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दफ्तरों में ही जमे रहे टीमों के अधिकारी,पॉलीथिन का धड़ल्ले से हुआ उपयोग
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2016 11:45 PM IST
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पॉलीथिन के कैरीबैग पर लगी रोक को प्रभावी बनाने के लिए गुरुवार से चलाया
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जाने वाला अभियान पहले दिन ही धड़ाम हो गया।
जिले भर में आज से सघन चेकिंग अभियान चलाने और पॉलीथिन का प्रयोग करते हुए पकड़े जाने पर पहले दिन 500 रुपये का जुर्माना वसूले जाने का दावा करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने 17 टीमें गठित कर चुप्पी साध ली।
पॉलीथिन के बैन का गुरुवार को पहला दिन था, लेकिन कोई भी टीम छापेमारी करने नहीं निकली। टीमों के अधिकारी दफ्तरों में ही जमे रहे।
वहीं बाजारों में खुलेआम पॉलीथिन के कैरीबैगों का उपयोग हुआ, लेकिन इसे रोकने वाला कोई नहीं था। शासन ने 21 जनवरी से पॉलीथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन पहले दिन ही जिले में इसका पालन नहीं हो सका।
इसकी वजह प्रशासन की ढिलाई और टीमों के अफसरों की लापरवाही रही। हालांकि बुधवार शाम को ही छापेमारी के लिए 17 टीमें बना दी गई थीं।
डीएम ने भी पॉलीथिन के कैरीबैगों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन मातहतों ने इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। कोई भी टीम गुरुवार को छापेमारी पर नहीं गई।
न तो किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही किसी से जुर्माना वसूला गया। नतीजा यह हुआ कि शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक कार्रवाई से बेखौफ दुकानदार और लोग पॉलीथिन के कैरीबैग का उपयोग करते रहे।
कचहरी रोड स्थित एक दुकान में खरीदारी करने गई महिला को दुकानदार ने पॉलीथिन के कैरीबैग में रखकर कपड़े दे दिए। बैन और इसके खिलाफ प्रशासन द्वारा अभियान चलाए जाने के दावे के बावजूद देखने या रोकने वाला कोई नहीं था।
सुपर मार्केट खरीदारी करने आई युवतियों को भी दुकानदार ने पॉलीथिन के कैरीबैग में रखकर सामान दिया। आज से शहरी क्षेत्र में अभियान चलाने के लिए नगर पालिका परिषद के ईओ के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था(
लेकिन यहां पर कोई छापेमारी नहीं हुई। इससे दुकानदार और लोग बेखौफ रहे। सब्जी मंडी में छोटी से लेकर बड़ी सभी दुकानों में खुलेआम पॉलीथिन के बने कैरीबैग का प्रयोग हुआ।
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लेकिन बैन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए गठित टीम ने न तो कोई कार्रवाई नहीं की। और न ही टीम के अधिकारी कहीं चेकिंग करते दिखाई दिए। पॉलीथिन के कैरीबैगों में सामान लेकर जाती ये युवतियां इसका उदाहरण हैं।
कैपरगंज स्थित एक बेकरी में खरीदारों को पॉलीथिन के कैरीबैगों में सामान दिया गया। यह बात अलग थी कि पहले बेकरी के संचालक अपनी दुकान के नाम से छपे कैरीबैगों का प्रयोग करता था।
क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. एके सिंह ने कहा कि मेरी और एफएसडीए के निरीक्षक की संयुक्त अगुवाई में एक टीम का गठन किया गया है।
लेकिन एफएसडीए के निरीक्षक जिला जेल किसी काम से चले गए थे। इसके चलते गुरुवार को अभियान नहीं चल सका।
नगर पालिका परिषद के ईओ पीएन सिंह बोले कि मुझे टीम में शामिल किए जाने का आदेश गुरुवार शाम को मिला।
आदेश मिलते ही प्रचार के लिए बैनर व पोस्टर छपवाने के लिए दिए गए हैं। शुक्रवार से अभियान चलाया जाएगा। आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
एडीएम वित्त एवं राजस्व शीतला प्रसाद ने कहा कि सिर्फ टीमें बनाने के लिए कहा गया था। 17 टीमें बुधवार को ही गठित कर दी गई थी। टीमों ने क्या कार्रवाई की, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
अभियान के लिए जिले में कोई नोडल अफसर नहीं बनाया गया है। इसलिए कार्रवाई की जानकारी संबंधित टीमों के अफसर ही दे पाएंगे।
