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स्मृति ने दिखाया अपनत्व, प्रोटोकॉल बिना पहुंचीं दिवंगत एमएलए के घर, परिवार को बंधाया ढांढस
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रायबरेली। अमेठी सांसद स्मृति ईरानी बिना प्रोटोकॉल के ही शनिवार को दिवंगत विधायक दल बहादुर कोरी के दरवाजे पर पहुंच गईं। उन्हें अचानक सामने देख वहां मौजूद लोग और दिवंगत एमएलए का परिवार भौचक था।
न सुरक्षा का तामझाम था और उनके साथ चलने वाली गाड़ियों का काफिला था। महज दो गाड़ियों से ही स्मृति अपने कुछ पदाधिकारियों के साथ विधायक के गांव पहुंचीं। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया।
भाजपा विधायक दल बहादुर कोरी का अचानक शुक्रवार को निधन हो गया था। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें एसजीपीजीआई से डिस्चार्ज कर दिया गया था लेकिन फिर से तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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शुक्रवार को अंतिम संस्कार के बाद शनिवार सुबह अचानक स्मृति ईरानी बिना प्रोटोकॉल के ही दिवंगत एमएलए के घर पहुंच गईं। उनके घर पहुंचने की जानकारी पुलिस-प्रशासन तक को नहीं चली।
उनके काफिले में महज दो गाड़ियां थी। सुरक्षा का कोई तामझाम नहीं था। भीड़ भी नहीं थी। स्मृति ईरानी करीब 45 मिनट तक दिवंगत एमएलए के घर पर रहीं। इस दौरान वह भावुक हुईं। दिवंगत एमएलए की पत्नी राजकुमारी गले लगाया।
वह रोने लगी तो स्मृति ने उनके आंसू पोंछे और धैर्य बंधाया। इस दौरान स्मृति यह बता नहीं भूली कि अमेठी संसदीय क्षेत्र की जनता उनके परिवार का हिस्सा है। यहां के लोगों से उनका दिली रिश्ता है।
स्मृति की जीत में निभाई थी अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत में दिवंगत एमएलए दल बहादुर कोरी ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उनके चुनाव में खूब प्रचार किया था। दिल्ली में भी रहकर स्मृति ईरानी एमएलए से क्षेत्र के विकास पर चर्चा किया करती थीं।
स्मृति के साथ साझा करते थे मंच
दिवंगत एमएलए की दमदार कार्यशैली और एक अच्छे वक्ता के रूप में पहचान थी। जब स्मृति ईरानी का अमेठी संसदीय क्षेत्र में दौरा लगता था, दिवंगत एमएलए उनके साथ मंच साझा किया करते थे। मंच से दल बहादुर कोरी भाषण देकर विरोधी खेमे में हलचल पैदा करते थे। राजनीति की सीढ़ियों पर चढ़कर लोगों के बीच दल बहादुर कोरी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी।
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न सुरक्षा का तामझाम था और उनके साथ चलने वाली गाड़ियों का काफिला था। महज दो गाड़ियों से ही स्मृति अपने कुछ पदाधिकारियों के साथ विधायक के गांव पहुंचीं। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया।
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भाजपा विधायक दल बहादुर कोरी का अचानक शुक्रवार को निधन हो गया था। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें एसजीपीजीआई से डिस्चार्ज कर दिया गया था लेकिन फिर से तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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शुक्रवार को अंतिम संस्कार के बाद शनिवार सुबह अचानक स्मृति ईरानी बिना प्रोटोकॉल के ही दिवंगत एमएलए के घर पहुंच गईं। उनके घर पहुंचने की जानकारी पुलिस-प्रशासन तक को नहीं चली।
उनके काफिले में महज दो गाड़ियां थी। सुरक्षा का कोई तामझाम नहीं था। भीड़ भी नहीं थी। स्मृति ईरानी करीब 45 मिनट तक दिवंगत एमएलए के घर पर रहीं। इस दौरान वह भावुक हुईं। दिवंगत एमएलए की पत्नी राजकुमारी गले लगाया।
वह रोने लगी तो स्मृति ने उनके आंसू पोंछे और धैर्य बंधाया। इस दौरान स्मृति यह बता नहीं भूली कि अमेठी संसदीय क्षेत्र की जनता उनके परिवार का हिस्सा है। यहां के लोगों से उनका दिली रिश्ता है।
स्मृति की जीत में निभाई थी अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत में दिवंगत एमएलए दल बहादुर कोरी ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उनके चुनाव में खूब प्रचार किया था। दिल्ली में भी रहकर स्मृति ईरानी एमएलए से क्षेत्र के विकास पर चर्चा किया करती थीं।
स्मृति के साथ साझा करते थे मंच
दिवंगत एमएलए की दमदार कार्यशैली और एक अच्छे वक्ता के रूप में पहचान थी। जब स्मृति ईरानी का अमेठी संसदीय क्षेत्र में दौरा लगता था, दिवंगत एमएलए उनके साथ मंच साझा किया करते थे। मंच से दल बहादुर कोरी भाषण देकर विरोधी खेमे में हलचल पैदा करते थे। राजनीति की सीढ़ियों पर चढ़कर लोगों के बीच दल बहादुर कोरी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी।