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डेढ़ साल में गोदाम से बाहर नहीं निकली डेंगू मिटाने की दवा
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रायबरेली। जिले में डेंगू के मच्छरों ने नाक में दम कर रखा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग करीब डेढ़ साल से मच्छर मारने की दवा का छिड़काव करने में नाकाम है। पर्याप्त मात्रा में केमिकल सीएमओ के गोदाम में डंप रखा है। विभाग करीब 2900 लीटर केरोसीन की व्यवस्था नहीं कर पाया है। बीते आठ माह में डेंगू के 15 केस मिल चुके हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन दवा का छिड़काव बंद होने से डेंगू के मच्छरों की बल्ले-बल्ले है।
जिला मलेरिया विभाग को गांवों के घरों में इंडोर स्प्रे के लिए 145 लीटर पैराथ्रम केमिकल डेढ़ साल पहले ही मिल चुका है। एक लीटर केमिकल में 20 लीटर केरोसीन मिलाकर छिड़कने का मानक है। ऐसे में विभाग को करीब 2900 लीटर केरोसीन की जरूरत है। विभाग डेढ़ साल में एक भी लीटर केरोसीन की व्यवस्था नहीं कर सका है, ताकि छिड़काव हो सके। सीजन आते ही जिले में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही खामियाजा मरीजों व गांव के लोगों को भोगना पड़ रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी भीखुल्लाह का कहना है कि पैराथ्रम केमिकल को केरोसीन में मिलाकर ही स्प्रे किया जाता है। शासन से केरोसीन के लिए कई बार डिमांड की गई, लेकिन केरोसीन न मिलने के कारण मच्छर मारने की दवा का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। केरोसीन मिलने के बाद ही छिड़काव हो सकेगा। सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि केरोसीन न मिलने के कारण घरों के अंदर मच्छर मारने की दवा का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। पर्याप्त मात्रा में केमिकल उपलब्ध है, लेकिन केरोसीन की समस्या है। हालांकि डेंगू के मच्छरों से निपटने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
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डेंगू का मरीज मिलने के बाद उनके घर स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाती है। मरीज के घर के अंदर पैराथ्रम केमिकल का छिड़काव मच्छरों को मारने के लिए जरूरी होने के बाद भी टीम पानी में मच्छरों के लार्वा को चेक करके लौट आती है। अधिक से अधिक परिवार के लोगों के ब्लड की जांच के साथ ही मच्छरों से बचने की सलाह ही दी जाती है। ऐसे में शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
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जिला मलेरिया विभाग को गांवों के घरों में इंडोर स्प्रे के लिए 145 लीटर पैराथ्रम केमिकल डेढ़ साल पहले ही मिल चुका है। एक लीटर केमिकल में 20 लीटर केरोसीन मिलाकर छिड़कने का मानक है। ऐसे में विभाग को करीब 2900 लीटर केरोसीन की जरूरत है। विभाग डेढ़ साल में एक भी लीटर केरोसीन की व्यवस्था नहीं कर सका है, ताकि छिड़काव हो सके। सीजन आते ही जिले में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही खामियाजा मरीजों व गांव के लोगों को भोगना पड़ रहा है।
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जिला मलेरिया अधिकारी भीखुल्लाह का कहना है कि पैराथ्रम केमिकल को केरोसीन में मिलाकर ही स्प्रे किया जाता है। शासन से केरोसीन के लिए कई बार डिमांड की गई, लेकिन केरोसीन न मिलने के कारण मच्छर मारने की दवा का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। केरोसीन मिलने के बाद ही छिड़काव हो सकेगा। सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि केरोसीन न मिलने के कारण घरों के अंदर मच्छर मारने की दवा का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। पर्याप्त मात्रा में केमिकल उपलब्ध है, लेकिन केरोसीन की समस्या है। हालांकि डेंगू के मच्छरों से निपटने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
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डेंगू का मरीज मिलने के बाद उनके घर स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाती है। मरीज के घर के अंदर पैराथ्रम केमिकल का छिड़काव मच्छरों को मारने के लिए जरूरी होने के बाद भी टीम पानी में मच्छरों के लार्वा को चेक करके लौट आती है। अधिक से अधिक परिवार के लोगों के ब्लड की जांच के साथ ही मच्छरों से बचने की सलाह ही दी जाती है। ऐसे में शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।