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इस बार आलू भंडारण घटा, आसमान छू रहीं कीमतें
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रायबरेली। हर घर में लगभग रोज इस्तेमाल किया जाने वाला आलू आज लोगों की थाली से दूर होता जा रहा है। इसकी आसमान छूती कीमतों के कारण सामान्य मध्य वर्ग के लोगों की पहुंच से यह दूर हो गया है। आलू के दाम में बढ़ोतरी की वजह इस बार कम भंडारण होना बताया जा रहा है।
पिछले साल की अपेक्षा इस बार आलू का भंडारण कम हुआ। जिस तरह आलू के दाम में इजाफा हो रहा है, उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में इसके दाम और बढ़ेंगे।
जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 35 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें हर साल आलूू का भंडारण किया जाता है। साल 2019 में दो लाख 44 हजार 510 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुुआ था। सभी कोल्ड स्टोरेज आलू से भर चुके थे।
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वर्ष 2020 में स्थिति इसके उलट है। इस बार महज 28 कोल्ड स्टोरेज में ही एक लाख 46 हजार 410 मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया है, जो पिछले साल से बहुत कम है।
खास बात ये है कि आलू की कमी से सात कोल्ड स्टोरेज में भंडारण का काम ही नहीं हुआ। इससे इन कोल्ड स्टोरेज संचालकों को नुकसान उठाना पड़ा। इसी की वजह से आलू मौजूदा समय में 35 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है।
सलोन को मिनी फर्रुखाबाद कहा जाता है। फर्रुखाबाद के बाद सलोन में सबसे ज्यादा आलू उत्पादन होता है। इस बार आलू उत्पादन सलोन क्षेत्र में कम हुआ। इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा कोल्ड स्टोरेज भी हैं। आलू उत्पादन की कमी की वजह से भंडारण में कमी आई और अब दाम बढ़ने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के किसान विकास तिवारी, फिरोज अहमद, राजेंद्र सिंह, फुरकान का कहना है कि इस बार आलू के सीजन में बीमारी की वजह से फसल बर्बाद हो गई थी। इस वजह से आलू का उत्पादन कम हुुआ था। आलू के दाम बढ़ने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पिछले साल की अपेक्षा इस बार जिले में आलू भंडारण कम हुुआ था। आलू के बढ़े दाम की यह मुख्य वजह है। किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू लेकर मंडी तक पहुंचा रहे हैं। बाहर से भी आलू जिले में आ रहा है। जल्द आलू के दाम में कमी हो जाएगी।- केशव राम चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी
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पिछले साल की अपेक्षा इस बार आलू का भंडारण कम हुआ। जिस तरह आलू के दाम में इजाफा हो रहा है, उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में इसके दाम और बढ़ेंगे।
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जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 35 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें हर साल आलूू का भंडारण किया जाता है। साल 2019 में दो लाख 44 हजार 510 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुुआ था। सभी कोल्ड स्टोरेज आलू से भर चुके थे।
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वर्ष 2020 में स्थिति इसके उलट है। इस बार महज 28 कोल्ड स्टोरेज में ही एक लाख 46 हजार 410 मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया है, जो पिछले साल से बहुत कम है।
खास बात ये है कि आलू की कमी से सात कोल्ड स्टोरेज में भंडारण का काम ही नहीं हुआ। इससे इन कोल्ड स्टोरेज संचालकों को नुकसान उठाना पड़ा। इसी की वजह से आलू मौजूदा समय में 35 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है।
सलोन को मिनी फर्रुखाबाद कहा जाता है। फर्रुखाबाद के बाद सलोन में सबसे ज्यादा आलू उत्पादन होता है। इस बार आलू उत्पादन सलोन क्षेत्र में कम हुआ। इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा कोल्ड स्टोरेज भी हैं। आलू उत्पादन की कमी की वजह से भंडारण में कमी आई और अब दाम बढ़ने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के किसान विकास तिवारी, फिरोज अहमद, राजेंद्र सिंह, फुरकान का कहना है कि इस बार आलू के सीजन में बीमारी की वजह से फसल बर्बाद हो गई थी। इस वजह से आलू का उत्पादन कम हुुआ था। आलू के दाम बढ़ने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पिछले साल की अपेक्षा इस बार जिले में आलू भंडारण कम हुुआ था। आलू के बढ़े दाम की यह मुख्य वजह है। किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू लेकर मंडी तक पहुंचा रहे हैं। बाहर से भी आलू जिले में आ रहा है। जल्द आलू के दाम में कमी हो जाएगी।- केशव राम चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी