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सरसों की खरीद में मुनाफाखोरी, मालामाल हो रहे व्यापारी
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रायबरेली। आम आदमी ही नहीं, बल्कि सरसों की खेती करने वाला किसान भी महंगे दाम में सरसों का तेल खाने को मजबूर है। हकीकत यह है कि किसान सरसों की खेती करके लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं, वहीं व्यापारी सरसों खरीदकर मालामाल हो रहे हैं। ऐसा इसलिए है कि जिले में सरसों की खेती की बोआई का क्षेत्रफल हर साल कम हो रहा है। उत्पादन न होने के कारण सरसों के दाम आसमान छू रहे हैं। पांच साल पहले जिले में 14 से 15 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर किसान सरसों की बोआई करते थे। वर्ष 2021-22 में आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल की बोआई की गई। वर्ष 2020-21 में तो महज सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल की बोआई की गई थी।
अब सरसों की फसल कटकर किसानों के घर पहुंच गई है। अब किसान को उसकी फसल का उचित दाम मिलने का इंतजार है, लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर सरसों की खरीददारी न होने से किसान को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। इस समय बाजार में सरसों का भाव 6 हजार 300 रुपये प्रति क्विंटल है। इस समय पिपरमिंट की फसल खेत में लगाई जा रही है। अगले माह से धान की बेड़न डालने का काम शुरू होना है।
ऐसे में किसान को मजबूरन सरसों की बिक्री बाजारों में कर रहा है। अमूमन एक क्विंटल सरसों की पेराई में 35 से 40 किलो सरसों का तेल निकलता है, जिसे व्यापारी 200 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री बाजार में करते हैं। यही नहीं एक क्विंटल की सरसों की पेराई में करीब 60 किलो खरी निकलती है, जिसकी बिक्री भी व्यापारी 35 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से करते हैं। इससे व्यापारी किसान से खरीदे गए सरसों से दोगुना लाभ कमाता है। वहीं सरसों की बोआई, निराई-गुड़ाई और सिंचाई करने के बाद किसान को एक क्विंटल सरसों के महज छह हजार रुपये मिलते हैं।
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एक बीघे फसल में पांच हजार रुपये का आता खर्च
ऊंचाहार। क्षेत्र के किसान रत्नेश कुमार, सुशील कुमार मौर्य, राज प्रताप सिंह, अशोक मिश्रा कहते हैं कि सरसों की एक बीघे फसल में लगभग पांच हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन पैदावार के हिसाब से मुनाफा कम मिलता है, जबकि व्यापारी किसान से सरसों एक निश्चित दाम पर खरीद कर दोगुना मुनाफा कमाता है। सरसों की फसल की सरकारी खरीद न होने से व्यापारी औने-पौने दाम पर खरीदकर मुनाफा कमा रहा है, जबकि दिन रात मेहनत के बाद फसल पैदा करने वाला लाभ से वंचित रहता है।
इस बार बढ़ा सरसों की फसल का क्षेत्रफल
जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार सरसों की फसल का क्षेत्रफल बढ़ा है। उत्पादन भी हुआ है। वर्ष 2021-21 में सात हजार, जबकि वर्ष 2021-22 में आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल की बोवाई की गई थी। इस बार सरसों के फसल उत्पादन का कितना हुुआ है, इसका आंकलन कराया जा रहा है।
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अब सरसों की फसल कटकर किसानों के घर पहुंच गई है। अब किसान को उसकी फसल का उचित दाम मिलने का इंतजार है, लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर सरसों की खरीददारी न होने से किसान को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। इस समय बाजार में सरसों का भाव 6 हजार 300 रुपये प्रति क्विंटल है। इस समय पिपरमिंट की फसल खेत में लगाई जा रही है। अगले माह से धान की बेड़न डालने का काम शुरू होना है।
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ऐसे में किसान को मजबूरन सरसों की बिक्री बाजारों में कर रहा है। अमूमन एक क्विंटल सरसों की पेराई में 35 से 40 किलो सरसों का तेल निकलता है, जिसे व्यापारी 200 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री बाजार में करते हैं। यही नहीं एक क्विंटल की सरसों की पेराई में करीब 60 किलो खरी निकलती है, जिसकी बिक्री भी व्यापारी 35 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से करते हैं। इससे व्यापारी किसान से खरीदे गए सरसों से दोगुना लाभ कमाता है। वहीं सरसों की बोआई, निराई-गुड़ाई और सिंचाई करने के बाद किसान को एक क्विंटल सरसों के महज छह हजार रुपये मिलते हैं।
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एक बीघे फसल में पांच हजार रुपये का आता खर्च
ऊंचाहार। क्षेत्र के किसान रत्नेश कुमार, सुशील कुमार मौर्य, राज प्रताप सिंह, अशोक मिश्रा कहते हैं कि सरसों की एक बीघे फसल में लगभग पांच हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन पैदावार के हिसाब से मुनाफा कम मिलता है, जबकि व्यापारी किसान से सरसों एक निश्चित दाम पर खरीद कर दोगुना मुनाफा कमाता है। सरसों की फसल की सरकारी खरीद न होने से व्यापारी औने-पौने दाम पर खरीदकर मुनाफा कमा रहा है, जबकि दिन रात मेहनत के बाद फसल पैदा करने वाला लाभ से वंचित रहता है।
इस बार बढ़ा सरसों की फसल का क्षेत्रफल
जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार सरसों की फसल का क्षेत्रफल बढ़ा है। उत्पादन भी हुआ है। वर्ष 2021-21 में सात हजार, जबकि वर्ष 2021-22 में आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सरसों की फसल की बोवाई की गई थी। इस बार सरसों के फसल उत्पादन का कितना हुुआ है, इसका आंकलन कराया जा रहा है।