फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   NIBI's alumni had made their mark even abroad

Raebareli News: नीबी के पूर्व छात्रों ने विदेशों तक बनाई थी पहचान

Tue, 29 Jul 2025 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Tue, 29 Jul 2025 12:23 AM IST
विज्ञापन
NIBI's alumni had made their mark even abroad
सरेनी विकास क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय नीबी प्रथम।
रायबरेली/सरेनी। प्राथमिक विद्यालय नीबी-प्रथम, जहां से पढ़े हुए न जाने कितने विद्यार्थियों ने देश-विदेश तक अपनी पहचान बनाई। कभी इस स्कूल में हर कक्षा के कई सेक्शन चला करते थे। छात्र संख्या कम होने कारण आजादी के पहले से संचालित इस स्कूल का विलय कर दिया गया है। स्कूल बंद हो गया है। बच्चे दूसरे स्कूल भेज दिए गए हैं। इससे गांव के लोग ही नहीं, बल्कि बाहर रहने वाले पूर्व छात्र भी आहत हैं।
विज्ञापन


विकास क्षेत्र सरेनी के नीबी गांव में तीन परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें प्राइमरी स्कूल नीबी-प्रथम, प्राइमरी स्कूल नीबी-द्वितीय और जूनियर हाईस्कूल नीबी शामिल है। नीबी-प्रथम में बच्चों की संख्या 34 थी, जिसकी वजह से इस स्कूल का विलय गांव के ही दूसरे विद्यालय में कर दिया गया है। इसकी वजह से वर्ष 1923 में स्थापित प्राथमिक विद्यालय नीबी-प्रथम में ताला लटक रहा है।
विज्ञापन


नीबी के रहने वाले विवेक पांडेय बताते हैं कि उन्होंने खुद 1982 से 1985 तक इसी स्कूल में प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी। उस समय 300 से अधिक बच्चे पढ़ा करते थे। आसपास के कई गांवों से बच्चे आते थे, जिससे हर कक्षा के कई सेक्शन चलते थे। विद्यालय को संवारने का भी पूरा प्रयास किया गया, लेकिन गांव-गांव खुले प्राइवेट स्कूलों की वजह से सरकारी विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम होती गई। नतीजा यह हुआ कि नीबी का सरकारी स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गया।
विज्ञापन
विज्ञापन



नीबी में पढ़कर बने वैज्ञानिक व डॉक्टर
नीबी गांव के सरकारी स्कूल में प्राथमिक शिक्षा लेने वाले कई पूर्व छात्र वैज्ञानिक व डॉक्टर आदि बनकर देश-विदेश में पहचान बना चुके हैं। गांव के ही विवेक पांडेय बताते हैं कि 1950-52 का समय रहा होगा, जब कालीशंकर शुक्ला ने यहां शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वह इसरो में वैज्ञानिक बने। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के कारण ही उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला था। इसी स्कूल में 1942-43 में पढ़े शीतला शरण अग्निहोत्री भी राष्ट्रपति से पुरस्कृत हुए थे। उन्होंने शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दी थीं।

भोलानाथ पांडेय ने 1952 के आसपास पढ़ाई की। अच्छी पढ़ाई के कारण बीएचयू में गोल्ड मेडल मिला। सिंचाई विभाग से अधीक्षण अभियंता पद से रिटायर हुए। प्रयागराज में रहते हैं। नीबी के डॉ. मुकेश शुक्ला दिल्ली में नामी चिकित्सक हैं, जिन्होंने 1985 के आसपास नीबी के स्कूल में प्राइमरी शिक्षा ली, फिर एमबीबीएस की डिग्री लेने के लिए विदेश गए। वर्ष 1965 में ओमप्रकाश शुक्ल ने भी इसी स्कूल में पढ़ाई की, फिर मर्चेंट नेवी में सेवाएं देने लगे। इस समय यूएसए में रहते हैं।


स्कूल से जुड़ी हैं पुरानी यादें
नीबी के पूर्व प्रधान एवं समाजसेवी शशिकांत अग्निहोत्री कहते हैं कि प्राइमरी स्कूल नीबी की स्थापना 1923 में हुई थी। उस समय मेरा जन्म भी नहीं हुआ था। आज मेरी उम्र 70 वर्ष है। मैं भी सेवानिवृत्त शिक्षक हूं। मैंने भी इसी प्राइमरी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली थी। अब विलय के नाम पर स्कूल बंद करना न्याय संगत नहीं है। अगर मनमानी की गई तो ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा।



असहमति जताने के बाद भी किया विलय
ग्राम नीबी की महिला प्रधान कमलेश कुमारी बताती हैं कि प्राथमिक विद्यालय नीबी का विलय करने के मामले में मनमानी की गई है। प्रधान होने के नाते उन्होंने असहमति जताई थी। ग्राम शिक्षा समिति भी विलय को लेकर सहमत नहीं है। विभागीय अधिकारियों को लिखकर दिया गया था। इसके बावजूद विलय किया गया है। विद्यालय का अस्तित्व बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed