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Raebareli News: लेबर सेस न जमा करने पर 10 ठेकेदारों को नोटिस
Sun, 01 Feb 2026 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:37 AM IST
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रायबरेली। नगर पालिका परिषद रायबरेली में निर्माण कार्य कराने वाले ठेकेदारों की लापरवाही पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। ठेकेदारों ने कराए गए निर्माण कार्यों के एवज में लेबर सेस जमा नहीं किया है। इस मामले में संज्ञान लेते हुए नगर पालिका परिषद ने संबंधित 10 ठेकेदारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अधिशासी अधिकारी (ईओ) स्वर्ण सिंह ने बताया कि साल 2018-19 का लेबर सेस जमा न करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नोटिस का जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि ठेकेदार संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लेबर सेस का उद्देश्य
लेबर सेस, जिसे श्रम उपकर भी कहा जाता है। निर्माण कार्यों से प्राप्त होने वाली राशि का एक छोटा सा हिस्सा होता है। इस उपकर का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के कल्याण और उनके लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करना होता है।
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इसमें श्रमिकों के लिए सुरक्षित आश्रय, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का संचालन शामिल है। यदि ठेकेदार यह सेस जमा नहीं करते हैं तो इसका सीधा असर श्रमिकों के कल्याण पर पड़ता है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। नगर पालिका परिषद इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए संबंधित ठेकेदारों को जवाबदेह ठहरा रही है।
किस ठेकेदार का कितना लेबर सेस बकाया
मेसर्स राष्ट्रीय निर्माण का 3844, मेसर्स महावीर प्रसाद 67062, मेसर्स घनश्याम सिंह 27852, मेसर्स प्रताप कांस्ट्रक्शन 18047, मेसर्स प्रधान कांस्ट्रक्शन 4777, मेसर्स शकूर इंटरप्राइजेज 19100, मेसर्स ठाकुर ब्रदर्श 27764, मेसर्स समीर इंटरप्राइवेज 16512, मेसर्स अमरनाथ सिंह 18862, मेसर्स बद्री मौर्य जी का 45877 रुपये लेबर सेस बकाया है।
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अधिशासी अधिकारी (ईओ) स्वर्ण सिंह ने बताया कि साल 2018-19 का लेबर सेस जमा न करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नोटिस का जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि ठेकेदार संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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लेबर सेस का उद्देश्य
लेबर सेस, जिसे श्रम उपकर भी कहा जाता है। निर्माण कार्यों से प्राप्त होने वाली राशि का एक छोटा सा हिस्सा होता है। इस उपकर का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के कल्याण और उनके लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करना होता है।
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इसमें श्रमिकों के लिए सुरक्षित आश्रय, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का संचालन शामिल है। यदि ठेकेदार यह सेस जमा नहीं करते हैं तो इसका सीधा असर श्रमिकों के कल्याण पर पड़ता है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। नगर पालिका परिषद इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए संबंधित ठेकेदारों को जवाबदेह ठहरा रही है।
किस ठेकेदार का कितना लेबर सेस बकाया
मेसर्स राष्ट्रीय निर्माण का 3844, मेसर्स महावीर प्रसाद 67062, मेसर्स घनश्याम सिंह 27852, मेसर्स प्रताप कांस्ट्रक्शन 18047, मेसर्स प्रधान कांस्ट्रक्शन 4777, मेसर्स शकूर इंटरप्राइजेज 19100, मेसर्स ठाकुर ब्रदर्श 27764, मेसर्स समीर इंटरप्राइवेज 16512, मेसर्स अमरनाथ सिंह 18862, मेसर्स बद्री मौर्य जी का 45877 रुपये लेबर सेस बकाया है।