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Raebareli News: 40 हजार टन डंप कूड़ा, बेहाल 30 हजार आबादी
Mon, 30 Jan 2023 01:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 30 Jan 2023 01:59 PM IST
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रायबरेली। फरवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण-2023 शुरू होना है, लेकिन इस बार भी तैयारी अधूरी है। शहर में ट्रोमल मशीनों के जरिए कूड़ा निस्तारण का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। इस वजह से कूड़ा निस्तारण प्लांट के आसपास रहने वाली करीब 30 हजार आबादी दूषित आबोहवा से बेहाल है।
शहर में दो डंपिंग ग्राउंड हैं। इसमें एक पटेल नगर, जबकि दूसरा जैतूपुर में है। दोनों ही स्थानों पर कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हैं, जिससे आए दिन आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे वायु प्रदूषण होता है। शासन ने कूूड़ा निस्तारण कराने की जिम्मेदारी जलनिगम की निर्माण इकाई सीएनडीएस को दी थी। सीएनडीएस ने कार्यदायी संस्था रिकार्ट इनवोवेशन प्राइवेट लिमिटेड को काम सौंपा था। ट्रोमल मशीन से कूड़ा निस्तारण का काम मई 2022 में शुरू कराया गया था। दोनों स्थानों पर 80 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डंप था। नौ माह बाद भी पूरे कूड़े का निस्तारण नहीं हो पाया है। यही वजह है कि मौजूदा समय में करीब 40 हजार टन कूड़ा डंप है।
इससे डंपिंग ग्राउंड के आसपास के पीएसी, गजोधर का पुरवा, जगदीशपुर, किशन का पुरवा, तिलक नगर, जैतूपुर मोहल्ले की 30 हजार आबादी को दुर्गंध से सांस लेना पड़ रहा हैै। बीच-बीच में कूड़े में आग लगने से धुएं की वजह से लोग और परेशान हो जाते हैं। प्लांट पर पहले से काफी कूड़ा डंप होने से शहर का कूड़ा वहां नहीं जा पाता। इससे शहर में कई जगहों पर कूूड़े के ढेर लगे हैं। गंदगी के बीच लोगों का रहना पड़ रहा है। फरवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 शुरू होना है। इसके लिए केंद्रीय टीम यहां आने वाली है। बावजूद शहर को साफ सुथरा बनानेे की कवायद धीमी चल रही है।
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हर दिन शहर में निकलता 60 टन कूड़ा
शहर क्षेत्र के 34 मोहल्लों में प्रतिदिन 60 टन कूूड़ा निकलता है। इस कूड़े को डंपिंग स्थानों पर पहुंचाया जाता है, लेकिन वहां पर पहले से ही कूड़े के ढेर लगने से शहर का पूरा कूूड़ा उठ नहीं पा रहा है। इससे शहर की साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभावित है। शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए अलग से शुरू की गई डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना भी कागजोंं तक सीमित होकर रह गई है।
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शहर में दो डंपिंग ग्राउंड हैं। इसमें एक पटेल नगर, जबकि दूसरा जैतूपुर में है। दोनों ही स्थानों पर कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हैं, जिससे आए दिन आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। इससे वायु प्रदूषण होता है। शासन ने कूूड़ा निस्तारण कराने की जिम्मेदारी जलनिगम की निर्माण इकाई सीएनडीएस को दी थी। सीएनडीएस ने कार्यदायी संस्था रिकार्ट इनवोवेशन प्राइवेट लिमिटेड को काम सौंपा था। ट्रोमल मशीन से कूड़ा निस्तारण का काम मई 2022 में शुरू कराया गया था। दोनों स्थानों पर 80 हजार मीट्रिक टन कूड़ा डंप था। नौ माह बाद भी पूरे कूड़े का निस्तारण नहीं हो पाया है। यही वजह है कि मौजूदा समय में करीब 40 हजार टन कूड़ा डंप है।
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इससे डंपिंग ग्राउंड के आसपास के पीएसी, गजोधर का पुरवा, जगदीशपुर, किशन का पुरवा, तिलक नगर, जैतूपुर मोहल्ले की 30 हजार आबादी को दुर्गंध से सांस लेना पड़ रहा हैै। बीच-बीच में कूड़े में आग लगने से धुएं की वजह से लोग और परेशान हो जाते हैं। प्लांट पर पहले से काफी कूड़ा डंप होने से शहर का कूड़ा वहां नहीं जा पाता। इससे शहर में कई जगहों पर कूूड़े के ढेर लगे हैं। गंदगी के बीच लोगों का रहना पड़ रहा है। फरवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 शुरू होना है। इसके लिए केंद्रीय टीम यहां आने वाली है। बावजूद शहर को साफ सुथरा बनानेे की कवायद धीमी चल रही है।
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हर दिन शहर में निकलता 60 टन कूड़ा
शहर क्षेत्र के 34 मोहल्लों में प्रतिदिन 60 टन कूूड़ा निकलता है। इस कूड़े को डंपिंग स्थानों पर पहुंचाया जाता है, लेकिन वहां पर पहले से ही कूड़े के ढेर लगने से शहर का पूरा कूूड़ा उठ नहीं पा रहा है। इससे शहर की साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभावित है। शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए अलग से शुरू की गई डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना भी कागजोंं तक सीमित होकर रह गई है।