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रेलवे स्टेशन बछरावां में एक भी पेट्रोलमैन नहीं

Wed, 23 Nov 2016 12:31 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Wed, 23 Nov 2016 12:31 AM IST
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Not a single Patrolman Bachhrāwān railway station
ट्रेन में घुसती एक यात्री - फोटो : अमर उजाला
ट्रेनों के गुजरने के लिए बनाए गए रेल ट्रैकों की सुरक्षा रामभरोसे है। वजह रेल ट्रैकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वालों का ही यहां पर टोटा बना है। रेलवे स्टेशन बछरावां में एक भी पेट्रोलमैन की तैनाती नहीं है। पेट्रोलमैन, ट्रैकमैन, गेटमैन तक की कमी से कभी भी यहां पर कोई हादसा हो सकता है।
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लेकिन रैल ट्रैकों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता नहीं बरती जाती है। यही नहीं रेल ट्रैकों पर आवारा जानवर कभी भी घूमे देखे जा सकते हैं। इस पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है, जिससे हादसे का अंदेशा रहता है।
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जिले से होकर महत्वपूर्ण रेल लाइनें गुजरी हैं। इसमें रायबरेली-लखनऊ रेलखंड, रायबरेली-इलाहाबाद रेलखंड, रायबरेली-बनारस रेलखंड, रायबरेली-डलमऊ रेलखंड, रायबरेली-जायस रेलखंड शामिल हैं। इन रेलखंडों से 70 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है।
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इन रेलखंडों से गुजरने वाली ट्रेनों से प्रतिदिन 30 हजार से अधिक मुसाफिर सफर करते हैं। बावजूद रेल ट्रैकों की सुरक्षा पर लापरवाही बरती जा रही है। सबसे बड़ी वजह ये है कि स्टाफ की कमी होने से ट्रैक की सुरक्षा करना आसान नहीं है।

विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक रेलवे स्टेशन बछरावां में एक भी पेट्रोलमैन की तैनाती नहीं है। 50 ट्रैकमैन, आठ गेटमैन की कमी है। लक्ष्मणनपुर रेलवे स्टेशन में एक गैटमैन की कमी है। इसी तरह हरचंदपुर, जायस, गंगागंज, रेलवे स्टेशन रायबरेली में स्टाफ की कमी से ट्रैक की देखभाल नहीं हो पा रही है।

जिले में 10 रेल पथ निरीक्षक की तैनाती है। यही नहीं ऐसे स्थान हैं, जहां पर रेल ट्रैकों की मिट्टी भराई ठीक तरीके से नहीं है, जिससे हादसे का अंदेशा है। रोजाना पटरियों की निगरानी के लिए पेट्रोलमैन की ड्यूटी लगाई जाती है।

अफसरों के मुताबिक एक पेट्रोलमैन को रोजाना दो किमी के चक्कर कई बार लगाकर रेल ट्रैक की निगरानी करनी पड़ती है। पर यहां स्टाफ की कमी की वजह से पटरियों की निगरानी नहीं हो पाती है। यह भी चूक लापरवाही का सबब बन सकती है।

अधिकारियों का दावा है कि जाड़े में कोहरे के दिनों में रेल पटरियों पर पटाखे बांधे जाते हैं। पर अभी कोहरे जैसी स्थिति नहीं है। कोहरा पड़ने पर ट्रेन संचालन में कोई बाधा न आए, इसके लिए पटरियों में पटाखा बांधे जाते हैं।

कानपुर की तरह यहां पर भी दर्दनाक हादसा हुआ। मार्च 2015 में देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस हादसे के बाद भी रेल ट्रैकों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।


सहायक मंडल अभियंता रेलवे राहुल सब्बरवाल का कहना है कि स्टाफ की कमी तो है, लेकिन रेल ट्रैकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। रोजाना रेल ट्रैकों की निगरानी कराई जाती है। कोहरे पड़ने पर पटरियों पर पटाखे बांधे जाते हैं, ताकि ट्रेनों के संचालन में कोई दिक्कत न आए।
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