{"_id":"602ea6228ebc3ee8f36f520c","slug":"political-raibaraily-news-lko5655303158","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांधी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का किया था काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांधी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का किया था काम
विज्ञापन
लोगों के साथ बैठक करते पूर्व मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा। (फाइल फोटो)।
- फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा के काम हमेशा लोगाें को उनकी याद दिलाते रहेंगे। उन्होंने न सिर्फ यहां की जनता से भावनात्मक रिश्ता जोड़ा बल्कि, उन्हें अपने परिवार का हिस्सा भी माना।
यहां से चुनाव लड़कर न सिर्फ गांधी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया, बल्कि लोगों के दिलों में पैठ भी बनाई। एक दौर था, जब गांधी परिवार अपने गढ़ से दूर था। तब वर्ष 1999 में उन्हें रायबरेली से लोकसभा चुनाव का चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने भारी अंतर से जीत दर्ज की।
कैप्टन सतीश शर्मा ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों को अपनी सांसद निधि से पैसा दिया। उनके ही प्रयास से यहां इंजीनियरिंग के लिए एफजीआईईटी की स्थापना कराई गई। निफ्ट, नाइपर जैसे उच्च शिक्षण संस्थान खुलवाने में भी कैप्टन सतीश शर्मा का अहम योगदान रहा।
विज्ञापन
कुछ लोग उन्हें जनपद रायबरेली के लिए मदन मोहन मालवीय भी मानते थे। कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी कहते हैं कि पूर्व मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा रायबरेली और अमेठी को अपना परिवार मानते थे। उनके काल में विकास का कारवां काफी तेजी से दौड़ा। गांधी परिवार के बेहद करीबी होने के नाते विकास कार्य पर ही अक्सर चर्चा किया करते थे। उनका जाना हम सबके लिए कष्टदायी है।
अपने लोगों का रखते थे ख्याल
समाजसेवी एवं वरिष्ठ कांग्रेसी जगदीश शुक्ल कहते हैं कि पूर्व कैप्टन सतीश शर्मा अपने लोगों का विशेष ख्याल रखते थे। दिल्ली से यहां आने पर गेस्ट हाउस में लोगों के साथ बैठक करके पहले उनकी कुशलक्षेम पूछते थे। इसके बाद विकास के मुद्दे पर चर्चा करते थे। उनके निधन से हर कोई दुखी है।
दौलतपुर गांव से था बेहद लगाव
स्व. कैप्टन सतीश शर्मा का हिंदी के पुरोधा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के पैतृक गांव दौलतपुर से बेहद लगाव था। जिला कांग्रेस कमेटी के जिला प्रवक्ता विनय द्विवेदी कहते हैं कि महावीर प्रसाद द्विवेदी के पैतृक गांव में उनके नाम से तोरणद्वार बनवाने के लिए कैप्टन सतीश शर्मा ने अपनी निधि से पैसा दिया था।
विज्ञापन
यहां से चुनाव लड़कर न सिर्फ गांधी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया, बल्कि लोगों के दिलों में पैठ भी बनाई। एक दौर था, जब गांधी परिवार अपने गढ़ से दूर था। तब वर्ष 1999 में उन्हें रायबरेली से लोकसभा चुनाव का चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने भारी अंतर से जीत दर्ज की।
विज्ञापन
कैप्टन सतीश शर्मा ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों को अपनी सांसद निधि से पैसा दिया। उनके ही प्रयास से यहां इंजीनियरिंग के लिए एफजीआईईटी की स्थापना कराई गई। निफ्ट, नाइपर जैसे उच्च शिक्षण संस्थान खुलवाने में भी कैप्टन सतीश शर्मा का अहम योगदान रहा।
विज्ञापन
कुछ लोग उन्हें जनपद रायबरेली के लिए मदन मोहन मालवीय भी मानते थे। कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी कहते हैं कि पूर्व मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा रायबरेली और अमेठी को अपना परिवार मानते थे। उनके काल में विकास का कारवां काफी तेजी से दौड़ा। गांधी परिवार के बेहद करीबी होने के नाते विकास कार्य पर ही अक्सर चर्चा किया करते थे। उनका जाना हम सबके लिए कष्टदायी है।
अपने लोगों का रखते थे ख्याल
समाजसेवी एवं वरिष्ठ कांग्रेसी जगदीश शुक्ल कहते हैं कि पूर्व कैप्टन सतीश शर्मा अपने लोगों का विशेष ख्याल रखते थे। दिल्ली से यहां आने पर गेस्ट हाउस में लोगों के साथ बैठक करके पहले उनकी कुशलक्षेम पूछते थे। इसके बाद विकास के मुद्दे पर चर्चा करते थे। उनके निधन से हर कोई दुखी है।
दौलतपुर गांव से था बेहद लगाव
स्व. कैप्टन सतीश शर्मा का हिंदी के पुरोधा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के पैतृक गांव दौलतपुर से बेहद लगाव था। जिला कांग्रेस कमेटी के जिला प्रवक्ता विनय द्विवेदी कहते हैं कि महावीर प्रसाद द्विवेदी के पैतृक गांव में उनके नाम से तोरणद्वार बनवाने के लिए कैप्टन सतीश शर्मा ने अपनी निधि से पैसा दिया था।