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पांच बियरिंग डैमेज, ओवरब्रिज बनने में लगेगा करीब एक माह का समय
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रायबरेली। शहर क्षेत्र के मलिकमऊ के निकट रेलवे लाइन पर बने ओवरब्रिज के दरक जाने के मामले की जांच शुरू हो गई है। दिल्ली से आए एक्सपर्ट की शुरुआती जांच में पाया गया है कि ओवरब्रिज में लगी पांच बेयरिंग डैमेज हो गई हैं। बेयरिंग बदले बिना इस ओवरब्रिज पर आवागमन शुरू नहीं किया जा सकता। हालांकि दिल्ली से आए एक्सपर्ट की जांच अभी चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही तय रणनीति के तहत बेयरिंग बदलने का काम शुरू हो सकेगा।
बेयरिंग जल्द मिल गई तो दो सप्ताह में ओवरब्रिज के मरम्मत का कार्य पूरा करा दिया जाएगा। यदि बेयरिंग नहीं मिल पाई तो दरके ओवरब्रिज से आवागमन शुरू करने में एक माह का समय लग सकता है। रायबरेली-टांडा हाईवे पर इस ओवरब्रिज का निर्माण दो साल पहले हुआ था। अचानक शनिवार की रात ओवरब्रिज में दरार आने से एचएनएआई के अफसरों में हड़कंप मच गया था। ओवरब्रिज से आवागमन ठप करा दिया गया है। सोमवार की देर शाम दिल्ली से एक टीम यहां पहुंच गई।
एनएचएआई के अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद टीम ओवरब्रिज पहुंची और यहां पर नापजोख करने के बाद तकनीकी जांच की। मंगलवार को भी दिल्ली से आए एक्सपर्ट ने दरके ओवरब्रिज की जांच की। दिल्ली से आई टीम ने शुरुआती जांच में पाया कि ओवरब्रिज में 10 बेयरिंग लगाई गई हैं। सबसे पहले रायबरेली साइड से जाने पर पुल की दाहिनी साइड की बेयरिंग घूमी थी। इसके बाद चार अन्य बेयरिंग भी घूम गई। जिसका नतीजा रहा कि ओवरब्रिज दरक गया।
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अधिकारियों के मुताबिक जिस कंपनी से ओवरब्रिजों की बेयरिंग की आपूर्ति की जाती है, उसके पास इस साइज की बेयरिंग यदि मौजूद होंगी तो पुल को चालू करने में करीब दो सप्ताह का समय लग जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुुआ तो ओवरब्रिज के मरम्मत कार्य पूरा करने में एक माह का समय लग जाएगा। यह हाल तब है, जब आवागमन बंद किए जाने से हर दिन एक लाख लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दरके ओवरब्रिज की पूरी जांच के बाद ही तय हो पाएगा कि मरम्मत का कार्य कैसे कराया जाएगा।
भारीभरकम बजट खर्च करने के बाद ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कराया गया था। साथ ही इस ओवरब्रिज का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराया गया था। दो साल में ही ओवरब्रिज के दरक जाने के बाद निर्माण कार्य पर सवाल उठ रहे हैं। जाहिर सी बात है कि ओवरब्रिज निर्माण में कार्यदायी संस्था से लेकर विभागीय अधिकारियों ने जमकर खेल किया। ओवरब्रिज दरक जाने के बाद मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ अब तक कार्रवाई न किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जिला प्रशासन के अफसर से लेकर संबंधित विभाग के अधिकारी सिर्फ ओवरब्रिज की मरम्मत का कार्य जल्द कराने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई को लेकर सब चुप्पी साधे हैं। बस जवाब मांगने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में लगता नहीं कि जिम्मेदारों पर इस मामले में कार्रवाई भी हो पाएगी।
टीम कर रही जांच
दिल्ली से आई टीम दरके ओवरब्रिज की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में ओवरब्रिज में लगी 10 में से पांच बेयरिंग डैमेज पाई गई हैं। यदि बेयरिंग जल्द मिल जाएंगी तो ओवरब्रिज के मरम्मत का कार्य जल्द पूरा हो जाएगा। जल्द नहीं मिल पाई तो करीब एक माह का समय ओवरब्रिज के मरम्मत कार्य में लगेगा। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है कि जितनी जल्दी हो सके, ओवरब्रिज का मरम्मत कार्य कराकर आवागमन शुरू किया जाएगा।
