{"_id":"619698f02bf92073f33d51b7","slug":"outcry-over-medicines-in-hospitals-25-not-essential-medicines-raibaraily-news-lko605050125","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पतालों में दवाओं को लेकर हाहाकार, 25 जरूरी दवाएं नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पतालों में दवाओं को लेकर हाहाकार, 25 जरूरी दवाएं नहीं
विज्ञापन
रायबरेली। जिले के सरकारी अस्पताल जरूरी दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। कॉर्पोरेशन स्तर से डिमांड के बाद भी करीब 25 तरह की दवाएं खत्म हो गईं हैं। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यहां तक कि सीएचसी में भर्ती होने वाले मरीजों को लगने वाले सभी इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं हैं। बुखार, सांस रोग, एलर्जी, ब्लड प्रेशर, दर्द, ताकत, गैस आदि की दवा नहीं हैं। मरीजों को रोजाना लाखों रुपये की दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
जिले में डेंगू और जुकाम-बुखार का कहर बढ़ गया है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के साथ ही अस्पतालों में मरीजों को दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। कॉर्पोरेशन से सीधे अस्पतालों को दवाओं की आपूर्ति होने के बाद दवाओं की किल्लत बढ़ गई है।
विज्ञापन
ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में बुखार के लिए सबसे जरूरी पैरासीटामॉल टैबलेट तक खत्म हो चुकी है। इसके अलावा चोट में लगने वाली क्रीम भी नहीं मिल पा रही है। कहीं मरीजों को दो तो कहीं तीन दवाएं देकर वापस लौटाया जा रहा है।
डॉक्टर खुलेआम मरीजों को बाजार से दवाएं लिख रहे हैं। हर रोज कई लाख रुपये की दवाएं मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
बताते हैं कि दवाओं की उपलब्धता के लिए कई बार डिमांड की गई, लेकिन कॉर्पोरेशन से जिले को दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। पैरासीटामॉल की करीब 10 लाख टैबलेट मांगी गई है, लेकिन अब तक एक गोली तक नहीं मिली है। अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों के इलाज के लिए भी बाजार से ही दवाई मंगवानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में भी आने वाले मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसका खामियाजा मरीजों को ही भोगना पड़ रहा है।
जिले में इन दवाओं की भारी किल्लत
जिले में वर्तमान समय में बीमारियों के लिए जरूरी टैबलेट इब्रूफेन, पैरासीटामॉल, सेटिजिन, कैल्शियम, सोडियम वोल्पोरेट, निफेडिपिन, जेली निग्नोसीन, इयर ड्राप क्लोरामफेनिकल, प्रोवोडीन ऑइनमेंट व लोशन, डाइक्लोफिनैक ऑइनमेंट, इंजेक्शन डाइक्लोफिनैक, ट्रॉमाडॉल, विटामिन-के, आक्सीटोसिन, रेनीटिडीन, डाइक्लोमाइन, डोमामाइन, पेंटजोसिन, रिंगर लैक्टेट, सोडियम क्लोराइड, एड्रेनालिन सहित करीब 25 जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। दवाएं न मिल पाने के कारण मरीजों के इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों को थमा रहे बाजार की दवाओं की परची
शहर के राजघाट निवासी अफजाल अंसारी, फुरसतगंज निवासी नीलू कुमार, मलिकमऊ निवासी अमित कुमार, किलाबाजार निवासी अनीसा और मुंशीगंज निवासी अमन साहू गुरुवार को जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आए। सभी को ओपीडी में अस्पताल की कुछ दवाओं के साथ ही बाजार से खरीदने के लिए दवा की परची थमा दी गई।
मरीजों को बताया गया कि दवाओं की कमी के कारण बाजार से दवाएं खरीदना ही पड़ेगा। मरीजों का कहना है कि एक-दो दवाओं के अलावा शेष दवाएं बाजार से ही खरीदनी पड़ रही है। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
दवाओं की समस्या को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। अस्पतालों को सीधे कॉर्पोरेशन से दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि दवाओं की किल्लत को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। जरूरी दवाओं की उपलब्धता का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
यहां तक कि सीएचसी में भर्ती होने वाले मरीजों को लगने वाले सभी इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं हैं। बुखार, सांस रोग, एलर्जी, ब्लड प्रेशर, दर्द, ताकत, गैस आदि की दवा नहीं हैं। मरीजों को रोजाना लाखों रुपये की दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
विज्ञापन
जिले में डेंगू और जुकाम-बुखार का कहर बढ़ गया है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के साथ ही अस्पतालों में मरीजों को दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। कॉर्पोरेशन से सीधे अस्पतालों को दवाओं की आपूर्ति होने के बाद दवाओं की किल्लत बढ़ गई है।
विज्ञापन
ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में बुखार के लिए सबसे जरूरी पैरासीटामॉल टैबलेट तक खत्म हो चुकी है। इसके अलावा चोट में लगने वाली क्रीम भी नहीं मिल पा रही है। कहीं मरीजों को दो तो कहीं तीन दवाएं देकर वापस लौटाया जा रहा है।
डॉक्टर खुलेआम मरीजों को बाजार से दवाएं लिख रहे हैं। हर रोज कई लाख रुपये की दवाएं मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
बताते हैं कि दवाओं की उपलब्धता के लिए कई बार डिमांड की गई, लेकिन कॉर्पोरेशन से जिले को दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। पैरासीटामॉल की करीब 10 लाख टैबलेट मांगी गई है, लेकिन अब तक एक गोली तक नहीं मिली है। अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों के इलाज के लिए भी बाजार से ही दवाई मंगवानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में भी आने वाले मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसका खामियाजा मरीजों को ही भोगना पड़ रहा है।
जिले में इन दवाओं की भारी किल्लत
जिले में वर्तमान समय में बीमारियों के लिए जरूरी टैबलेट इब्रूफेन, पैरासीटामॉल, सेटिजिन, कैल्शियम, सोडियम वोल्पोरेट, निफेडिपिन, जेली निग्नोसीन, इयर ड्राप क्लोरामफेनिकल, प्रोवोडीन ऑइनमेंट व लोशन, डाइक्लोफिनैक ऑइनमेंट, इंजेक्शन डाइक्लोफिनैक, ट्रॉमाडॉल, विटामिन-के, आक्सीटोसिन, रेनीटिडीन, डाइक्लोमाइन, डोमामाइन, पेंटजोसिन, रिंगर लैक्टेट, सोडियम क्लोराइड, एड्रेनालिन सहित करीब 25 जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। दवाएं न मिल पाने के कारण मरीजों के इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों को थमा रहे बाजार की दवाओं की परची
शहर के राजघाट निवासी अफजाल अंसारी, फुरसतगंज निवासी नीलू कुमार, मलिकमऊ निवासी अमित कुमार, किलाबाजार निवासी अनीसा और मुंशीगंज निवासी अमन साहू गुरुवार को जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए आए। सभी को ओपीडी में अस्पताल की कुछ दवाओं के साथ ही बाजार से खरीदने के लिए दवा की परची थमा दी गई।
मरीजों को बताया गया कि दवाओं की कमी के कारण बाजार से दवाएं खरीदना ही पड़ेगा। मरीजों का कहना है कि एक-दो दवाओं के अलावा शेष दवाएं बाजार से ही खरीदनी पड़ रही है। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
दवाओं की समस्या को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। अस्पतालों को सीधे कॉर्पोरेशन से दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि दवाओं की किल्लत को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। जरूरी दवाओं की उपलब्धता का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