका रहती है पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
यह हाल तब है जब सीवर लाइन बिछाने और सड़कों की मरम्मत के नाम पर 80 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन समस्या जस की तस है।
अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने का काम 2018 में शुरू कराया गया था। अमृत योजना कार्य की जिम्मेदारी शासन ने कार्यदायी संस्था जल निगम को सौंपी। हालांकि काम कराने के लिए फर्म घारपूरे इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को नामित किया गया था।
घारपूरे कंपनी की ओर से काम तोमर कंस्ट्रक्शन कंपनी से करवाया जा रहा है। शहर क्षेत्र में करीब 18 हजार लोगों को सीवर का कनेक्शन दिया जाना है। तोमर कंस्ट्रक्शन की ओर से कराए गए कार्य के तहत लोगों को कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। पहले चरण के कार्य में 80 करोड़ रुपये खर्च किए गए। मौरंग और ईंट की खरीद में भी खूब बिक्री की गई।
दूसरे चरण के कार्य में भी मानक लापता
सीवर लाइन बिछाने के दूसरे चरण का काम कार्यदायी संस्था केके स्पाइन को दिया गया है। 142 करोड़ की लागत से काम तो शुरू हुआ लेकिन इसमें मानकों का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बस्तेपुर समेत अन्य मोहल्लों में मनमाने ढंग से कार्य कराया जा रहा है। सड़कों की खोदाई से लोगों को आवागमन में दिक्कतें हो रही है। कहा जा रहा है कि काम भी बेहद धीमी गति से हो रहा है। कार्यदायी संस्था स्वयं काम न करके दूसरे ठेकेदारों से काम करा रही है।
जांच हो, दोषियों को भेजा जाए जेल
फोटो संख्या चार से लेकर सात तक।
सम्राट नगर मोहल्ला निवासी रवींद्र कुमार, विनोद कुुमार सिंह, श्रीनाथ यादव व टीटू श्रीवास्तव कहते हैं कि योजना के नाम पर धन की बंदरबांट की जा रही है। काम मानक के मुताबिक नहीं हो रहा है। मरम्मत न होने से आवागमन में परेशानी हो रही है। कार्यदायी संस्था के तहत कराए गए कार्यों की जांच हो। साथ ही योजना में घालमेल करने वाले दोषियों को तत्काल जेल भेजा जाए।
अमृत योजना के तहत जिन सड़कों की खोदाई की गई है जल्द उनकी मरम्मत करा दी जाएगी। नागरिकों को जल्द समस्या से राहत मिल जाएगी। दो श्रमिकों की मौत के बाद पूरे मामले की जांच कराई जा रही है कि सड़कों की मरम्मत कार्य में देरी क्यों की गई।
- जीसी श्रीवास्तव, एक्सईएन, जलनिगम
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डीएम को छोड़कर सभी बड़े अधिकारी राजकीय कॉलोनी में रहते हैं। गोरा बाजार से राजकीय कॉलोनी गई सड़क पर शहरवासियों की बात छोड़िए आने-जाने में वाहन तक धंस रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं। बृहस्पतिवार को इस रोड से जा रहा एक ट्रैक्टर खस्ताहाल सड़क में धंस गया। बाद में ट्रैक्टर निकालने के लिए जेसीबी बुलानी पड़ी।
धंस गई सड़क, बनी परेशानी का सबब
सीवर लाइन बिछाने के लिए राजकीय कॉलोनी में सड़क खोद दी गई पर उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। नतीजे में सड़क धंस गई, उसके बीच में दरार आ गई है। थोड़ी सी चूक लोगों के लिए खतरे का सबब बन सकती है। जब से सड़क की खुदाई हुई लोग इस समस्या से परेशान हैं पर जिम्मेदार सड़क की मरम्मत नहीं करवा रहे हैं।
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सीवर की समस्या बनी हुई
सम्राट नगर मोहल्ले में भी सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क खोदी गई पर मरम्मत नहीं कराई गई है। नतीजतन आने-जाने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने कई बार इसके लिए आवाज उठाई, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। सीवर की समस्या से भी लोगों को राहत नहीं मिल पाई।
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रायबरेली। शहर क्षेत्र में अमृत योजना में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर किस तरह लापरवाही हुई यह बताने के लिए यह तीन मामले काफी हैं। ‘अमर उजाला’ की टीम ने मौके पर जाकर योजना के कार्यों की पड़ताल की तो हकीकत कुछ यूं ही निकलकर सामने आई।
सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़कों की खोदाई तो की गई पर मरम्मत के नाम पर धन की बंदरबांट कर ली गई। नतीजतन तल्ख धूप में उड़ती धूल के बीच शहरवासी हिचकोले खाते आते जाते हैं। कुछ जगहों पर सड़कें धंस गई, जिसमें फंसकर हादसे की आशंका रहती है पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
यह हाल तब है जब सीवर लाइन बिछाने और सड़कों की मरम्मत के नाम पर 80 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन समस्या जस की तस है।
अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने का काम 2018 में शुरू कराया गया था। अमृत योजना कार्य की जिम्मेदारी शासन ने कार्यदायी संस्था जल निगम को सौंपी। हालांकि काम कराने के लिए फर्म घारपूरे इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को नामित किया गया था।
घारपूरे कंपनी की ओर से काम तोमर कंस्ट्रक्शन कंपनी से करवाया जा रहा है। शहर क्षेत्र में करीब 18 हजार लोगों को सीवर का कनेक्शन दिया जाना है। तोमर कंस्ट्रक्शन की ओर से कराए गए कार्य के तहत लोगों को कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। पहले चरण के कार्य में 80 करोड़ रुपये खर्च किए गए। मौरंग और ईंट की खरीद में भी खूब बिक्री की गई।
दूसरे चरण के कार्य में भी मानक लापता
सीवर लाइन बिछाने के दूसरे चरण का काम कार्यदायी संस्था केके स्पाइन को दिया गया है। 142 करोड़ की लागत से काम तो शुरू हुआ लेकिन इसमें मानकों का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बस्तेपुर समेत अन्य मोहल्लों में मनमाने ढंग से कार्य कराया जा रहा है। सड़कों की खोदाई से लोगों को आवागमन में दिक्कतें हो रही है। कहा जा रहा है कि काम भी बेहद धीमी गति से हो रहा है। कार्यदायी संस्था स्वयं काम न करके दूसरे ठेकेदारों से काम करा रही है।
जांच हो, दोषियों को भेजा जाए जेल
फोटो संख्या चार से लेकर सात तक।
सम्राट नगर मोहल्ला निवासी रवींद्र कुमार, विनोद कुुमार सिंह, श्रीनाथ यादव व टीटू श्रीवास्तव कहते हैं कि योजना के नाम पर धन की बंदरबांट की जा रही है। काम मानक के मुताबिक नहीं हो रहा है। मरम्मत न होने से आवागमन में परेशानी हो रही है। कार्यदायी संस्था के तहत कराए गए कार्यों की जांच हो। साथ ही योजना में घालमेल करने वाले दोषियों को तत्काल जेल भेजा जाए।
अमृत योजना के तहत जिन सड़कों की खोदाई की गई है जल्द उनकी मरम्मत करा दी जाएगी। नागरिकों को जल्द समस्या से राहत मिल जाएगी। दो श्रमिकों की मौत के बाद पूरे मामले की जांच कराई जा रही है कि सड़कों की मरम्मत कार्य में देरी क्यों की गई।
- जीसी श्रीवास्तव, एक्सईएन, जलनिगम