समर सिंह, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई
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बेयरिंग जल्द मिल गई तो दो सप्ताह में ओवरब्रिज के मरम्मत का कार्य पूरा करा दिया जाएगा। यदि बेयरिंग नहीं मिल पाई तो दरके ओवरब्रिज से आवागमन शुरू करने में एक माह का समय लग सकता है। रायबरेली-टांडा हाईवे पर इस ओवरब्रिज का निर्माण दो साल पहले हुआ था। अचानक शनिवार की रात ओवरब्रिज में दरार आने से एचएनएआई के अफसरों में हड़कंप मच गया था। ओवरब्रिज से आवागमन ठप करा दिया गया है। सोमवार की देर शाम दिल्ली से एक टीम यहां पहुंच गई।
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एनएचएआई के अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद टीम ओवरब्रिज पहुंची और यहां पर नापजोख करने के बाद तकनीकी जांच की। मंगलवार को भी दिल्ली से आए एक्सपर्ट ने दरके ओवरब्रिज की जांच की। दिल्ली से आई टीम ने शुरुआती जांच में पाया कि ओवरब्रिज में 10 बेयरिंग लगाई गई हैं। सबसे पहले रायबरेली साइड से जाने पर पुल की दाहिनी साइड की बेयरिंग घूमी थी। इसके बाद चार अन्य बेयरिंग भी घूम गई। जिसका नतीजा रहा कि ओवरब्रिज दरक गया।
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अधिकारियों के मुताबिक जिस कंपनी से ओवरब्रिजों की बेयरिंग की आपूर्ति की जाती है, उसके पास इस साइज की बेयरिंग यदि मौजूद होंगी तो पुल को चालू करने में करीब दो सप्ताह का समय लग जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुुआ तो ओवरब्रिज के मरम्मत कार्य पूरा करने में एक माह का समय लग जाएगा। यह हाल तब है, जब आवागमन बंद किए जाने से हर दिन एक लाख लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दरके ओवरब्रिज की पूरी जांच के बाद ही तय हो पाएगा कि मरम्मत का कार्य कैसे कराया जाएगा।
भारीभरकम बजट खर्च करने के बाद ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कराया गया था। साथ ही इस ओवरब्रिज का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराया गया था। दो साल में ही ओवरब्रिज के दरक जाने के बाद निर्माण कार्य पर सवाल उठ रहे हैं। जाहिर सी बात है कि ओवरब्रिज निर्माण में कार्यदायी संस्था से लेकर विभागीय अधिकारियों ने जमकर खेल किया। ओवरब्रिज दरक जाने के बाद मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ अब तक कार्रवाई न किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जिला प्रशासन के अफसर से लेकर संबंधित विभाग के अधिकारी सिर्फ ओवरब्रिज की मरम्मत का कार्य जल्द कराने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई को लेकर सब चुप्पी साधे हैं। बस जवाब मांगने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में लगता नहीं कि जिम्मेदारों पर इस मामले में कार्रवाई भी हो पाएगी।
टीम कर रही जांच
दिल्ली से आई टीम दरके ओवरब्रिज की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में ओवरब्रिज में लगी 10 में से पांच बेयरिंग डैमेज पाई गई हैं। यदि बेयरिंग जल्द मिल जाएंगी तो ओवरब्रिज के मरम्मत का कार्य जल्द पूरा हो जाएगा। जल्द नहीं मिल पाई तो करीब एक माह का समय ओवरब्रिज के मरम्मत कार्य में लगेगा। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है कि जितनी जल्दी हो सके, ओवरब्रिज का मरम्मत कार्य कराकर आवागमन शुरू किया जाएगा।
समर सिंह, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई