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अब भी दावेदारों को सीट बचने की आस, महंगा पड़ सकता है चुनाव
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रायबरेली। हाईकोर्ट के आदेश पर निरस्त हुई आरक्षण प्रक्रिया ने धुरंधरों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। सोशल मीडिया के साथ ही क्षेत्र में घृूम-घूमकर फिजा बनाने में जुटे जिला पंचायत सदस्य पदों के संभावित दावेदारों ने मुंह की खाई है।
कई दावेदार तो पहली बार मैदान में उतरे और झटका लग गया। कुछ दावेदारों को अब भी सीट बचने की आस है तो तमाम नए ठौर की तलाश में जुट गए हैं। बस शासन से आरक्षण से संबंधित नई गाइडलाइन आने का इंतजार कर रहे हैं।
तीन मार्च को 988 ग्राम प्रधानों, 52 जिला पंचायत सदस्यों, 1,301 क्षेत्र पंचायत सदस्यों और 12,419 ग्राम पंचायत सदस्यों की सीटों के आरक्षण की प्रस्तावित सूची जारी होने के बाद आई आपत्तियों के निस्तारण का काम चल ही रहा था कि हाईकोर्ट ने आरक्षण की अंतिम सूची को जारी करने पर रोक लगाने के साथ ही वर्ष 1995 के आरक्षण के आधार पर चल रही आरक्षण प्रक्रिया को निरस्त ही कर दिया। आरक्षण प्रक्रिया पर विराम लगते ही सीटों पर दावेदारी ठोकने वाले धुरंधरों के मंसूबों पर पानी फिर गया।
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दावेदारो ने पोस्टर, बैनर होर्डिंग्स आदि के माध्यम से खूब प्रचार किया। यहां तक सोशल मीडिया का भी जमकर प्रयोग किया, लेकिन एक ही झटके से दावेदारों के सपने ध्वस्त हो गए। लेकिन अब भी तमाम दावेदारों को सीट बचने की आस है। हालांकि आरक्षण प्रक्रिया को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
होटलों, ढाबों पर सीटों को लेकर कयासबाजी
शासन स्तर से भले ही अब तक आरक्षण के संबंध में गाइडलाइन उपलब्ध नहीं कराई गई है, लेकिन मंगलवार को दिनभर होटलों और ढाबों पर लोगों ने सीटों को लेकर आरक्षण तय किए। कोई पूरी तरह से कनफर्म होकर सीट आरक्षित या अनारक्षित होने का दावा कर रहा था तो कोई एक-एक सीट को लेकर बहस कर रहा था। अब तक दावेदारी करने वाले धुरंधरों को लगे झटके को लेकर लोग चुस्कियां भी ले रहे हैं। हालांकि दिन भी सीटों के आरक्षण को लेकर बाजार गर्म रहा।
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कई दावेदार तो पहली बार मैदान में उतरे और झटका लग गया। कुछ दावेदारों को अब भी सीट बचने की आस है तो तमाम नए ठौर की तलाश में जुट गए हैं। बस शासन से आरक्षण से संबंधित नई गाइडलाइन आने का इंतजार कर रहे हैं।
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तीन मार्च को 988 ग्राम प्रधानों, 52 जिला पंचायत सदस्यों, 1,301 क्षेत्र पंचायत सदस्यों और 12,419 ग्राम पंचायत सदस्यों की सीटों के आरक्षण की प्रस्तावित सूची जारी होने के बाद आई आपत्तियों के निस्तारण का काम चल ही रहा था कि हाईकोर्ट ने आरक्षण की अंतिम सूची को जारी करने पर रोक लगाने के साथ ही वर्ष 1995 के आरक्षण के आधार पर चल रही आरक्षण प्रक्रिया को निरस्त ही कर दिया। आरक्षण प्रक्रिया पर विराम लगते ही सीटों पर दावेदारी ठोकने वाले धुरंधरों के मंसूबों पर पानी फिर गया।
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दावेदारो ने पोस्टर, बैनर होर्डिंग्स आदि के माध्यम से खूब प्रचार किया। यहां तक सोशल मीडिया का भी जमकर प्रयोग किया, लेकिन एक ही झटके से दावेदारों के सपने ध्वस्त हो गए। लेकिन अब भी तमाम दावेदारों को सीट बचने की आस है। हालांकि आरक्षण प्रक्रिया को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
होटलों, ढाबों पर सीटों को लेकर कयासबाजी
शासन स्तर से भले ही अब तक आरक्षण के संबंध में गाइडलाइन उपलब्ध नहीं कराई गई है, लेकिन मंगलवार को दिनभर होटलों और ढाबों पर लोगों ने सीटों को लेकर आरक्षण तय किए। कोई पूरी तरह से कनफर्म होकर सीट आरक्षित या अनारक्षित होने का दावा कर रहा था तो कोई एक-एक सीट को लेकर बहस कर रहा था। अब तक दावेदारी करने वाले धुरंधरों को लगे झटके को लेकर लोग चुस्कियां भी ले रहे हैं। हालांकि दिन भी सीटों के आरक्षण को लेकर बाजार गर्म रहा।