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Raebareli News: पाॅलिसी पूरी होते ही थमा दिया एक लाख का पेंशन प्लान
Mon, 07 Apr 2025 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 07 Apr 2025 01:01 AM IST
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रायबरेली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मुकदमे की सुनवाई में भारतीय जीवन बीमा निगम को दोषी करार दिया है। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने पालिसी पूरी होने के बाद बीमाधारक को भुगतान न देकर उसकी एक लाख रुपये की रकम को पेंशन प्लान में लगा दिया। इसके लिए बीमा कंपनी ने वादी से सहमति और स्वीकृत नहीं ली। आयोग ने बीमा कंपनी को 82,400 रुपये का भुगतान वादी को करने का आदेश दिया है।
जगतपुर थाना क्षेत्र के केवलपुर बरेथा निवासी राजेंद्र प्रताप पुत्र रामधनी ने 26 अगस्त 2010 को भारतीय जीवन बीमा निगम से मार्केट प्लस फर्स्ट बीमा पालिसी 10 साल के लिए ली थी। 21 अगस्त 2020 को पालिसी पूरी होनी थी। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं दिया। आरोप लगाया कि 14 सितंबर 2020 को बीमा कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया तो पता चला कि बीमा पालिसी में भुगतान के रूप में मिलने वाली एक लाख रुपये की धनराशि पेंशन प्लान में लगा दी गई है।
बार-बार अनुरोध करने के बाद भी पालिसी का भुगतान न मिलने पर परिवादी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर कर दिया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष मदन लाल निगम और सदस्य प्रतिमा सिंह ने पाया कि पेंशन पालिसी में भुगतान की धनराशि लगाने से पहले वादी से सहमति नहीं ली गई। अपनी ओर से पेंशन प्लान में धनराशि को लगाना गलत है।
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आयोग ने दोषी करार करते हुए बीमा कंपनी को 82,400 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी ने वादी के खाते में 17600 रुपये मात्र भेजे थे। आयोग ने मानसिक क्षतिपूर्ति में दो हजार व वाद व्यय में एक हजार अलग से देने के आदेश दिए हैं। 45 दिन में भुगतान न देने पर बीमा कंपनी को सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।
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जगतपुर थाना क्षेत्र के केवलपुर बरेथा निवासी राजेंद्र प्रताप पुत्र रामधनी ने 26 अगस्त 2010 को भारतीय जीवन बीमा निगम से मार्केट प्लस फर्स्ट बीमा पालिसी 10 साल के लिए ली थी। 21 अगस्त 2020 को पालिसी पूरी होनी थी। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं दिया। आरोप लगाया कि 14 सितंबर 2020 को बीमा कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया तो पता चला कि बीमा पालिसी में भुगतान के रूप में मिलने वाली एक लाख रुपये की धनराशि पेंशन प्लान में लगा दी गई है।
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बार-बार अनुरोध करने के बाद भी पालिसी का भुगतान न मिलने पर परिवादी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर कर दिया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष मदन लाल निगम और सदस्य प्रतिमा सिंह ने पाया कि पेंशन पालिसी में भुगतान की धनराशि लगाने से पहले वादी से सहमति नहीं ली गई। अपनी ओर से पेंशन प्लान में धनराशि को लगाना गलत है।
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आयोग ने दोषी करार करते हुए बीमा कंपनी को 82,400 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी ने वादी के खाते में 17600 रुपये मात्र भेजे थे। आयोग ने मानसिक क्षतिपूर्ति में दो हजार व वाद व्यय में एक हजार अलग से देने के आदेश दिए हैं। 45 दिन में भुगतान न देने पर बीमा कंपनी को सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।