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भारत में भी होने लगी अमेरिका के आम की खेती

Sun, 19 Jun 2022 12:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jun 2022 12:24 AM IST
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Mango new crop
अमेरिकन आम और ताइवान पिंक दिखाते अधिकारी। - फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। अब देश में अमेरिका के आम की खेती भी होने लगी है। खासकर उत्तर प्रदेश में अमेरिका के आम की खेती का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है।
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लखनऊ, बहराइच, बस्ती, गोरखपुर आदि जिले में अमेरिका के आम की फसल के पौधे तैयार होते हैैं, जिन्हें हर जिले में बिक्री के लिए भेजा जाता है। खास बात ये है कि यह आम की प्रजाति जुलाई से लेकर अगस्त माह तक आसानी से लोगों को उपलब्ध होती है।
जीआईसी मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन में शनिवार को जिला उद्यान विभाग, बहराइच की ओर से अमेरिकन प्रजाति के आम के पौधे का स्टॉल लगाया गया।
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इस आम को देखने के लिए किसानों की भारी भीड़ जुटी। जिला उद्यान अधिकारी बहराइच आरके वर्मा बताते हैं कि अमेरिका के आम की प्रजाति टॉमी ऐटकिंस और सेनसेसन की खेती भारत में भी होने लगी है। यूपी में ही मौजूदा समय में 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस प्रजाति के आम की खेती हो रही है।
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यह आम जुलाई से लेकर अगस्त तक तैयार हो जाता है। एक आम की कीमत महज 50 से 60 रुपये होती है। बहराइच स्थित मिनी एक्सीलेंस सेंटर बभनी में अमेरिका के इस आम के पौधे तैयार किए जाते हैं। यहीं से पौधे बिक्री किए जाते हैं। किसानों का रुझान इस प्रजाति के आम की फसल की तरफ बढ़ रहा है। इसमें मुनाफा भी अधिक होता है।
ताइवान पिंक (अमरूद) साल में तीन बार होता तैयार
उद्यान निरीक्षक बहराइच कहते हैं कि प्रदेश में ताइवान पिंक (अमरूद) की खेती भी होनी लगी है। रायबरेली की भूमि भी इसके लिए अति उत्तम है।
प्रति एकड़ किसान चार से पांच लाख की आय प्रति वर्ष वैज्ञानिक ढंग से खेती कर प्राप्त कर सकते हैं। खास बात यह है कि ताइवान पिंक अमरूद साल में तीन बार तैयार होता है।

ऐेसे में साल भर ताइवान पिंक (अमरूद) लोगों को खाने के लिए मिलता रहता है। वह कहते हैं कि किसानों को ताइवान पिंक की खेती करने पर जोर देना चाहिए, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन होने से शहर की तरफ युवाओं का पलायन रोका जा सकता है। उद्यान विभाग इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रहा है।
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