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मंदिरों से भी लक्ष्मी रूठीं

Fri, 18 Nov 2016 12:14 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Fri, 18 Nov 2016 12:14 AM IST
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People are not paying money at the temples
मंदिर - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी का असर मंदिर की दान पेटिकाओं पर भी पड़ा है। जिन मंदिरों में रोजाना एक हजार चढ़ावा आता था, आज वहां बमुश्किल 100-200 रुपये ही आ रहा है। इससे जहां पुजारियों को मंदिर के रखरखाव में दिक्कत आ रही है। वहीं मंदिर के कामगारों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। 
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शहर के मनसा देवी मंदिर के पुजारी पुत्तीलाल शुक्ला का कहना है कि शादी-ब्याह के मौके पर मंदिर में लोग 1000-500 रुपये के नोट दान में देते थे। इस बार भी शादी के बाद कई नवविवाहित जोड़े आए तो लेकिन दक्षिणा में 51 व 101 ही मिले क्योंकि नोट बंदी के चलते वे छोटे नोटों को अपने खर्च के लिए बचाकर रखना चाहते हैं।
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मंदिर के चढ़ावे में काफी कमी आई है। इससे रखरखाव में दिक्कत हो रही है। बछरावां क्षेत्र के प्रसिद्ध चुरुआ हनुमान मंदिर केपुजारी चंद्रमणि अवस्थी ने बताया कि जब से 1000 व 500 का नोट बंद हो गया है तब से मंदिर पर आने वाले श्रद्धालु भी मंदिर के चढ़ावे में कटौती करने लगे हैं।
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अब 100, 50, 20 व 10 के नोटों को लोग जरूरी खर्चों के लिए बचाकर रख रहे हैं । इससे चढ़ावे में कमी होने के कारण रखरखाव में दिक्कत हो रही है। सिंहपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध अहोरवा भवानी मंदिर के पुजारी पं. शिवशंकर ने बताया कि नोट बंदी के बाद से चढ़ावे में खासी कमी आ गई है।

भक्त नगदी की जगह फल-फूल आदि चढ़ाने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। पहले इस मंदिर में आने सभी भक्त कम से कम 501 का चढ़ावा मां के चरणों में रखते थे। अब वे मात्र फूल चढ़ाकर चले जाते हैं। इससे मंदिर के खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। 


डीह क्षेत्र के टेकारी गांव स्थित पंचवटी हनुमान मंदिर के पुजारी पं. चक्रधर शास्त्री की वे मंदिर सेवा के साथ लोगों के यहां धार्मिक अनुष्ठान भी करवाते हैं। नोट बंदी के चलते अब मंदिर में तो चढ़ावा कम हुआ ही है धार्मिक अनुष्ठान में कम दक्षिणा मिल रही है।

कुछ जगहों पर तो लोग दक्षिणा में अनाज दे रहे हैं। नगदी बहुत कम मिल रही है। जो मिल भी रही है वह 11, 21 से अधिक नहीं होती हैं।
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