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नैनी, लखनऊ की तरह अब जेल में भी बनेगी हाई सिक्योरिटी सेल
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रायबरेली। लखनऊ और नैनी जेल की तरह ही अब जिले की जेल में भी हाई सिक्योरिटी सेल बनेगी। इस सेल में खूंखार आतंकवादी और बड़े अपराधी ही रखे जाते हैं। इस सेल की खासियत होती है कि यहां कोई हवाई हमला नहीं कर सकता है।
उच्च सुरक्षा बैरक के निर्माण को हरी झंडी मिल गई है। इस पर 62 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। हाई सिक्योरिटी सेल के निर्माण की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन को मिली है।
हाई सिक्योरिटी सेल में 12 सेल होंगे। इसमें एक सेल में एक ही आतंकवादी या फिर बड़े अपराधी को रखा जाता है। यहां सुरक्षा के खास इंतजाम होते हैं। इस सेल में बंद अपराधी पर हवाई हमला नहीं हो सकता है। सेल में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं।
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सेल में बंद अपराधी की हर गतिविधि पर सीधे जेल अफसरों की नजर रहती है। अफसर बताते हैं कि प्रदेश में लखनऊ के अलावा नोएडा, बरेली, गौतमबुद्ध नगर, नैनी और सेंट्रल जेल बनारस में ही हाई सिक्योरिटी सेल है। अब इन जिलों के अलावा रायबरेली जेल में भी हाई सिक्योरिटी सेल बनाने को हरी झंडी मिली है।
60 बंदियों की क्षमता की बनेंगी दो बैरकें
जिला कारागार में 60 बंदियों की क्षमता वाली दो अन्य बैरकें भी बनाई जाएंगी। इस पर दो करोड़ 79 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका काम भी यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन को मिला है। इन बैरकों का निर्माण कार्य भी जल्द कराया जाएगा। इन बैरकों के निर्माण होने से बंदियों को रहने में आसानी होगी।
क्षमता से तीन ज्यादा बंदी हैं बंद
मौजूदा समय में जिला कारागार में क्षमता से तीन गुना ज्यादा बंदी बंद हैं। इससे हर समय सुरक्षा को लेकर चौकन्ना रहना पड़ता है। कई बार तो बंदियों में आपस टकराव की स्थिति भी बन जाती है।
अफसर बताते हैं कि जेल में बंदियों को रखने की क्षमता 486 की है, जबकि इस समय 1441 बंद चल रहे हैं। हालांकि बंदियों पर नजर रखने के लिए हर बैरक में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं।
प्रशिक्षु महिला और पुरुष बंदीरक्षकों की तैनाती
शासन की ओर से जिला कारागार में 38 पुरुष और 5 प्रशिक्षु बंदी रक्षकों की तैनाती की गई है। यह सभी जेल की सुरक्षा पर नजर रखने के साथ ही प्रशिक्षण लेंगी। जिला कारागार में स्टाफ की कमी भी अरसे से चल रही है। माना जा रहा है कि इनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद स्टाफ की कमी कुछ हद तक दूर हो जाएगी।
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उच्च सुरक्षा बैरक के निर्माण को हरी झंडी मिल गई है। इस पर 62 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। हाई सिक्योरिटी सेल के निर्माण की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन को मिली है।
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हाई सिक्योरिटी सेल में 12 सेल होंगे। इसमें एक सेल में एक ही आतंकवादी या फिर बड़े अपराधी को रखा जाता है। यहां सुरक्षा के खास इंतजाम होते हैं। इस सेल में बंद अपराधी पर हवाई हमला नहीं हो सकता है। सेल में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं।
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सेल में बंद अपराधी की हर गतिविधि पर सीधे जेल अफसरों की नजर रहती है। अफसर बताते हैं कि प्रदेश में लखनऊ के अलावा नोएडा, बरेली, गौतमबुद्ध नगर, नैनी और सेंट्रल जेल बनारस में ही हाई सिक्योरिटी सेल है। अब इन जिलों के अलावा रायबरेली जेल में भी हाई सिक्योरिटी सेल बनाने को हरी झंडी मिली है।
60 बंदियों की क्षमता की बनेंगी दो बैरकें
जिला कारागार में 60 बंदियों की क्षमता वाली दो अन्य बैरकें भी बनाई जाएंगी। इस पर दो करोड़ 79 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका काम भी यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन को मिला है। इन बैरकों का निर्माण कार्य भी जल्द कराया जाएगा। इन बैरकों के निर्माण होने से बंदियों को रहने में आसानी होगी।
क्षमता से तीन ज्यादा बंदी हैं बंद
मौजूदा समय में जिला कारागार में क्षमता से तीन गुना ज्यादा बंदी बंद हैं। इससे हर समय सुरक्षा को लेकर चौकन्ना रहना पड़ता है। कई बार तो बंदियों में आपस टकराव की स्थिति भी बन जाती है।
अफसर बताते हैं कि जेल में बंदियों को रखने की क्षमता 486 की है, जबकि इस समय 1441 बंद चल रहे हैं। हालांकि बंदियों पर नजर रखने के लिए हर बैरक में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं।
प्रशिक्षु महिला और पुरुष बंदीरक्षकों की तैनाती
शासन की ओर से जिला कारागार में 38 पुरुष और 5 प्रशिक्षु बंदी रक्षकों की तैनाती की गई है। यह सभी जेल की सुरक्षा पर नजर रखने के साथ ही प्रशिक्षण लेंगी। जिला कारागार में स्टाफ की कमी भी अरसे से चल रही है। माना जा रहा है कि इनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद स्टाफ की कमी कुछ हद तक दूर हो जाएगी।