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नियमित ट्रेनें चले बिना नहीं मिलेगी राहत

Thu, 26 Aug 2021 11:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 11:24 PM IST
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Relief will not be available without running regular trains
रायबरेली। ट्रेनों का संचालन भले ही होने लगा है और लोग बेखौफ होकर सफर भी कर रहे हैं लेकिन डेढ़ साल पहले बेपटरी हुआ ट्रेनों का संचालन अभी पूरी तरह वापस ट्रैक पर नहीं लाया जा सका है। वर्तमान में साप्ताहिक, हफ्ते में दो-तीन दिन चलने वाली ट्रेनों समेत 26 जोड़ी गाड़ियां चल रही हैं जबकि रायबरेली से होकर 42 जोड़ी गाड़ियां गुजरती थीं।
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इस समय जितनी भी गाड़ियां चल रही हैं, उन्हें स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया जा रहा है। इससे एमएसटी धारक ट्रेन के सफर से वंचित हैं। सिर्फ एक गाड़ी अनारक्षित है जिससे लोग चालू टिकट लेकर सभी ट्रेनों में सफर नहीं कर पा रहे हैं।
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लखनऊ, प्रयागराज व वाराणसी की तरफ से आने वाली पैसेंजर, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट समेत 42 जोड़ी गाड़ियों का संचालन रायबरेली से होता था। बीते साल मार्च में लॉकडाउन लगा तो ट्रेनों का संचालन भी ठप हो गया। करीब डेढ़ साल बीत गया लेकिन अब तक ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से पटरी पर लौट नहीं सका है।
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बीते साल अक्तूबर से ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। धीरे-धीरे करके 29 जोड़ी गाड़ियां शुरू की गईं। इनमें से भी तीन जोड़ी गाड़ी फिलहाल निरस्त चल रही है। सिर्फ एक ट्रेन को छोड़कर अब तक चलाई गई सभी गाड़ियां आरक्षित हैं जिससे द्वितीय श्रेणी के टिकट पर सफर मुमकिन नहीं है। एमएसटी वाले यानी दैनिक यात्रियों को तो बिल्कुल लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस समय हफ्ते में एक, दो या तीन दिन चलने वाली लंबी दूरी की लगभग सभी गाड़ियों को चलाया जा रहा है। इनमें मालदा टाउन-नई दिल्ली, लालकुआं-हावड़ा, जोधपुर-वाराणसी, यशवंतपुर-लखनऊ, कोलकाता-आगरा कैंट के बीच साप्ताहिक गाड़ी चल रही है।
जम्मूतवी से पटना, प्रतापगढ़ से लोकमान्य तिलक के बीच हफ्ते में दो दिन, भोपाल से प्रतापगढ़, ऋषिकेश से प्रयागराज, पुरी से नई दिल्ली के बीच हफ्ते में तीन दिन गाड़ियों का संचालन हो रहा है। हावड़ा से अमृतसर (पंजाब मेल), वाराणसी से नई दिल्ली (काशी विश्वनाथ), प्रतापगढ़ से दिल्ली (पद्मावत) के बीच रोजाना ट्रेन दौड़ती है।
ये सभी गाड़ियां लंबी दूरी का सफर तय करती हैं। इसके अलावा लखनऊ, वाराणसी, प्रतापगढ़, कानपुर व प्रयागराज के लिए इंटरसिटी समेत कई ट्रेनों का संचालन रोजाना हो रहा है।
ट्रेनों के बंद होने से टिकटों की बिक्री एवं रिजर्वेशन से होने वाली आय पूरी तरह से ठप हो गई थी। ट्रेनें चलनी तो शुरू हुईं लेकिन आमदनी अभी पहले जैसी नहीं हो रही है। सिर्फ कानपुर-प्रतापगढ़ के बीच दौड़ने वाली एक गाड़ी अनारक्षित है। इस ट्रेन के लिए भी बहुत अधिक टिकट नहीं बिकते हैं।
औसतन रोजाना 50 टिकट ही बिक रहे हैं। पहले द्वितीय श्रेणी के टिकटों की बिक्री से रोजाना औसत आय तीन से चार लाख रुपये होती थी लेकिन इस समय आमदनी न के बराबर हो रही है। आरक्षण की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। आरक्षण से होने वाली आय पर काफी असर पड़ा है।

स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि ट्रेनों का संचालन पटरी पर लौट रहा है। पहले यहां से होकर 42 जोड़ी ट्रेनें चलती थीं जिनमें से 29 जोड़ी गाड़ियों को स्पेशल ट्रेन के रूप में चालू कर दिया गया है। हालांकि इनमें से तीन जोड़ी ट्रेनें इस समय निरस्त चल रही हैं। रायबरेली में यार्ड रिमॉडलिंग एवं रेल लाइन दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से पटरी पर न लौटने के कारण आमदनी भी प्रभावित है।
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