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ग्रामीण विकास मंत्रालय के पोर्टल से गायब हो गया रायबरेली का नाम
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रायबरेली। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के पोर्टल पर रायबरेली का नाम ही नहीं था। जिसके चलते केंद्र में नई सरकार बनने के बाद भी रायबरेली में जिला विकास एवं समन्वय अनुश्रवण समिति (दिशा) का गठन नहीं हो पा रहा था। अमर उजाला में खबर छपने के बाद डीआरडीए के परियोजना निदेशक (पीडी) की मंत्रालय से बात हुई तो यह खामी सामने आ गई।
अब मंत्रालय के स्तर पर इस त्रुटि को दूर करने का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही मंत्रालय से रायबरेली में दिशा के अध्यक्ष व सह अध्यक्ष का मनोनयन हो जाएगा जिसके बाद समिति का गठन हो सकेगा। प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में दिशा का गठन हो चुका है। लेकिन केंद्र में सरकार बनने के 100 दिन बाद भी रायबरेली में दिशा का गठन न होने से इसकी बैठक भी संभव नहीं है।
100 दिन के अंदर दिशा का गठन हो जाना चाहिए ताकि सभी संसदीय क्षेत्रों में केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति समीक्षा समय-समय पर हो सके। रायबरेली में दिशा का गठन न होने पर डीएम ने शासन को पत्र भी भेजा था। जब तक ग्रामीण विकास मंत्रालय से अध्यक्ष और सह अध्यक्ष का मनोनयन नहीं होगा, तब तक दिशा का गठन नहीं हो सकता है। साथ ही सांसद को दिशा की बैठक में केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा करने का मौका भी नहीं मिल सकता है।
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अमर उजाला ने 11 अक्तूबर के अंक में सोनिया नहीं कर पाएंगी केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा शीर्षक से इसकी खबर प्रकाशित की थी। खबर छपते ही मामला गरमा गया। शुक्रवार को डीआरडीए के पीडी प्रेमचंद्र पटेल से ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने फोन पर बात की। अधिकारियों का कहना है कि फोन पर हुई बात में यह समस्या सामने आई की मंत्रालय के पोर्टल पर रायबरेली का नाम न दिखने के कारण दिशा के अध्यक्ष व सह अध्यक्ष मनोनीत नहीं हो सके।
मंत्रालय ने जल्द ही त्रुटि को दूर करके दिशा के अध्यक्ष व सह अध्यक्ष मनोनीत करने का आश्वासन दिया है। जिला अधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि डीआरडीए के पीडी की शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्रालय से फोन पर बात हुई है। इससे स्पष्ट हुआ है कि पोर्टल पर रायबरेली का नाम न दिखने के कारण दिशा के लिए अध्यक्ष व सह अध्यक्ष का मनोनयन नहीं हो सका है। मंत्रालय ने त्रुटि में सुधार करके जल्द ही मनोनयन का आश्वासन दिया है। जल्द ही दिशा के गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
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अब मंत्रालय के स्तर पर इस त्रुटि को दूर करने का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही मंत्रालय से रायबरेली में दिशा के अध्यक्ष व सह अध्यक्ष का मनोनयन हो जाएगा जिसके बाद समिति का गठन हो सकेगा। प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में दिशा का गठन हो चुका है। लेकिन केंद्र में सरकार बनने के 100 दिन बाद भी रायबरेली में दिशा का गठन न होने से इसकी बैठक भी संभव नहीं है।
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100 दिन के अंदर दिशा का गठन हो जाना चाहिए ताकि सभी संसदीय क्षेत्रों में केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति समीक्षा समय-समय पर हो सके। रायबरेली में दिशा का गठन न होने पर डीएम ने शासन को पत्र भी भेजा था। जब तक ग्रामीण विकास मंत्रालय से अध्यक्ष और सह अध्यक्ष का मनोनयन नहीं होगा, तब तक दिशा का गठन नहीं हो सकता है। साथ ही सांसद को दिशा की बैठक में केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा करने का मौका भी नहीं मिल सकता है।
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अमर उजाला ने 11 अक्तूबर के अंक में सोनिया नहीं कर पाएंगी केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा शीर्षक से इसकी खबर प्रकाशित की थी। खबर छपते ही मामला गरमा गया। शुक्रवार को डीआरडीए के पीडी प्रेमचंद्र पटेल से ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने फोन पर बात की। अधिकारियों का कहना है कि फोन पर हुई बात में यह समस्या सामने आई की मंत्रालय के पोर्टल पर रायबरेली का नाम न दिखने के कारण दिशा के अध्यक्ष व सह अध्यक्ष मनोनीत नहीं हो सके।
मंत्रालय ने जल्द ही त्रुटि को दूर करके दिशा के अध्यक्ष व सह अध्यक्ष मनोनीत करने का आश्वासन दिया है। जिला अधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि डीआरडीए के पीडी की शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्रालय से फोन पर बात हुई है। इससे स्पष्ट हुआ है कि पोर्टल पर रायबरेली का नाम न दिखने के कारण दिशा के लिए अध्यक्ष व सह अध्यक्ष का मनोनयन नहीं हो सका है। मंत्रालय ने त्रुटि में सुधार करके जल्द ही मनोनयन का आश्वासन दिया है। जल्द ही दिशा के गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।