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लालगंज के कारखाने में बने रेल डिब्बे मोजांबीक के ट्रैक पर दौड़ने को तैयार
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लालगंज (रायबरेली)। आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने में दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के देश मोजांबीक भेजे जाने के लिए 12 डिब्बों की एक रैक बनकर तैयार हो गई है। इनके निरीक्षण के लिए मोजांबीक से एक छह सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल 22 सितंबर को यहां आ रहा है। इसके लिए तैयार डिब्बों की साफ-सफाई का काम और मोजांबीक से आने वाले प्रतिनिधि मंडल के स्वागत की तैयारियों का काम तेज कर दिया गया है।
राइट्स नाम की संस्था के जरिए रेलवे को जिन डिब्बों को बनाने का ऑर्डर मिला है, उनमें से आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने में 12 डिब्बों की पहली रैक बनकर तैयार है।
इनके निरीक्षण के लिए मोजांबीक से एक छह सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल 22 सितंबर को यहां आ रहा है। इस प्रतिनिधि मंडल में सीएफएम बोर्ड के चेयरमैन मिजुएल जोश माताबेल, कैबिनेट ऑफ मिनिस्टिर ऑफ ट्रांसपोर्ट एंड कम्युनिकेशन एंटोनियो मैनुएल मैट्यूज, एक्जूक्यूटिव बोर्ड मेंबर फिनैंस सीएफएम अबूबकर एडमाओ मूसा आदि शामिल हैं। यह दल पहले 20 सितंबर को वाराणसी के डीएलडब्ल्यू कारखाने में निर्माणाधीन रेल इंजन का निरीक्षण करने के बाद यहां 22 सितंबर को पहुंचेगा।
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डिब्बों को मुंबई बंदरगाह तक ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टर तय
बतातेे हैं कि मोजांबीक में रेल लाइन केप गेज है, जो भारत की रेल लाइन मीटर गेज से अलग है। लिहाजा इन डिब्बों को रेल लाइन के जरिए बंदरगाह तक ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता। सूत्र बताते हैं कि राइट्स की ओर से ट्रांसपोर्टर तय कर दिया गया है, जो सड़क मार्ग से इन डिब्बों को बंदरगाह तक ले जाने की तैयारी करने में जुट गया है।
डिब्बों की रवानगी की तैयारी
कोई वीआईपी इन डिब्बों की रवानगी के समारोह में बुलाया जा सकता है। भारत के लिए डिब्बों का निर्यात करना एक फायदे का सौदा साबित हो सकता है, इसलिए रेलवे ने बड़ी शिद्दत के साथ आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने में प्रयोग की जा रही आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग करके इन डिब्बों बनवाया है। इस लिए यह उम्मीद है कि मोजांबीक को भेजे जाने वाले डिब्बों को फ्लैग आफ करने के लिए रेलवे किसी वीआईपी को लाएगा।
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राइट्स नाम की संस्था के जरिए रेलवे को जिन डिब्बों को बनाने का ऑर्डर मिला है, उनमें से आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने में 12 डिब्बों की पहली रैक बनकर तैयार है।
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इनके निरीक्षण के लिए मोजांबीक से एक छह सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल 22 सितंबर को यहां आ रहा है। इस प्रतिनिधि मंडल में सीएफएम बोर्ड के चेयरमैन मिजुएल जोश माताबेल, कैबिनेट ऑफ मिनिस्टिर ऑफ ट्रांसपोर्ट एंड कम्युनिकेशन एंटोनियो मैनुएल मैट्यूज, एक्जूक्यूटिव बोर्ड मेंबर फिनैंस सीएफएम अबूबकर एडमाओ मूसा आदि शामिल हैं। यह दल पहले 20 सितंबर को वाराणसी के डीएलडब्ल्यू कारखाने में निर्माणाधीन रेल इंजन का निरीक्षण करने के बाद यहां 22 सितंबर को पहुंचेगा।
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डिब्बों को मुंबई बंदरगाह तक ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टर तय
बतातेे हैं कि मोजांबीक में रेल लाइन केप गेज है, जो भारत की रेल लाइन मीटर गेज से अलग है। लिहाजा इन डिब्बों को रेल लाइन के जरिए बंदरगाह तक ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता। सूत्र बताते हैं कि राइट्स की ओर से ट्रांसपोर्टर तय कर दिया गया है, जो सड़क मार्ग से इन डिब्बों को बंदरगाह तक ले जाने की तैयारी करने में जुट गया है।
डिब्बों की रवानगी की तैयारी
कोई वीआईपी इन डिब्बों की रवानगी के समारोह में बुलाया जा सकता है। भारत के लिए डिब्बों का निर्यात करना एक फायदे का सौदा साबित हो सकता है, इसलिए रेलवे ने बड़ी शिद्दत के साथ आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने में प्रयोग की जा रही आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग करके इन डिब्बों बनवाया है। इस लिए यह उम्मीद है कि मोजांबीक को भेजे जाने वाले डिब्बों को फ्लैग आफ करने के लिए रेलवे किसी वीआईपी को लाएगा।