डीएम एसपी गंगवार ने कहा कि पॉलीथिन पर रोक के आदेश को पालन कराने की जिम्मेदारी एडीएम वित्त एवं राजस्व को दी गई है। कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसका पता लगाया जाएगा। शासन के आदेश का पालन कराया जाएगा।
जिले भर में आज से सघन चेकिंग अभियान चलाने और पॉलीथिन का प्रयोग करते हुए पकड़े जाने पर पहले दिन 500 रुपये का जुर्माना वसूले जाने का दावा करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने 17 टीमें गठित कर चुप्पी साध ली।
पॉलीथिन के बैन का गुरुवार को पहला दिन था, लेकिन कोई भी टीम छापेमारी करने नहीं निकली। टीमों के अधिकारी दफ्तरों में ही जमे रहे।
वहीं बाजारों में खुलेआम पॉलीथिन के कैरीबैगों का उपयोग हुआ, लेकिन इसे रोकने वाला कोई नहीं था। शासन ने 21 जनवरी से पॉलीथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन पहले दिन ही जिले में इसका पालन नहीं हो सका।
इसकी वजह प्रशासन की ढिलाई और टीमों के अफसरों की लापरवाही रही। हालांकि बुधवार शाम को ही छापेमारी के लिए 17 टीमें बना दी गई थीं।
डीएम ने भी पॉलीथिन के कैरीबैगों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन मातहतों ने इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। कोई भी टीम गुरुवार को छापेमारी पर नहीं गई।
न तो किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही किसी से जुर्माना वसूला गया। नतीजा यह हुआ कि शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक कार्रवाई से बेखौफ दुकानदार और लोग पॉलीथिन के कैरीबैग का उपयोग करते रहे।
कचहरी रोड स्थित एक दुकान में खरीदारी करने गई महिला को दुकानदार ने पॉलीथिन के कैरीबैग में रखकर कपड़े दे दिए। बैन और इसके खिलाफ प्रशासन द्वारा अभियान चलाए जाने के दावे के बावजूद देखने या रोकने वाला कोई नहीं था।
सुपर मार्केट खरीदारी करने आई युवतियों को भी दुकानदार ने पॉलीथिन के कैरीबैग में रखकर सामान दिया। आज से शहरी क्षेत्र में अभियान चलाने के लिए नगर पालिका परिषद के ईओ के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था(
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लेकिन यहां पर कोई छापेमारी नहीं हुई। इससे दुकानदार और लोग बेखौफ रहे। सब्जी मंडी में छोटी से लेकर बड़ी सभी दुकानों में खुलेआम पॉलीथिन के बने कैरीबैग का प्रयोग हुआ।
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लेकिन बैन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए गठित टीम ने न तो कोई कार्रवाई नहीं की। और न ही टीम के अधिकारी कहीं चेकिंग करते दिखाई दिए। पॉलीथिन के कैरीबैगों में सामान लेकर जाती ये युवतियां इसका उदाहरण हैं।
कैपरगंज स्थित एक बेकरी में खरीदारों को पॉलीथिन के कैरीबैगों में सामान दिया गया। यह बात अलग थी कि पहले बेकरी के संचालक अपनी दुकान के नाम से छपे कैरीबैगों का प्रयोग करता था।
क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. एके सिंह ने कहा कि मेरी और एफएसडीए के निरीक्षक की संयुक्त अगुवाई में एक टीम का गठन किया गया है।
लेकिन एफएसडीए के निरीक्षक जिला जेल किसी काम से चले गए थे। इसके चलते गुरुवार को अभियान नहीं चल सका।
नगर पालिका परिषद के ईओ पीएन सिंह बोले कि मुझे टीम में शामिल किए जाने का आदेश गुरुवार शाम को मिला।
आदेश मिलते ही प्रचार के लिए बैनर व पोस्टर छपवाने के लिए दिए गए हैं। शुक्रवार से अभियान चलाया जाएगा। आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
एडीएम वित्त एवं राजस्व शीतला प्रसाद ने कहा कि सिर्फ टीमें बनाने के लिए कहा गया था। 17 टीमें बुधवार को ही गठित कर दी गई थी। टीमों ने क्या कार्रवाई की, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
अभियान के लिए जिले में कोई नोडल अफसर नहीं बनाया गया है। इसलिए कार्रवाई की जानकारी संबंधित टीमों के अफसर ही दे पाएंगे।
डीएम एसपी गंगवार ने कहा कि पॉलीथिन पर रोक के आदेश को पालन कराने की जिम्मेदारी एडीएम वित्त एवं राजस्व को दी गई है। कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसका पता लगाया जाएगा। शासन के आदेश का पालन कराया जाएगा।