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बच्चा वार्ड में अव्यवस्था, बेड पर बिछाने को नहीं चादरें
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रायबरेली। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में अव्यवस्था दूर नहीं हो रही है। हाल ये है कि बुखार से पीड़ित बच्चों को बेड पर भर्ती करने के लिए चादरें तक नहीं हैं। तीमारदारों का कहना है कि उन्हें घर से चादर लानी पड़ रही है।
यही नहीं साफ-सफाई के नाम पर भी खानापूरी की जा रही है। इससे बुखार से पीड़ित बच्चों में गंदगी की वजह से और इन्फेक्शन फैलने का खतरा मंडरा रह है। यही नहीं सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने के लिए मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी।
इधर, मौसम में हो रहे बदलाव के चलते लोग तेजी से बुखार की चपेट में आ रहे हैं। खासकर बच्चे बुखार की चपेट में अधिक आ रहे हैं। सोमवार को बच्चा वार्ड में कुल 35 बच्चे भर्ती थे। इनमें से करीब 15 बच्चे बुखार से पीड़ित थे। कुछ बेड पर बच्चों को बिना चादर के ही लिटाया गया था।
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तीमारदारों का कहना था कि अस्पताल से बेड पर बिछाने के लिए चादरें नहीं दी गई हैं। इससे घर से चादर लानी पड़ी है। वार्ड की साफ-सफाई भी ठीक तरीके से नहीं की जा रही है।
उधर, सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि बुखार के खतरे को देखते हुए बच्चों का बेहतर इलाज कराने का प्रयास किया जा रहा है। चादर की कमी नहीं है। यदि किसी को चादर नहीं मिली तो शिकायत करे, कार्रवाई होगी।
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यही नहीं साफ-सफाई के नाम पर भी खानापूरी की जा रही है। इससे बुखार से पीड़ित बच्चों में गंदगी की वजह से और इन्फेक्शन फैलने का खतरा मंडरा रह है। यही नहीं सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने के लिए मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी।
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इधर, मौसम में हो रहे बदलाव के चलते लोग तेजी से बुखार की चपेट में आ रहे हैं। खासकर बच्चे बुखार की चपेट में अधिक आ रहे हैं। सोमवार को बच्चा वार्ड में कुल 35 बच्चे भर्ती थे। इनमें से करीब 15 बच्चे बुखार से पीड़ित थे। कुछ बेड पर बच्चों को बिना चादर के ही लिटाया गया था।
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तीमारदारों का कहना था कि अस्पताल से बेड पर बिछाने के लिए चादरें नहीं दी गई हैं। इससे घर से चादर लानी पड़ी है। वार्ड की साफ-सफाई भी ठीक तरीके से नहीं की जा रही है।
उधर, सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि बुखार के खतरे को देखते हुए बच्चों का बेहतर इलाज कराने का प्रयास किया जा रहा है। चादर की कमी नहीं है। यदि किसी को चादर नहीं मिली तो शिकायत करे, कार्रवाई होगी।