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दुबारा कराई गई जांच में भी नहीं मिली राहत, हेडमास्टर बर्खास्त

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 01:15 AM IST
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रायबरेली। सरेनी विकास क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय भवानीपुर में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात तेज बहादुर सिंह को दोबारा हुई जांच में भी राहत नहीं मिल सकी। उन्हें पहले दिसंबर 2019 में बर्खास्त किया गया था। अदालत के आदेश पर प्रधानाध्यापक का पक्ष सुनने और प्रकरण को फिर से परखने के बाद बीएसए ने उन्हें बर्खास्त कर दिया। साथ ही अपनी सेवा के दौरान प्राप्त किए गए वेतन को राजकीय कोष में जमा करने का आदेश भी दिया है।
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वर्ष 1985 में तेज बहादुर सिंह ने रायबरेली जिले के बहादुरपुर विकास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बोझी भूलामऊ (वर्तमान में अमेठी जिला) में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी पाई थी। इस संबंध में शहर के रतापुर निवासी अजयपाल सिंह ने 2018 में शपथ पत्र देकर शिकायत की थी कि तेज बहादुर ने रायबरेली जिले के मैदेमऊ पोस्ट बेहटा कला का फर्जी निवास प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पाई है, जबकि वह मूलरूप से उन्नाव जिले के निहालखेड़ा मजरे धनकोली के रहने वाले हैं। इस मामले में कई स्तर पर जांच कराई गई। छानबीन के दौरान साबित नहीं हो पाया कि तेज बहादुर इसी जिले के मैदेमऊ निवासी हैं।

उनका मूल पता उन्नाव जिला पाया गया। जांच आख्या के आधार पर 5 दिसंबर 2019 को तेज बहादुर को बर्खास्त करते हुए रिकवरी के आदेश दिए गए। वह सरेनी विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय भवानीपुर में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात थे। पदच्युत किए जाने के बाद प्रधानाध्यापक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिस पर 10 दिसंबर को अदालत से हुए आदेश पर 19 दिसंबर को खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय एवं खीरों को जांच सौंपी गई। साथ ही 6 जनवरी को वेतन निर्गत करने का आदेश दिया गया। प्रकरण की जांच रिपोर्ट 13 अगस्त 2020 को आई।
जांच में तेज बहादुर का लिखित स्पष्टीकरण प्राप्त करने के साथ उन्हें सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया। बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा ने बताया कि जांच में बर्खास्त किए गए प्रधानाध्यापक का पक्ष सुना गया। जांच आख्या में स्पष्ट किया गया कि तेज बहादुर उन्नाव जिले के मूल निवासी हैं। वह मैदेमऊ निवासी होने का कोई प्रमाणिक अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच आख्या मिलने के बाद प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से पदच्युत कर दिया गया। फर्जी अभिलेखों के आधार पर अब तक की गई नौकरी के प्रति प्राप्त वेतन को राजकीय कोष में जमा कराने का आदेश भी दिया गया है।

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