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मरीजों को मिली राहत, जिले को मिले 10 नए डॉक्टर
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रायबरेली। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों को कुछ राहत मिली है। शासन स्तर पर वॉक इन इंटरव्यू के बाद जिले को 10 नए डॉक्टर मिले हैं। इसमें आठ डॉक्टरों को सीएचसी में तैनात कर दिया गया है।
जिले में रेगुलर डॉक्टरों के 181 पदों के सापेक्ष करीब 90 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। ऐसी दशा में सीएचसी से लेकर पीएचसी तक मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद है कि इसी माह जिले को और चिकित्सक मिल सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं हैं। कहीं दो तो कहीं तीन डॉक्टरों के सहारे सीएचसी का संचालन हो रहा है।
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जिले में रेगुलर डॉक्टरों के 181 पद सृजित हैं, लेकिन अस्पतालों की संख्या काफी बढ़ गई है। एक ओर जहां डॉक्टरों के नए पद सृजित नहीं किए गए हैं, वहीं सृजित पदों के सापेक्ष चिकित्सकों की व्यवस्था भी नहीं है।
कई चिकित्सक पीजी तो कई प्रशिक्षण सहित अन्य कार्यों के लिए सीएचसी पर ओपीडी नहीं कर पा रहे हैं, इसका खामियाजा मरीजों को भोगना पड़ रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पटल सहायक राजेश मिश्रा ने बताया कि शासन स्तर पर वॉक इन इंटरव्यू कराया गया, जिसके बाद जिले को 10 नए डॉक्टर मिले हैं।
इसमें आठ डॉक्टरों को सीएचसी पर तैनात कर दिया गया है। इसमें डॉ. अंकिता मिश्रा को महराजगंज, डॉ. शैली रस्तोगी को अमावां, डॉ. अमृता यादव को डलमऊ, डॉ. जितेंद्र चौधरी को शिवगढ़, डॉ. मेघा यादव को जगतपुर, डॉ. पीके पांडेय को नसीराबाद और डॉ. अमितराज व डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव को लालगंज सीएचसी भेजा गया है।
दो अन्य डॉक्टरों को भी अस्पताल में तैनात किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ने के बाद मरीजों को राहत मिली है। हालांकि अस्पतालों में डॉक्टरों की बेहद कमी बनी हुई है।
पीजी कर रहे डॉक्टरों का नहीं आया रिजल्ट
जिले के अस्पतालों में तैनात कई चिकित्सक पीजी करने के लिए छुट्टी पर चले गए थे। इसमें कई चिकित्सकों का रिजल्ट आ गया है, लेकिन करीब छह चिकित्सकों का रिजल्ट घोषित करके सूची न जान किए जाने के कारण चिकित्सक काम नहीं कर पा रहे हैं। चिकित्सकों को घर में बैठकर ही इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
जिले को 10 नए चिकित्सक मिले हैं, इसमें जिन सीएचसी में डॉक्टरों की कमी थी, उन अस्पतालों में उन्हें तैनात किया गया है। शासन से और चिकित्सक मिलने की उम्मीद है। अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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जिले में रेगुलर डॉक्टरों के 181 पदों के सापेक्ष करीब 90 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। ऐसी दशा में सीएचसी से लेकर पीएचसी तक मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद है कि इसी माह जिले को और चिकित्सक मिल सकते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं हैं। कहीं दो तो कहीं तीन डॉक्टरों के सहारे सीएचसी का संचालन हो रहा है।
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जिले में रेगुलर डॉक्टरों के 181 पद सृजित हैं, लेकिन अस्पतालों की संख्या काफी बढ़ गई है। एक ओर जहां डॉक्टरों के नए पद सृजित नहीं किए गए हैं, वहीं सृजित पदों के सापेक्ष चिकित्सकों की व्यवस्था भी नहीं है।
कई चिकित्सक पीजी तो कई प्रशिक्षण सहित अन्य कार्यों के लिए सीएचसी पर ओपीडी नहीं कर पा रहे हैं, इसका खामियाजा मरीजों को भोगना पड़ रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पटल सहायक राजेश मिश्रा ने बताया कि शासन स्तर पर वॉक इन इंटरव्यू कराया गया, जिसके बाद जिले को 10 नए डॉक्टर मिले हैं।
इसमें आठ डॉक्टरों को सीएचसी पर तैनात कर दिया गया है। इसमें डॉ. अंकिता मिश्रा को महराजगंज, डॉ. शैली रस्तोगी को अमावां, डॉ. अमृता यादव को डलमऊ, डॉ. जितेंद्र चौधरी को शिवगढ़, डॉ. मेघा यादव को जगतपुर, डॉ. पीके पांडेय को नसीराबाद और डॉ. अमितराज व डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव को लालगंज सीएचसी भेजा गया है।
दो अन्य डॉक्टरों को भी अस्पताल में तैनात किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ने के बाद मरीजों को राहत मिली है। हालांकि अस्पतालों में डॉक्टरों की बेहद कमी बनी हुई है।
पीजी कर रहे डॉक्टरों का नहीं आया रिजल्ट
जिले के अस्पतालों में तैनात कई चिकित्सक पीजी करने के लिए छुट्टी पर चले गए थे। इसमें कई चिकित्सकों का रिजल्ट आ गया है, लेकिन करीब छह चिकित्सकों का रिजल्ट घोषित करके सूची न जान किए जाने के कारण चिकित्सक काम नहीं कर पा रहे हैं। चिकित्सकों को घर में बैठकर ही इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
जिले को 10 नए चिकित्सक मिले हैं, इसमें जिन सीएचसी में डॉक्टरों की कमी थी, उन अस्पतालों में उन्हें तैनात किया गया है। शासन से और चिकित्सक मिलने की उम्मीद है। अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी